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जगन्नाथ मंदिर की 22 सीढ़ियों का रहस्य: क्यों है इनका इतना धार्मिक महत्व? जानिए आध्यात्मिक मान्यता

जगन्नाथ मंदिर की 22 सीढ़ियों का रहस्य: क्यों है इनका इतना धार्मिक महत्व? जानिए आध्यात्मिक मान्यता

जगन्नाथ मंदिर की 22 सीढ़ियों का रहस्य: क्यों है इनका इतना धार्मिक महत्व? जानिए आध्यात्मिक मान्यता
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जगन्नाथ मंदिर की 22 सीढ़ियों का रहस्य: क्यों है इनका इतना धार्मिक महत्व? जानिए आध्यात्मिक मान्यता

ओडिशा के पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर केवल अपनी भव्य वास्तुकला और विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा के लिए ही नहीं, बल्कि यहां मौजूद कई रहस्यमयी परंपराओं के लिए भी जाना जाता है। इन्हीं में से एक है मंदिर के मुख्य प्रवेश मार्ग पर बनी 22 पवित्र सीढ़ियां, जिन्हें ‘बाईसी पहाचा’ (Baisi Pahacha) कहा जाता है। हर श्रद्धालु को भगवान जगन्नाथ के दर्शन से पहले इन सीढ़ियों से होकर गुजरना पड़ता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, ये 22 सीढ़ियां केवल मंदिर तक पहुंचने का मार्ग नहीं हैं, बल्कि आत्मा की आध्यात्मिक यात्रा और सांसारिक बंधनों से मुक्ति का प्रतीक भी मानी जाती हैं।

क्या है बाईसी पहाचा?

जगन्नाथ मंदिर के सिंहद्वार से प्रवेश करने के बाद श्रद्धालुओं को 22 सीढ़ियां चढ़नी होती हैं। इन्हें ओड़िया भाषा में बाईसी पहाचा कहा जाता है। सदियों पुरानी यह परंपरा आज भी मंदिर की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

मान्यता है कि भगवान के दर्शन से पहले इन सीढ़ियों को श्रद्धापूर्वक पार करने से मनुष्य अपने भीतर की नकारात्मक प्रवृत्तियों को पीछे छोड़कर ईश्वर के करीब पहुंचता है।

22 सीढ़ियों का आध्यात्मिक महत्व

धार्मिक परंपराओं में इन 22 सीढ़ियों को मानव जीवन की आध्यात्मिक यात्रा का प्रतीक माना जाता है। कई विद्वानों के अनुसार ये सीढ़ियां मनुष्य के विभिन्न दोषों, इंद्रियों, भावनाओं और सांसारिक बंधनों पर विजय प्राप्त करने का संदेश देती हैं।

कुछ मान्यताओं के अनुसार ये 22 सीढ़ियां मानव जीवन के 22 महत्वपूर्ण आध्यात्मिक पड़ावों का प्रतिनिधित्व करती हैं, जबकि अन्य परंपराओं में इन्हें आत्मशुद्धि और मोक्ष की ओर बढ़ने वाले चरणों के रूप में देखा जाता है। इन व्याख्याओं में एकरूपता नहीं है और इन्हें धार्मिक मान्यताओं के रूप में ही समझा जाता है।

क्यों छूते हैं श्रद्धालु इन सीढ़ियों को?

जगन्नाथ मंदिर आने वाले अनेक श्रद्धालु भगवान के दर्शन से पहले इन सीढ़ियों को हाथ लगाकर प्रणाम करते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से मन की अशुद्धियां दूर होती हैं और भगवान जगन्नाथ की कृपा प्राप्त होती है।

कुछ भक्त इन सीढ़ियों पर बैठकर प्रार्थना भी करते हैं और इसे अपने जीवन में आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करने का माध्यम मानते हैं।

पितरों से भी जुड़ी है मान्यता

स्थानीय धार्मिक परंपराओं के अनुसार, बाईसी पहाचा का संबंध पितृ स्मरण से भी जोड़ा जाता है। कुछ श्रद्धालु यहां अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं। हालांकि, इस विषय में विभिन्न मान्यताएं प्रचलित हैं और सभी परंपराओं में इसका समान उल्लेख नहीं मिलता।

जगन्नाथ संस्कृति की अनूठी पहचान

पुरी का जगन्नाथ मंदिर अपनी विशेष परंपराओं के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। रथ यात्रा, महाप्रसाद, स्नान पूर्णिमा, अनसर काल और बाईसी पहाचा जैसी परंपराएं इस मंदिर को अन्य मंदिरों से अलग पहचान देती हैं।

22 सीढ़ियां इस बात का प्रतीक हैं कि ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग केवल शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक, नैतिक और आध्यात्मिक शुद्धि से होकर गुजरता है।

निष्कर्ष

जगन्नाथ मंदिर की 22 पवित्र सीढ़ियां केवल पत्थरों से बनी सीढ़ियां नहीं, बल्कि आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक साधना का प्रतीक हैं। चाहे इन्हें धार्मिक मान्यता, सांस्कृतिक विरासत या आध्यात्मिक संदेश के रूप में देखा जाए, बाईसी पहाचा आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए गहरी श्रद्धा और विश्वास का केंद्र बनी हुई है।

Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

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July 2, 2026 3 min read
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