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नरसिंह जयंती 2026: भगवान विष्णु के उग्र अवतार की कथा, पूजा विधि और धार्मिक महत्व

नरसिंह जयंती 2026: भगवान विष्णु के उग्र अवतार की कथा, पूजा विधि और धार्मिक महत्व

नरसिंह जयंती 2026: भगवान विष्णु के उग्र अवतार की कथा, पूजा विधि और धार्मिक महत्व
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नरसिंह जयंती 2026: भगवान विष्णु के उग्र अवतार की कथा, पूजा विधि और धार्मिक महत्व

नरसिंह जयंती 2026

सनातन धर्म में नरसिंह जयंती भगवान विष्णु के चौथे अवतार भगवान नृसिंह के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाई जाती है। यह पर्व भक्त प्रह्लाद की रक्षा और अधर्म के विनाश की याद दिलाता है। धार्मिक मान्यता है कि जब अत्याचार अपनी सीमा पार कर जाता है, तब भगवान स्वयं धर्म की रक्षा के लिए अवतार लेते हैं। वर्ष 2026 में नरसिंह जयंती विशेष आध्यात्मिक महत्व रखती है। इस दिन विधिपूर्वक पूजा करने से भय, शत्रु बाधा और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति मिलती है।

नरसिंह जयंती 2026 कब है?

पंचांग के अनुसार नरसिंह जयंती 30 अप्रैल 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी। यह पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को पड़ता है। भगवान नृसिंह का प्राकट्य प्रदोष काल में हुआ था, इसलिए इस समय पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।

शुभ मुहूर्त

  • मध्याह्न संकल्प समय: सुबह 10:59 बजे से दोपहर 1:38 बजे तक
  • सायंकाल पूजा मुहूर्त: शाम 4:17 बजे से 6:56 बजे तक
  • पारण समय: 1 मई 2026 सुबह 5:41 बजे के बाद

भगवान नरसिंह अवतार की कथा

पुराणों के अनुसार हिरण्यकश्यप नामक असुर राजा ने कठोर तपस्या कर ब्रह्मा जी से ऐसा वरदान प्राप्त कर लिया था कि उसे न मनुष्य मार सके, न पशु; न दिन में, न रात में; न घर के अंदर, न बाहर। वरदान के अहंकार में उसने स्वयं को भगवान घोषित कर दिया।

लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। हिरण्यकश्यप ने उसे कई बार मारने का प्रयास किया, परंतु हर बार भगवान ने उसकी रक्षा की। एक दिन जब हिरण्यकश्यप ने क्रोध में पूछा कि तुम्हारा भगवान कहाँ है, तब प्रह्लाद ने कहा—“भगवान सर्वत्र हैं।”

तभी महल के स्तंभ से भगवान विष्णु आधे मनुष्य और आधे सिंह के रूप में प्रकट हुए। उन्होंने संध्या समय, महल की दहलीज पर, अपनी गोद में हिरण्यकश्यप को रखकर नाखूनों से उसका वध किया। इस प्रकार भगवान ने अपने भक्त की रक्षा की और अधर्म का अंत किया।

नरसिंह जयंती का धार्मिक महत्व

नरसिंह जयंती केवल एक पर्व नहीं, बल्कि यह संदेश देती है कि सच्ची भक्ति और सत्य की हमेशा जीत होती है।

इस दिन पूजा करने से:

  • भय और चिंता दूर होती है
  • शत्रु बाधा समाप्त होती है
  • नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है
  • आत्मबल और साहस बढ़ता है
  • कोर्ट-कचहरी संबंधी मामलों में राहत मिलती है
  • घर में सुख-शांति आती है

नरसिंह जयंती 2026 पूजा विधि

सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ पीले या केसरिया वस्त्र धारण करें।

पूजा स्थल पर भगवान नरसिंह और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।

भगवान को पंचामृत से स्नान कराएं।

पीले फूल, तुलसी दल, अक्षत, चंदन और नैवेद्य अर्पित करें।

घी का दीपक जलाकर मंत्र जाप करें:

ॐ नृसिंहाय नमः

या

ॐ उग्रवीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्।
नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्यु मृत्युं नमाम्यहम्॥

सायंकाल आरती करें और कथा का पाठ करें। व्रत रखने वाले अगले दिन पारण करें।

नरसिंह जयंती पर करें ये विशेष उपाय

शत्रु बाधा से मुक्ति के लिए

108 बार “ॐ नृसिंहाय नमः” मंत्र का जाप करें।

मानसिक शांति के लिए

नरसिंह कवच का पाठ करें।

घर की सुरक्षा के लिए

मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाएं।

आर्थिक उन्नति के लिए

जरूरतमंदों को अन्न और वस्त्र दान करें।

व्रत के नियम

  • सात्विक भोजन करें
  • क्रोध और नकारात्मक विचारों से बचें
  • ब्रह्मचर्य का पालन करें
  • भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें
  • गरीबों की सहायता करें

निष्कर्ष

नरसिंह जयंती 2026 भगवान विष्णु की दिव्य शक्ति और भक्तों की रक्षा का पावन पर्व है। यह दिन हमें सिखाता है कि ईश्वर अपने सच्चे भक्तों की रक्षा के लिए किसी भी रूप में प्रकट हो सकते हैं। श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने पर जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

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April 30, 2026 4 min read
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