RELIGION WORLD — THE INDEPENDENT SCIENTIFIC & INTERFAITH JOURNAL
Navigation

© 2026 Religion World Foundation.

Global Faith • Scientific Heritage • Human Ethics

दो सौ साल पुराना है अयोध्या विवाद, 134 साल तक 3 अदालतों में हुयी सुनवाई

दो सौ साल पुराना है अयोध्या विवाद, 134 साल तक 3 अदालतों में हुयी सुनवाई

दो सौ साल पुराना है अयोध्या विवाद, 134 साल तक 3 अदालतों में हुयी सुनवाई
Visual Archive

दो सौ साल पुराना है अयोध्या विवाद, 134 साल तक 3 अदालतों में हुयी सुनवाई

1813 में पहली बार हिंदू संगठनों ने दावा किया कि बाबर ने 1528 में राम मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई। माना जाता है कि फैजाबाद के अंग्रेज अधिकारियों ने मस्जिद में हिंदू मंदिर जैसी कलाकृतियां मिलने का जिक्र अपनी रिपोर्ट में किया, उसी के बाद यह दावा किया गया।

पूर्व आईपीएस अधिकारी किशोर कुणाल ने अपनी किताब ‘अयोध्या रीविजिटेड’ में इस वाकये का जिक्र करते हुए लिखा है कि 1813 में मस्जिद की शिलालेख के साथ जब छेड़छाड़ हुई, तब से यह कहा जाने लगा कि मीर बाकी ने मंदिर तोड़कर मस्जिद बनवाई। कुणाल ने किताब में लिखा है कि मंदिर 1528 में नहीं तोड़ा गया, बल्कि औरंगजेब द्वारा नियुक्त फिदायी खान ने 1660 में उसे तोड़ा था।

1855-85 : कई अंग्रेज अफसरों के रिकॉर्ड में विवाद से जुड़ी कई शिकायतों का जिक्र

हिंदुओं के दावे के बाद से विवादित जमीन पर नमाज के साथ-साथ पूजा भी होने लगी। 1853 में अवध के नवाब वाजिद अली शाह के समय पहली बार अयोध्या में साम्प्रदायिक हिंसा भड़की। इसके बाद भी 1855 तक दोनों पक्ष एक ही स्थान पर पूजा और नमाज अदा करते रहे। 1855 के बाद मुस्लिमों को मस्जिद में प्रवेश की इजाजत मिली, लेकिन हिंदुओं को अंदर जाने की मनाही थी। ऐसे में हिंदुओं ने मस्जिद के मुख्य गुम्बद से 150 फीट दूर बनाए राम चबूतरे पर पूजा शुरू की। 1859 में ब्रिटिश सरकार ने विवादित जगह पर तार की बाड़ लगवाई। 1855 से 1885 तक फैजाबाद के अंग्रेज अफसरों के रिकॉर्ड में मुस्लिमों द्वारा विवादित जमीन पर हिंदुओं की गतिविधियां बढ़ने की कई शिकायतें मिली हैं।

 

इन तीन अदालतों में हुयी सुनवाई

फैजाबाद जिला अदालत (1885-1987)

1885 : पहली बार मामले को न्यायालय में उठाया गया। फैजाबाद की जिला अदालत में महंत रघुबर दास ने राम चबूतरे पर छतरी लगाने की अर्जी लगाई, जिसे ठुकरा दिया गया।

1934 : अयोध्या में दंगे भड़के। बाबरी मस्जिद का कुछ हिस्सा तोड़ दिया गया। विवादित स्थल पर नमाज बंद हुई।

1949 : मुस्लिम पक्ष का दावा है कि बाबरी मस्जिद में केंद्रीय गुम्बद के नीचे हिंदुओं ने रामलला की मूर्ति स्थापित कर दी। इसके 7 दिन बाद ही फैजाबाद कोर्ट ने बाबरी मस्जिद को विवादित भूमि घोषित किया और इसके मुख्य दरवाजे पर ताला लगा दिया गया।

1950 : हिंदू महासभा के वकील गोपाल विशारद ने फैजाबाद जिला अदालत में अर्जी दाखिल कर रामलला की मूर्ति की पूजा का अधिकार देने की मांग की।

1959 : निर्मोही अखाड़े ने विवादित स्थल पर मालिकाना हक जताया।

1961 : सुन्नी वक्फ बोर्ड (सेंट्रल) ने मूर्ति स्थापित किए जाने के खिलाफ कोर्ट में अर्जी लगाई और मस्जिद व आसपास की जमीन पर अपना हक जताया।

1986 : फैजाबाद कोर्ट ने बाबरी मस्जिद का ताला खोलने का आदेश दिया।

1987 : फैजाबाद जिला अदालत से पूरा मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट को ट्रांसफर कर दिया गया।

यह भी पढ़ें-अयोध्या राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आज,6 राज्यों में स्कूल-कॉलेज बंद

इलाहाबाद हाईकोर्ट (1989-2010)

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1989 में विवादित स्थल पर यथास्थिति बरकरार रखने को कहा। इस बीच 1992 में हजारों की संख्या में कारसेवकों ने अयोध्या पहुंचकर विवादित ढांचा ढहा दिया। इस मामले पर अलग से सुनवाई चल रही है। 10 साल बाद यानी 2002 से इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित ढांचे वाली जमीन के मालिकाना हक को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की और 2010 में इस पर फैसला सुनाया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2:1 से फैसला दिया और विवादित स्थल को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला के बीच तीन हिस्सों में बराबर बांट दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने लगातार 40 दिन सुनवाई की

2011 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इस विवाद से जुड़ी सभी याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की। 6 अगस्त 2019 से सुप्रीम कोर्ट में इस विवाद पर लगातार 40 दिन तक सुनवाई हुई। 16 अक्टूबर 2019 को हिंदू-मुस्लिम पक्ष की दलीलें सुनने के बाद पांच सदस्यीय संविधान बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

RW

Editorial Review Note

Religion World provides information on all religions and presents it impartially. You can send us information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com. You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.

November 9, 2019 4 min read
Share:

Related Historical & Critical Essays

Christianity

किसने बनाए मंदिर–चर्च–मस्जिद–गुरुद्वारे?

किसने बनाए मंदिर–चर्च–मस्जिद–गुरुद्वारे?  मानव इतिहास में धार्मिक स्थलों की उत्पत्ति उतनी ही पुरानी है जितनी सभ्यताओं की अपनी यात्रा। मंदिर, चर्च, मस्जिद और गुरुद्वारे केवल पूजा या प्रार्थना…

Read now
Hinduism

हरिद्वार महाकुंभ: धर्म ध्वजा से है हर अखाड़े की पहचान, जानिए इसका महत्व

महाकुंभ मेले में मौजूद 13 अखाड़ों में प्रवेश करते ही अनेक तरह के साधु-संन्यासियों के दर्शन होते हैं. धर्म ध्वजा अखाड़ों की धार्मिक पहचान है, जो दूर से…

Read now
Hinduism

जगन्नाथपुरी रथयात्रा 2020: रथयात्रा को लेकर SC की  सुनवाई आज

ओडिशा, 22 जून;  महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी की रथयात्रा निकाली जाएगी या नहीं निकाली जाएगी उस पर आज एक बार फिर देश की सर्वोच्च अदालत में एकल बेंच…

Read now