आज के इस कोरोना के कहर की स्थिति में आयुर्वेद का योगदान विश्व व्यापक हो गया है, लेकिन यूरोपीय सभ्यता की वजह से इसका सही उपयोग और सही जानकारी के साथ सही जागरुकता नहीं हो पा रही है।
आज लोगों में भय और आतंक ज्यादा हो गया है। इस कारण इसकी सच्चाई और समाधान को जान लेना बहुत जरूरी हो गया है। भले ही ये कोरोना शब्द पूरे दुनिया के लिए नया हो लेकिन हमारे शास्त्रों में इसका सटीक वर्णन और उपाय है।
चरक संहिता विमान स्थान में जनपदध्वंस की व्याख्या की गई है, जिसमें लिखा है कि जब कोई बीमारी एक साथ पूरे देश को आक्रांत करके प्राणों को क्षति पहुंचाती है तो इसे जनपदध्वंस कहते हैं।
ये जल, वायु, देश और काल के दोष से होता है। इसमें से देश दुष्टि होने पर सूक्ष्म कीड़े की सृष्टि होती है, जो दो देशों की षड्यंत्रकारी युद्ध नीतियों से उत्पन्न होती है और श्वांस के माध्यम से लोगों को भारी मात्रा में आक्रांत करती है।
क्यूंकि यह बाहर से शरीर में प्रवेश करती है, इसलिए इसे आगन्तुज ज्वर कहते हैं जो स्पर्श और गंध से लोगों को संक्रमित करती है। प्रारंभ में ये सामान्य सर्दी खांसी और ज्वर लाती है ।
बाद में यदि सही समय पर सही चिकित्सा नहीं की गई तो सानीपात एक विशेष ज्वर में परिणत हो जाता है और श्वांस, कास, पार्श्व पीड़ा ज्वर इन लक्षणों को उत्पन्न करके कष्ट साध्य हो जाता है, लेकिन असाध्य नहीं होता।
रोकथाम के उपायः-
1. हितकारक स्थान में अपने को सुरक्षित रखें
2. दया, दान, देवार्चना
3. धैर्य
4. रसायन का उपयोग
5. पंचकर्म
6. उष्ण जल का लगातार सेवन
ये उपाय जनपद ध्वंस में लिखे गये थे लगभग 3000 वर्ष पूर्व।
आयुष मंत्रालय द्वारा जारी किए गए गाइड लाइन में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए जो सलाह दी गई है, वो इस प्रकार है-
दिनभर समय-समय पर गर्म पानी पीते रहें. पानी को हल्का गर्म करके पिएं।
रोजाना कम से कम 30 मिनट तक योग करें।
अपने आहार में हल्दी, जीरा, धनिया और लहसुन जैसे मसालों का इस्तेमाल जरूर करें।
एक चम्मच या 10 ग्राम च्यवनप्राश का सेवन रोज सुबह करें.
डायबिटीज के रोगी शुगर फ्री च्यवनप्राश का सेवन करें।
दिन में एक या दो बार हर्बल चाय या काढ़ा पीएं. काढ़ा बनाने के लिए पानी में तुलसी, दालचीनी, काली मिर्च, सूखी अदरक, मुनका मिलाकर अच्छी तरह धीमी आंच पर उबालें. अगर मीठा लेना हो तो स्वादानुसार गुड़ डालें या खट्टा लेना हो तो नींबू का रस मिला लें।
दिन में कम से कम एक या दो बारहल्दी वाला दूध लें. 150 मिली लीटर गर्म दूध में करीब आधी छोटी चम्मच हल्दी मिलाकर पीएं।
तिल का तेल या नारियल का तेल या घी रोज सुबह और शाम नाक के दोनों छिद्रों में लगाएं।
एक बड़ी चम्मच तिल का तेल या नारियल का तेल मुंह में लें. इसे पीना नहीं है. इसे दो से तीन मिनट तक मुंह में घुमाने के बाद थूक दें. इसके बाद गुनगुने पानी से कुल्ला करें.
दिन में एक या दो बार ऐसा किया जा सकता है। गले में खरास या सूखा कफ होने पर पुदीने की कुछ पत्तियां और अजवाइन को पानी में गर्म करके स्टीम लें।
गुड़ या शहद के साथ लॉन्ग का पाउडर मिलाकर इसे दिन में दो से तीन बार खाएं. सूखा कफ या गले में खराश ज्यादा दिनों तक है तो डॉक्टर को दिखाएं।
आयुष मंत्रालय द्वारा जारी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की सलाह प्रख्यात वैद्यों दवारा बताए गए हैं, जो संक्रमण के समय व्यक्तिगत रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में कारगर हो सकते हैं।
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