“गायत्री” शब्द दो शब्दों से बना है: “गायत ” का मतलब पाप है और “त्रि” का मतलब है मुक्ति इस प्रकार गायत्री का अर्थ है “पाप से मुक्ति”. गायत्री देवी ने “गायत्री मंत्र” देकर सम्पूर्ण मानव जाति को आशीर्वाद दिया. यह “गुरु मंत्र” या “सावित्री मंत्र” के रूप में भी जाना जाता है. गायत्री मंत्र का अभ्यास सभी वेदों का सार है. देवी गायत्री को “वेद-माता” या वेदों की माँ कहा जाता है. गायत्री देवी, जो पंचमुख़ी है, हमारी पांच इंद्रियों और प्राणों की देवी मानी जाती है. भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान शिव भी इस मंत्र का जाप करते थे. गायत्री मंत्र देवताओं का खाना होने के लिए कहा जाता है। यह मंत्र है अज्ञानी (मिटा देने वाले) इंसान को मूल प्रकृति के इंसान में बदल देने के लिए. अज्ञान रुपी अन्धकार की वजह से आत्मा परमात्मा से नहीं मिल पाती और अपनी पहचान खो देती है. जब अज्ञान समाप्त हो चुका होगा, हम अपने मूल प्रकृति के स्वभाव को फिर से शुरू करने में सक्षम होंगे. गायत्री मंत्र “प्रकाश और जीवन के दाता” की प्रार्थना के रूप में भी माना जाता है.

मंत्र के प्रत्येक शब्द का अर्थ:
गायत्री मंत्र के पहले नौं शब्द प्रभु के गुणों की व्याख्या करते हैं.
ॐ = प्रणव
भूर = मनुष्य को प्राण प्रदाण करने वाला
भुवः = दुख़ों का नाश करने वाला
स्वः = सुख़ प्रदाण करने वाला
तत = वह, सवितुर = सूर्य की भांति उज्जवल
वरेण्यं = सबसे उत्तम
भर्गो = कर्मों का उद्धार करने वाला
देवस्य = प्रभु
धीमहि = आत्म चिंतन के योग्य (ध्यान)
धियो = बुद्धि, यो = जो, नः = हमारी, प्रचोदयात् = हमें शक्ति दें (प्रार्थना)
इस प्रकार से यह कहा जा सकता है कि गायत्री मंत्र में तीन पहलुओं का वर्णन है – स्त्रोत, ध्यान और प्रार्थना.
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पढ़िए गायत्री मंत्र का सार संक्षेप में:
गायत्री मंत्र (वेद ग्रंथ की माता) को हिन्दू धर्म में सबसे उत्तम मंत्र माना जाता है. यह मंत्र हमें ज्ञान प्रदान करता है. इस मंत्र का मतलब है – हे प्रभु, कृपा करके हमारी बुद्धि को उजाला प्रदान कीजिये और हमें धर्म का सही रास्ता दिखाईये. यह मंत्र सूर्य देवता (सवितुर) के लिये प्रार्थना रूप से भी माना जाता है.
हे प्रभु! आप हमारे जीवन के दाता हैं आप हमारे दुख़ और दर्द का निवारण करने वाले हैं आप हमें सुख़ और शांति प्रदान करने वाले हैं. हे संसार के विधाता हमें शक्ति दो कि हम आपकी उज्जवल शक्ति प्राप्त कर सकें, क्रिपा करके हमारी बुद्धि को सही रास्ता दिखायें.
जानिए “गायत्री मंत्र” का वैज्ञानिक महत्त्व

“गायत्री मंत्र” दुनिया का सबसे शक्तिशाली मन्त्र: डॉक्टर होवार्ड स्टेनग्रेल
अमेरिकी वैज्ञानिक डॉक्टर होवार्ड स्टेनग्रेल ने दुनिया भर से मंत्र, भजन और इनवोकेशन एकत्र किये और उन सभी मंत्र, भजन और इनवोकेशन की ताकत का परीक्षण अपनी फिजियोलॉजी प्रयोगशाला में किया और पाया कि, ‘गायत्री मंत्र’ में १ १०,००० प्रति मिनट ध्वनि तरंगों का उत्पादन होता है जो कि यह और सभी मन्त्रों, भजनों में सबसे बहुत ज्यादा था. ध्वनि या एक विशेष आवृत्ति की ध्वनि तरंगों के संयोजन के माध्यम से, इस मंत्र ने विशिष्ट आध्यात्मिक योग्यता विकसित करने में सक्षम होने का दावा किया। और अब वैज्ञानिकों के अनुसार भी यह दुनिया में सबसे शक्तिशाली मंत्र माना जाता है. हैम्बर्ग विश्वविद्यालय ने ‘गायत्री मंत्र’ को सृष्टि के मानसिक और शारीरिक तल दोनों पर प्रभावकारिता अनुसंधान में शुरू की.
अमेरिका और अन्य देशों में गायत्री मंत्र 07:00 से 15 मिनट के लिए रेडियो पर दैनिक प्रसारित हो रहा है . पिछले तीन साल से पारामारिबो, सूरीनाम, दक्षिण अमेरिका में और अब पिछले एक साल से एम्स्टर्डम, हॉलैंड में भी प्रसारित हो रहा है।
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