मंदिर, मस्जिद और चर्च से पहले मन का द्वार क्यों ज़रूरी है?
मंदिर, मस्जिद और चर्च से पहले मन का द्वार क्यों ज़रूरी है? धर्म के मार्ग पर चलते हुए मनुष्य अक्सर मंदिर, मस्जिद और चर्च के द्वार तक तो पहुँच जाता है, लेकिन क्या वह अपने मन के द्वार तक भी पहुँच पाता है? यह प्रश्न आज के समय में और भी अधिक प्रासंगिक हो गया है, जब धार्मिक पहचान तो प्रबल है, पर करुणा, शांति और आत्मचिंतन की कमी दिखाई देती है। सच्चा धर्म केवल […]





