RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

हनुमान जयंती 2020: जानिए कहाँ पर हैं हनुमान जी के चरण चिह्न

हनुमान जयंती 2020: जानिए कहाँ पर हैं हनुमान जी के चरण चिह्न

हनुमान जयंती 2020: जानिए कहाँ पर हैं हनुमान जी के चरण चिह्न
Visual Archive

हनुमान जयंती 2020: जानिए कहाँ पर हैं हनुमान जी के चरण चिह्न

देवभूमि हिमाचल की राजधानी शिमला में शहर के मध्य में एक बड़ा और खुला स्थान, जहां से पर्वत शृंखलाओं का सुंदर दृश्य देखा जा सकता है। इन पर्वतमालाओं में से एक याकू जाखू (याकू) हिम पहा‍ड़ी के मथ्‍य स्थित हनुमानजी का प्राचीन मंदिर है।



शिमला शहर से मात्र 2 किलोमीटर दूर घने जंगल में स्थित है यह पहाड़ी जिसे जाखू पहाड़ी कहते हैं। देवदार के वृक्षों से घिरी यह पहाड़ी हिम पर्वतमाला का एक हिस्सा है। समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 8,500 फुट बताई जाती है।

राम-रावण युद्ध में मेघनाद के तीर से लक्ष्मणजी घायल होकर बेहोश हो गए थे। उस समय जब सब उपचार असफल हो गए, तो वैद्यराज ने हिमालय से संजीवनी जड़ी लाने की सलाह दी और कहा कि अब उसी से लक्ष्मण का जीवन बच सकता है।

संकट की इस घड़ी में रामभक्त श्रीहनुमानजी ने कहा कि मैं संजीवनी लेकर आता हूं। राम की आज्ञा पाकर हनुमानजी वायु की गति से हिमालय की ओर उड़े। रास्ते में उन्होंने याकू नामक ऋषि का आश्रम देखा, जहां ऋषि एक पहाड़ी पर रहते थे।

हनुमानजी ने सोचा ऋषि से संजीवनी का सही पता पूछ लिया जाए। यही सोचकर वे उस पहाड़ी पर उतरे लेकिन जिस समय वे पहाड़ी पर उतरे उस समय पहाड़ी उनके भार को सहन नहीं कर पाई और पहाड़ी आधी भूमि में धंस गई।

हनुमानजी ने ऋषि को नमन कर संजीवनी बूटी के बारे में विस्तृत जानकारी हासिल की तथा ऋषि को वचन दिया कि संजीवनी लेने के बाद जाते वक्त आपके आश्रम में पुन: जरूर आऊंगा।

लेकिन संजीवनी लेने के बाद जाते वक्त रास्ते में ‘कालनेमी’ राक्षस द्वारा रास्ता रोकने पर उससे हनुमानजी को युद्ध करना पड़ा। कालनेमि परास्त हो गया। यही कालनेमि अगले जन्म में कंस बना।

हनुमान जयंती 2020: जानिए कहाँ पर हैं हनुमान जी के चरण चिह्नइस युद्ध के कारण समय ज्यादा व्यतीत होने के कारण हनुमानजी ने गुप्त भाग से लंका पहुंचने का निश्चय किया। जब हनुमानजी जा रहे थे तभी रास्ते में उन्हें  याकू ऋषि को दिया हुआ वचन याद आया । दूसरी ओर ऋषि हनुमानजी का इंतजार कर रहे थे।



हनुमानजी भी ऋषि को नाराज नहीं करना चाहते थे तब उन्होंने अचानक ऋषि के समक्ष प्रकट होकर वस्तुस्थिति बताई और अंतर्ध्यान हो गए।
जहां पर हनुमानजी ने अपने चरण रखे थे वहां पर याकू ऋषि ने हनुमानजी का एक सुंदर मंदिर बनवाया और कहा कि जब तक यह पहाड़ी है ये चरण हमेशा पूजे जाएंगे।

You can send your stories/happenings here : info@religionworld.in

RW

Editorial Review Note

Religion World provides information on all religions and presents it impartially. You can send us information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com. You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

April 8, 2020 2 min read
Share:

Related Historical & Critical Essays

Hinduism

क्या भगवान श्रीराम ने भी श्राद्ध किया था? सच जानकर चौंक जाएंगे!

क्या भगवान श्रीराम ने भी श्राद्ध किया था? सच जानकर चौंक जाएंगे! भारतीय संस्कृति में श्राद्ध एक अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान माना जाता है। इसका उद्देश्य अपने दिवंगत…

Read now
Hinduism

वैशाख: पुण्य कमाने का स्वर्ण अवसर

वैशाख: पुण्य कमाने का स्वर्ण अवसर वैशाख हिन्दू पंचांग (हिन्दू कैलेंडर) का दूसरा महीना होता है, जो चैत्र मास के बाद आता है। यह माह अक्सर अप्रैल से…

Read now
hanuman jayanti

Hanuman Janmotsav 2025: तिथि, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त जानें

Hanuman Janmotsav 2025: तिथि, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त जानें तिथि और समय: हनुमान जयंती की तिथि: शनिवार, 12 अप्रैल 2025 पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 12 अप्रैल 2025 को…

Read now