How to Join ISKCON?

How to Join ISKCON?

How to Join ISKCON? A Step-by-Step Guide for Spiritual Seekers By Religion World | www.religionworld.in In a fast-paced, pleasure-driven world where attention is fragmented and purpose often feels outsourced, many individuals are rediscovering the timeless pull of spirituality. One such path that continues to attract seekers across generations and geographies is the International Society for Krishna Consciousness (ISKCON). Founded in 1966 by His Divine Grace A.C. Bhaktivedanta Swami Prabhupada, ISKCON is not just a religious […]

 December 27, 2025
मंदिर से मंच तक: क्या कथा वाचन का स्वरूप बदल गया है?

मंदिर से मंच तक: क्या कथा वाचन का स्वरूप बदल गया है?

मंदिर से मंच तक: क्या कथा वाचन का स्वरूप बदल गया है? भारतीय संस्कृति में कथा वाचन केवल शब्दों का प्रवाह नहीं, बल्कि आस्था, अनुभूति और आत्मिक संवाद का माध्यम रहा है। कभी कथा मंदिर के प्रांगण में, पीपल की छाँव में या गाँव की चौपाल पर सुनी जाती थी। वहाँ शोर नहीं, सजावट नहीं, बल्कि शांति और श्रद्धा होती थी। आज जब कथा बड़े मंचों, चमकदार रोशनी और कैमरों के बीच होती दिखाई देती […]

 December 27, 2025
युवा संतों की दशा-दिशा – भारत के नए धर्मगुरूओं की पड़ताल

युवा संतों की दशा-दिशा – भारत के नए धर्मगुरूओं की पड़ताल

युवा संतों की दशा-दिशा Bhavya Srivastava, Religion World धर्म के युवा भाव से आप धीरे-धीरे परिचित हो रहे होंगे। धर्म सदियों से मानव के बीच प्रकृति की तरह स्थापित है और वो अचर से चर की यात्रा में आत्मा बनकर बहुत सारी प्रेरणाओं का स्रोत है। समय के हिसाब से धर्म ने अपना रूप-स्वरूप-भंगिमा और प्रासंगिक आचरणों को स्वीकार किया। कभी संप्रदायों के रूप में रहा हो तो कभी ग्रंथों के मध्य ज्ञान बनकर नैसर्गिकता […]

 December 27, 2025
क्या कथावाचक धर्म गुरू हैं ?

क्या कथावाचक धर्म गुरू हैं ?

क्या कथावाचक धर्म गुरू हैं ? हमारे बीच में अब कथा वाचकों को लेकर बहुत सारे सवाल उठने लगे हैं ? सवाल उठाने वाले भी धर्म जगत के ही बहुत सारे प्रवक्ता हैं और हैं वो लोग जो धर्म को अपनी परिभाषाओं से समझकर उसे अधिकार के संग निभाने में लगे हैं। सवाल तीखे है, क्या कथावाचकों को भौतिक जीवन की सब सुख सुविधा भोगने और उसे प्रदर्शन करने का हक है, क्या महिलाओं को […]

 December 27, 2025
क्या आज की पीढ़ी आस्था से नहीं, तर्क से चलती है?

क्या आज की पीढ़ी आस्था से नहीं, तर्क से चलती है?

क्या आज की पीढ़ी आस्था से नहीं, तर्क से चलती है? आज का युवा एक ऐसे दौर में जी रहा है जहाँ जानकारी हर समय उसकी उँगलियों पर उपलब्ध है। सवाल पूछना, प्रमाण माँगना और तर्क के आधार पर निर्णय लेना—ये सब आज की पीढ़ी की पहचान बन चुके हैं। ऐसे में अक्सर कहा जाता है कि आज की पीढ़ी आस्था से दूर होती जा रही है और केवल तर्क से चलती है। लेकिन क्या […]

 December 26, 2025
क्या आपने धर्म के अनुसार नया साल शुरू किया?

क्या आपने धर्म के अनुसार नया साल शुरू किया?

क्या आपने धर्म के अनुसार नया साल शुरू किया? नया साल आते ही चारों ओर उत्सव का माहौल बन जाता है। लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएँ देते हैं, नए लक्ष्य तय करते हैं और पुराने दुखों को पीछे छोड़ने की बातें करते हैं। लेकिन एक गहरा सवाल अक्सर अनकहा रह जाता है—क्या हमने नया साल धर्म के अनुसार शुरू किया, या केवल कैलेंडर की तारीख बदली? भारतीय परंपरा में नया साल केवल बाहरी बदलाव नहीं, बल्कि […]

 December 26, 2025
धर्म, अहिंसा और भारत: क्या आज भी वही रास्ता काम करता है?

धर्म, अहिंसा और भारत: क्या आज भी वही रास्ता काम करता है?

धर्म, अहिंसा और भारत: क्या आज भी वही रास्ता काम करता है? भारत को विश्व में एक ऐसे देश के रूप में जाना जाता है, जहाँ धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं बल्कि जीवन जीने का तरीका है। भारतीय संस्कृति की जड़ों में अहिंसा, सहिष्णुता और करुणा गहराई से समाई हुई हैं। जैन धर्म की अहिंसा, बौद्ध धर्म का करुणा मार्ग, हिंदू दर्शन का “अहिंसा परमो धर्मः” और सिख धर्म की सेवा भावना—ये सभी भारत की पहचान […]

 December 26, 2025
धर्म और शांति: आज के हालात हमें क्या सिखाते हैं?

धर्म और शांति: आज के हालात हमें क्या सिखाते हैं?

धर्म और शांति: आज के हालात हमें क्या सिखाते हैं? आज की दुनिया तेज़ी से बदल रही है, लेकिन इसके साथ-साथ अशांति, तनाव और अविश्वास भी बढ़ता जा रहा है। युद्ध, हिंसा, सामाजिक विभाजन और धार्मिक टकराव की खबरें हमें बार-बार यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि आखिर धर्म, जिसका उद्देश्य शांति था, आज शांति का आधार क्यों नहीं बन पा रहा? शायद यह समय धर्म को दोष देने का नहीं, बल्कि धर्म से […]

 December 24, 2025
धर्म और सेवा: क्यों हर धर्म मानवता पर ज़ोर देता है?

धर्म और सेवा: क्यों हर धर्म मानवता पर ज़ोर देता है?

धर्म और सेवा: क्यों हर धर्म मानवता पर ज़ोर देता है? धर्म का मूल उद्देश्य केवल ईश्वर तक पहुँचना नहीं, बल्कि इंसान तक पहुँचना भी है। दुनिया के लगभग सभी धर्मों में सेवा को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। चाहे वह भूखे को भोजन कराना हो, पीड़ित को सहारा देना हो या कमजोर के साथ खड़ा होना—हर धर्म किसी न किसी रूप में मानव सेवा को ईश्वर सेवा के बराबर मानता है। सवाल यह है […]

 December 24, 2025
धर्म या दिखावा? धार्मिकता की असली पहचान क्या है?

धर्म या दिखावा? धार्मिकता की असली पहचान क्या है?

धर्म या दिखावा? धार्मिकता की असली पहचान क्या है? आज के समय में धर्म पहले से कहीं ज़्यादा दिखाई देता है। पूजा-पाठ, प्रतीक, वेश-भूषा, नारे और सोशल मीडिया पर धार्मिक अभिव्यक्तियाँ हर जगह हैं। लेकिन इसी के साथ एक गंभीर प्रश्न भी उठता है—क्या यह सब धार्मिकता है, या केवल धर्म का दिखावा? धार्मिक होना और धार्मिक दिखाई देना—इन दोनों के बीच का अंतर समझना आज पहले से कहीं ज़्यादा ज़रूरी हो गया है। धार्मिकता […]

 December 24, 2025
हर धर्म शांति सिखाता है, फिर टकराव क्यों?

हर धर्म शांति सिखाता है, फिर टकराव क्यों?

हर धर्म शांति सिखाता है, फिर टकराव क्यों? दुनिया का कोई भी धर्म खोलकर देखिए, उसकी मूल शिक्षा में शांति, प्रेम, करुणा और सह-अस्तित्व ही मिलेगा। फिर भी इतिहास से लेकर वर्तमान तक, हम बार-बार धर्म के नाम पर टकराव, हिंसा और विभाजन देखते हैं। यह प्रश्न इसलिए महत्वपूर्ण है कि समस्या धर्म में है या हमारी धर्म को समझने की प्रक्रिया में? धर्म का मूल संदेश: एक समान आधार हिंदू धर्म “वसुधैव कुटुम्बकम्” की […]

 December 23, 2025
आज के युग में फैसले गुरु लेते हैं… या तालियाँ?

आज के युग में फैसले गुरु लेते हैं… या तालियाँ?

आज के युग में फैसले गुरु लेते हैं… या तालियाँ? आज का युग सूचना का युग है, लेकिन साथ ही यह प्रदर्शन और तालियों का युग भी बन चुका है। कभी समाज की दिशा गुरु, संत, शिक्षक और विचारक तय करते थे। उनके शब्द अनुभव, तप और विवेक से जन्म लेते थे। पर आज सवाल उठता है — क्या फैसले अब भी गुरु लेते हैं, या फिर तालियों की गूंज ही सत्य और दिशा तय […]

 December 23, 2025
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