
- परमार्थ निकेतन पधारे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त अक्षरधाम संस्था के आध्यात्मिक संत
- बीएपीएस स्वामीनारायण संस्थान के 200 से अधिक संत, साधक एवं सेवकों ने किया परमार्थ गंगा आरती में सहभाग
- स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने त्याग वल्लभ स्वामी जी महाराज को रूद्राक्ष का पौधा किया भेंट
- स्वामी नारायण सम्प्रदाय के सभी पूज्य संतों ने पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के पावन सानिध्य में विश्व ग्लोब का जलाभिषेक किया
- गंगा की पवित्रता, हिमालय की ऊंचाई और सागर की गहराई अपने जीवन में समाने वाले संत विद्यमान है भारत इसलिये महान है- स्वामी चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेश, 26 अगस्त। भारत सहित विश्व के अनेक देशों से बीएपीएस स्वामीनारायण सम्प्रदाय के 200 से अधिक पूज्य संत, साधक एवं सेवक परमार्थ निकेतन आश्रम पधारे। परमार्थ निकेतन के दिव्य प्रांगण में परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों एवं आचार्यगणों ने सभी संतों का भव्य स्वागत एवं अभिनन्दन किया। अक्षरधाम स्वामीनारायण सम्प्रदाय के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त आध्यात्मिक पूज्य संत त्याग वल्लभ स्वामी जी महाराज ने अपने 200 से अधिक संतों के साथ परमार्थ निकेतन आश्रम के परमाध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज से भेंट की। पूज्य स्वामी जी ने 30 वर्ष पूर्व सन 1987 के दिव्य क्षणों को याद करते हुये कहा कि पूज्य त्याग वल्लभ स्वामी जी महाराज से हुई भेंट की पावन स्मृतियाँ आज भी हृदयपटल पर विद्यमान है। इस संस्थान ने पूरे विश्व में अक्षरधाम मन्दिर दिल्ली के अलावा 110 मन्दिरों का निर्माण किया है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने सभी पूज्य संतों का अभिनन्दन करते हुये कहा कि भारत ही नहीं पूरे विश्व के वंदनीय संत त्याग वल्लभ स्वामी जी महाराज ने अपना सम्पूर्ण जीवन समाज कल्याण के लिये समर्पित कर दिया। उन्होने समाज में ही स्वामीनारायण के दर्शन करते हुये भारत ही नहीं पश्चिम की धरती पर अनेक शिक्षण संस्थान, चिकित्सालय एवं सेवा मन्दिरों की स्थापना की है। इस संस्थान के उद्देश्य इतने महान है कि यहां का हर संत एक चलता फिरता मन्दिर है । आज पूरे संसार से पर्यटक केवल ताजमहल देखने ही भारत नहीं आते बल्कि अक्षरधाम की भव्यता, दिव्यता एवं पवित्रता से प्रभावित होकर आते है। पूज्य स्वामी जी ने कहा कि भारत केवल इसलिये महान नहीं है कि उसके पास ताजमहल है; लाल किला, जुहू चैपाटी, कश्मीर की वादियाँ, माँ गंगा और हिमालय है बल्कि भारत के पास गंगा की पवित्रता धारण करने वाले, हिमालय की ऊंचाई और सागर की गहराई अपने जीवन में समाने वाले संत विद्यमान है; सादगी, सात्विकता, सरलता और सहजता के साथ समाज में ही प्रभु का दर्शन करने वाले साधक एवं सेवक है।’
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त आध्यात्मिक पूज्य संत स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज एवं पूज्य संत त्याग वल्लभ स्वामी जी महाराज ने अनेक वैैश्विक समस्याओं पर चिंतन किया तथा समाज कल्याण के लिये दोनों संस्थाओं ने मिलकर कार्य करने पर प्रतिबद्धता दिखायी।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के मार्गदर्शन में स्वामीनारायण संस्थान के सभी संत, सेवक एवं साधकों ने विश्व में शुद्ध जल की उपलब्धता होती रहे इस हेतु वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी में सहभाग किया। सभी ने मिलकर कर संकल्प लिया कि अपने-अपने संस्थानों, क्षेत्रों एवं परिसर से स्वच्छ भारत मिशन के लिये कार्य करेंगे।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने रूद्राक्ष सा पवित्र जीवन जीने वाले संतों को रूद्राक्ष का दिव्य पौधा भेंट किया। तत्पश्चात परमार्थ गंगा तट पर होने वाली सांयकालीन दिव्य गंगा आरती में सहभाग किया।
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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