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मॉं कुष्मांडा : नवरात्रि की चतुर्थ देवी

मॉं कुष्मांडा : नवरात्रि की चतुर्थ देवी

मॉं कुष्मांडा : नवरात्रि की चतुर्थ देवी
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मॉं कुष्मांडा : नवरात्रि की चतुर्थ देवी

मॉं कुष्मांडा : नवरात्रि की चतुर्थ देवी

नवरात्रि के चौथे दिन देवी के कुष्मांडा स्वरूप की पूजा की जाती है। देवी का यह स्वरूप सूर्य से संबंधित है। इनकी पूजा से सूर्य ग्रह से मिल रही पीड़ाएं दूर हो जाती है। मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है। आर्थिक तरक्की होती है।नवरात्र-पूजन के चौथे दिन कूष्माण्डा देवी की उपासना के लिए हरे रंग का उपयोग लाभदायक रहेगा।माता के चौथे स्वरूप की उपासना करने से जटिल से जटिल रोगों से मुक्ति मिलती है और सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। देवी के इस रूप की कृपा से निर्णंय लेने की क्षमता में वृद्धि एवं मानसिक शक्ति अच्छी रहती हैं। इस तिथि को मालपुआ का भोग लगाना अच्छा होता हैं। भोग लगाने के बाद उसे बच्चों में वितरित करने से पुण्य फलों में वृद्धि होती हैं।

कूष्माण्डा का संस्कृत में अर्थ होता है लौकी, कद्दू। अब अगर आप किसी को मज़ाक में लौकी, कद्दू पुकारेंगे तो वह बुरा मान जाएंगे और आपके प्रति क्रोधित होंगे।लौकी, कद्दू गोलाकार है। अतः यहाँ इसका अर्थ प्राणशक्ति से है – वह प्राणशक्ति जो पूर्ण, एक गोलाकार, वृत्त की भांति।

मां कूष्माण्डा का यह मंत्र करेगा आपका कल्याण

ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥
या देवी सर्वभूतेषु माँ कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

भारतीय परंपरा के अनुसार लौकी, कद्दू का सेवन मात्र ब्राह्मण, महा ज्ञानी ही करते थे। अन्य कोई भी वर्ग इसका सेवन नहीं करता था। लौकी, कद्दू आपकी प्राणशक्ति, बुद्धिमत्ता और शक्ति को बढ़ाते है। लौकी, कद्दू के गुण के बारे में ऐसा कहा गया है, कि यह प्राणों को अपने अंदर सोखती है, और साथ ही प्राणों का प्रसार भी करती है। यह इस धरती पर सबसे अधिक प्राणवान और ऊर्जा प्रदान करने वाली शाक, सब्ज़ी है। जिस प्रकार अश्वथ का वृक्ष २४ घंटे ऑक्सीजन देता है उसी प्रकार लौकी, कद्दू ऊर्जा को ग्रहण या अवशोषित कर उसका प्रसार करते है। सम्पूर्ण जगत के हर कण में ऊर्जा और प्राणशक्ति का अनुभव करें। इस सर्वव्यापी, जागृत, प्रत्यक्ष बुद्धिमत्ता का सृष्टि में अनुभव करना ही कूष्माण्डा है।

Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

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October 1, 2019 2 min read
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