श्री सत्य साईं बाबा के अनुयायियों का तीन दिवसीय ’ध्यान साधना आनंद’ शिविर का समापन
- हरियाली के सन्देश के साथ हुई विदाई
- विश्व के 35 देशों से आये साईं भक्त द्रवित हृदय के साथ हुये परमार्थ निकेतन से विदा
- एक बने, नेक बने’ ’डू गुड बी गुड’ ’हेल्प ऐवर हर्ट नेवर’ हम सब एक है, एक परिवार के संकल्प के साथ हुये विदा
- जीवन शैली बदलेगी तो संसार बदलेगा
- वर्तमान में सबसे बड़ा प्रदूषण हमारी सोच का प्रदूषण है
- राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस पर जीवन शैली में सकारात्मक बदलाव का दिया संदेश – स्वामी चिदानन्द सरस्वती
- गंगा हम सब की माँ है; हमारी आत्म-उन्नति का आधार है- मधुसूदन नायडू
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, प्रेम स्वामी मधुसूदन नायडू जी, श्री सी श्रीनिवासन जी, श्री बी एन नरसिंघमूर्ति एवं रूड़की के विधायक श्री प्रदीप बत्रा जी ने राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस पर लगाया हरियाली का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा
ऋषिकेश, 2 दिसम्बर। परमार्थ निकेतन में आयोजित श्री सत्य साईं बाबा के अनुयायियों का तीन दिवसीय ’ध्यान साधना आनंद’ शिविर का आज समापन हुआ। इस अवसर पर परमार्थ निकेतन आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, प्रेम स्वामी मधुसूदन नायडू जी, श्री आई सैक टिग्रेट, यूएसए, हार्ड रॉक कैफे के मालिक, श्री सत्य साईं शिक्षा संस्थान की देखरेख कर रहे श्री बी एन नरसिंघमूर्ति, मुख्य सहालकार श्री सत्य साईं लोक सेवा संस्थान, श्री डेविड और जेनिफर कॉर्नवीच एवं श्री सी श्री निवासन जी, प्रमुख सत्य साईं बाबा स्वास्थ्य सेवा और एवं 35 देशों से आये अनुयायियों ने ’एक बने, नेक बने’ ’डू गुड बी गुड’ ’हेल्प ऐवर हर्ट नेवर’ हम सब एक है, एक परिवार है का संकल्प लिया।
परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा ’इस तरह के आयोजनों से, भक्तों के आने से इस पूरे वातावरण में दिव्यता बनी रही है साथ ही स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा मिलता है। उन्होने कहा अन्य संस्थानों और आश्रमों भी इस तरह के आयोजनों को बढ़ावा देना चाहिये जिसमें विश्व से लोग उत्तराखण्ड में अधिक से अधिक आये ंइससे पलायन को रोका जा सकता है; यहां का व्यापार सुदृढ़ होगा; स्थानीय वस्तुओं को भी विश्व स्तर पर पहचान मिलेगी और रोजगार के क्षेत्र में बहुत बड़ा कार्य यहां के युवाओं के लिये हो सकता है साथ ही उत्तराखण्ड के पानी और जवानी को एक नई दिशा मिल सकती है। ’
स्वामी जी ने कहा कि ’वर्तमान में सबसे बड़ा प्रदूषण हमारी सोच का प्रदूषण है। सोच बदलेगी तो सितारे बदलेंगे, संसार बदलेगा। उन्होने कहा कि विज्ञान सुखोपभोग का एक साधन मात्र है परन्तु स्वच्छ वातावरण तो जीवन है। हमारे अन्वेषण ऐसे हो कि दोबारा कभी भी ’भोपाल गैस त्रासदी’ जैसी हृदय विदारक घटना का सामना न करना पड़े। उन्होने कहा क्रिया व प्रतिक्रिया का कानून सार्वभौमिक है। आपका विचार और कर्म क्रिया है और प्रकृति से प्राप्त परिणाम प्रतिक्रिया अब समय आ गया है कि हमारी सोच, कर्म और जीवन शैली भी सकारात्मक हो। जीवन शैली बदलेगी तो संसार बदलेगा। आईये बदलाव को स्वंय से शुरू करे।’
श्री मधुसूदन नायडू जी ने कहा कि परमार्थ निकेतन, गंगा तट और तीर्थ क्षेत्र ऋषिकेश के दिव्य स्मृतियों को लेकर हम जा रहे है। विश्व में अनेक स्थल है परन्तु शान्ति और वैश्विक बन्धुत्व का उदाहरण केवल यहीं पर मिलता है। वास्तव में परमार्थ गंगा आरती ’हम सब एक है, एक परिवार है’ को चरितार्थ करती है; इस आरती के माध्यम से प्रतिदिन अनेक लोगो तक यह संदेश जाता है कि भले ही हमारी संस्कृति, रंग और भाषा अलग-अलग है फिर भी विविधता में एकता है। यहां पर विश्व के अनेक देशों के लोगों के मध्य सहयोग और सहकार देखने को मिलता है। उन्होने कहा गंगा हम सब की माँ है; हमारी आत्म-उन्नति का आधार है।
आज परमार्थ निकेतन से श्री सत्य साईं बाबा जी के भक्तों ने द्रवित हृदय के साथ विदा ली और भक्तों ने कहा कि इस बार हम दो चार्टर प्लेन लेकर आये थे अगली बार चार चार्टन प्लेन लेकर आयेंगे तथा उत्तराखण्ड के अन्य दिव्य तीर्थ स्थलों का भी दर्शन करेंगे।
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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