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ब्रह्मकुमारीज फिर से बनाएंगी शांति की दुनिया : नाइजीरियई पूर्व राष्ट्रपति ओलुसेगुन ओबासन

ब्रह्मकुमारीज फिर से बनाएंगी शांति की दुनिया : नाइजीरियई पूर्व राष्ट्रपति ओलुसेगुन ओबासन

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ब्रह्मकुमारीज फिर से बनाएंगी शांति की दुनिया : नाइजीरियई पूर्व राष्ट्रपति ओलुसेगुन ओबासन

ब्रह्मकुमारीज फिर से बनाएंगी शांति की दुनिया : नाइजीरियई पूर्व राष्ट्रपति ओलुसेगुन ओबासन

माउंटआबू, 25 फरवरी; ब्रह्माकुमारीज संगठन के शांतिवन परिसर में चल रहे अंतरराष्ट्रीय महासम्मेलन में रविवार को विदेशी हस्तियों के मुखारबिंद से भारत की प्राचीन परंपरा आध्यात्मिक ज्ञान की महिमा सुनी जा रही है. विशेष अतिथि नाइजीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बाबा ओलुसेगुन ओबासन्जो ने ब्रह्माकुमारी संगठन को जहां शांतिदूत बताया तो वहीं विश्व के लिए शांति और खुशी की महती आवश्यकता बताई.

उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि ब्रह्माकुमारी संगठन जन-जन को शांति का संदेश देने का कार्य कर रहा है. नि:संदेह ये संगठन विश्व में शान्ति स्थापित करने में सफल होगा. आज दुनिया में शान्ति और खुशी की अति आवश्यकता है. भगवान ने हर व्यक्ति के लिए शान्ति, खुशी और आनंद की दुनिया बनाई थी, लेकिन हमने कर्मों की गति से अनभिज्ञ होने के कारण विकर्म करते हुए शान्ति, खुशी व आनंद की अमूल्य संपदा गंवा दी है. हर मनुष्य स्वयं को किसी न किसी तरीके से असुरक्षित महसूस कर रहा है.

नाइजीरिया के पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि मन में अनेक प्रकार के लोभ की प्रवृत्ति के बीज पनपने से खुशी, शान्ति के स्थान पर दु:ख ने अपनी जगह बना ली है.  हमें आपस में परिवार की तरह एक-दूसरे के साथ न्यायपूर्ण, प्रेमपूर्वक व सहयोगात्मक व्यवहार करना चाहिए.

 यह भी पढ़ें – दादी जानकी को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम विश्व शांति पुरस्कार

अफ्रीका में 55 प्रकार की विकट समस्याएं

उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसंधान का हवाला देते हुए कहा कि अफ्रीका में 55 प्रकार की विकटतम समस्याएं व बीमारियों से लोग ग्रस्त होकर तनावजन्य जीवन जीने को विवश हैं. संसार में जितना धन युद्व के लिए खर्च किया जा रहा है, यदि वह शान्ति के लिए उपयोग किया जाए तो नि:संदेह ही संसार के हर मानव को खुशी, शान्ति व आनंद प्रदान किया जा सकता है. साथ ही दुनिया में अमन-चैन हो जाएगा.

मुख्य प्रशासिका दादी जानकी ने कहा कि जो बोलो सच्चा बोलो. परमात्मा ने कहा है सदा खुश रहो. फालतू बात भूल जाओ, अच्छी बात याद रखो. ईश्वर एक है. हमारे संकल्प शुद्ध और शांत हों. यदि जीवन में शांति है तो भंडारा भरपूर रहेगा और संकट दूर रहेंगे. खुशी जैसी खुराक नहीं है.

रशिया के स्कूली बच्चों को दे रहे आध्यात्मिकता की शिक्षा 

शिक्षा जगत से जुड़ी रशिया सोची से आईं विदेशी मेहमान नाडेज्द़ा रशियन एकेडमी ऑफ नेचुरल साइंसेस की फाउंडर नाडेज्द़ा सेमेनोवा ने कहा कि भारत की आध्यात्मिकता से मुझे बहुत कुछ  प्राप्त हुआ है. इस ज्ञान से मेरी मन की भूमि पर सकारात्मक दृष्टिकोण के बीज अंकुरित हुए हैं. इस संस्कृति को रशिया के स्कूली बच्चों से जोडऩे का कार्य कर रही हूँ. इससे बच्चों के व्यवहार में जो प्रेमपूर्ण बदलाव के सार्थक परिणाम प्राप्त हुए हैं.

विचारों के प्रभाव का जल पर किया प्रयोग

टोक्यो से आईं विदेशी मेहमान इमोटो पीस प्रोजेक्ट की ग्लोबल डायरेक्टर मिचिको हय्याशी ने कहा कि मैंने जब पर जल पर प्रैक्टिकल किया तो पाया कि हमारे विचारों का प्रभाव जल पर भी पड़ता है. संस्था ने यहां जो सोलर प्रोजेक्ट लगाया है वह बहुत ही सराहनीय कदम है.

दिल्ली से पधारे नवभारत टाइम्स के मेट्रो एडिटर वीरेन्द्र वर्मा ने कहा कि यहां वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना से कार्य किया जा रहा है. यहां एक साथ इतने देशों के मेहमान आएं हैं और सभी इतनी शांति से यहां इस महासम्मेलन का शांति से आनंद ले रहे हैं ये आध्यात्मिकता से ही संभव है.

शांति, संतुष्टता और स्वास्थ्य जरूरी

जिओ कंपनी की वॉइस चेयरमैन मधु दुआ ने कहा कि जीवन में सदा खुश रहने के लिए शांति, संतुष्टता और स्वस्थ होना जरूरी है. इस संगठन में भौतिकता और आध्यात्मिकता का उद्भुत समन्यव देखने को मिला है. जीवन में सकारात्मक चिंतन जरूरी है. सोशल सर्विस विंग के अध्यक्ष अमीरचंद भाई ने कहा कि हम परिस्थितियां नहीं बदल सकते हैं. हमें स्वयं को बदलना होगा. हम अपनी वास्तविक पहचान भूलने के कारण खुशी गायब हो जाती है. सुबह उठते ही अपने आप को सकारात्मक विचारों से भर से तो सारा दिन ऊर्जा मिलती रहेगी.

यह भी पढ़ें – दादी जानकी के नाम जुड़ा अनोखा रिकार्ड, 102 साल में दुनिया की बनी पहली मुख्य प्रशासिका

संस्था में 20 साल से चल रहे रिसर्च प्रोजेक्ट

ब्रह्माकुमारीज संस्थान के सोलर थर्मल इंडिया वन पॉवर प्रोजेक्ट के डायरेक्टर गोलो पिल्ज ने कहा कि मैं 1985 में पहली बार भारत आया और यहीं का होकर रह गया. आज हमने अपने मूल्यों और सिद्धांतों को छोड़ दिया है. इस संस्था में यही सिखाया जाता है कि अपने जीवन मूल्य प्रेम, सुख और शांति को फिर से जीवन में लाएं. साइंस कहती है कि यदि हमारे अंदर शांति है तो ही हम उसे दूसरों को दे सकते हैं. खुद को परिवर्तन करने के लिए मेडिटेशन बहुत बड़ा साधन है. संस्था पिछले 20 साल से कई रिसर्च प्रोजेक्ट कर रही है.

दूसरों से तुलना बंद करें

न्यूजीलैंड में ब्रह्माकुमारीज की डायरेक्टर बीके भावना ने कहा कि जब हम छोटी-छोटी बातों में उलझकर दूसरों से तुलना शुरू कर देते हैं तो हमारा स्वाभिमान कम हो जाता है. ज्ञान का मनन-चिंतन करने से ही हम खुश रह सकेंगे.

पोलैंड की डायरेक्टर बीके हलीना पराडाला राजयोग भगवान का प्लान है. यहां इतने देशों के लोग आए हैं लेकिन कोई भेदभाव नहीं है. राजयोग विपरीत परिस्थितियों में हमें आत्मनियंत्रण सिखाता है.

ऑस्ट्रेलिया में डायरेक्टर डॉ. निर्मला बहन ने कहा कि जब हमारे अंदर यह दृष्टि आ जाती है कि हम सभी आत्माएं भाई-भाई हैं तो सारी समस्याएं खत्म हो जाती हैं. जितना हम आंतरिक खुश रहेंगे, उतना हमारा अंदरूनी सिस्टम ठीक रहेगा. यहां से दृढ़ निश्चय करके जाएं कि हमारा जीवन उच्च, महान और आदर्श बनाएंगे.

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Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

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February 27, 2018 5 min read
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