संक्षेप में: एकादशी पारण के दिन सावन सोमवार हो तो?
यदि एकादशी के पारण वाले दिन सावन सोमवार का व्रत भी पड़ जाए, तो अन्न ग्रहण किए बिना तुलसी दल, गंगाजल, चरणामृत या फलाहार से एकादशी व्रत का पारण किया जा सकता है। इसके बाद भगवान शिव का जलाभिषेक करके सावन सोमवार का व्रत जारी रखें।
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान सोमवार के व्रत के साथ कई बार अन्य धार्मिक व्रत और पर्व भी पड़ जाते हैं। ऐसी स्थिति में भक्तों के सामने यह सवाल आता है कि अगर एकादशी पारण वाले दिन सावन सोमवार व्रत हो, तो एकादशी का व्रत कैसे खोला जाए? इस लेख में जानिए पारण के सरल विकल्प, सही विधि और किन बातों का ध्यान रखें।
सामान्य रूप से एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है। लेकिन यदि उसी दिन दूसरा व्रत भी रखा गया हो और उसमें अन्न ग्रहण नहीं करना हो, तो धार्मिक परंपराओं के अनुसार कुछ सात्विक विकल्पों से पारण किया जा सकता है।
द्वादशी तिथि में ही क्यों होता है एकादशी का पारण?
धार्मिक मान्यता के अनुसार एकादशी व्रत का समापन द्वादशी तिथि में किया जाता है। सूर्योदय के बाद और हरि वासर समाप्त होने के पश्चात उचित समय में पारण करने की परंपरा बताई गई है।
हरि वासर को भगवान विष्णु से संबंधित विशेष समय माना जाता है। यही कारण है कि एकादशी व्रत रखने वाले भक्तों को पारण के लिए निर्धारित समय का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जाती है, ताकि व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।
एकादशी पारण वाले दिन सावन सोमवार व्रत हो तो क्या करें?
अगर एकादशी के पारण वाले दिन सावन सोमवार भी पड़ रहा हो, तो भक्तों के सामने सबसे बड़ी दुविधा अन्न को लेकर होती है। एकादशी के पारण में सामान्य तौर पर भोजन करने की परंपरा है, जबकि सावन सोमवार के व्रत में कई श्रद्धालु अन्न का सेवन नहीं करते।
ऐसी स्थिति में अपनी पारिवारिक परंपरा और व्रत के संकल्प के अनुसार तुलसी दल, गंगाजल, चरणामृत या फलाहार से एकादशी व्रत का पारण करने की परंपरा अपनाई जा सकती है। इसके बाद सोमवार का व्रत जारी रखा जा सकता है।
तुलसी दल से कैसे करें एकादशी का पारण?
एकादशी व्रत में तुलसी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यदि सोमवार का व्रत भी रखना है और अन्न का सेवन नहीं करना चाहते, तो भगवान विष्णु का ध्यान करके श्रद्धापूर्वक तुलसी दल ग्रहण करने की परंपरा बताई गई है। इसके बाद भक्त सावन सोमवार के नियमों का पालन करते हुए भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं।
गंगाजल और चरणामृत से भी खोल सकते हैं व्रत
जो लोग सोमवार के व्रत में फलाहार भी नहीं करते, उनके लिए गंगाजल या चरणामृत ग्रहण करने की परंपरा का उल्लेख मिलता है। धार्मिक मान्यताओं में गंगाजल और चरणामृत को अत्यंत पवित्र माना गया है। इनके सेवन के बाद एकादशी व्रत का समापन माना जा सकता है और भक्त सोमवार का व्रत जारी रखते हुए शिव पूजा कर सकते हैं।
पारण के लिए कौन-सा विकल्प कब चुनें?
व्रत के संकल्प के अनुसार पारण का विकल्प चुनना उचित माना जाता है। नीचे दी गई तालिका से यह समझना आसान हो जाता है:
| आपका संकल्प | पारण का उपयुक्त विकल्प |
|---|---|
| फलाहार कर सकते हैं | फलाहार अथवा तुलसी दल से पारण |
| केवल निराहार/फलाहार नहीं | तुलसी दल के साथ गंगाजल या चरणामृत |
| पूर्ण निर्जल संकल्प | गंगाजल या चरणामृत की कुछ बूंदें |
क्या एकादशी पारण में अन्न खाना जरूरी है?
सामान्य धार्मिक परंपरा में द्वादशी के दिन अन्न ग्रहण करके एकादशी व्रत का पारण किया जाता है। लेकिन जब उसी दिन कोई दूसरा ऐसा व्रत हो जिसमें अन्न का सेवन नहीं किया जाता, तो व्रत की परंपरा के अनुसार वैकल्पिक सात्विक चीजों से पारण करने की मान्यता भी मिलती है। इसलिए ऐसी स्थिति में व्यक्ति को अपने व्रत के संकल्प और पारिवारिक परंपरा का ध्यान रखना चाहिए।
पारण के बाद कैसे करें सावन सोमवार की पूजा?
एकादशी का पारण करने के बाद सावन सोमवार का व्रत जारी रखा जा सकता है। सोमवार के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करें और उन्हें बेलपत्र, पुष्प तथा अपनी परंपरा के अनुसार पूजा सामग्री अर्पित करें।
पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप किया जा सकता है। इसके बाद दिनभर सोमवार व्रत के नियमों का पालन करें और अपनी परंपरा के अनुसार शाम या अगले दिन व्रत का समापन करें।
व्रत में किन बातों का रखें ध्यान?
व्रत केवल भोजन का त्याग नहीं, बल्कि श्रद्धा, संयम और मन की शुद्धता से भी जुड़ा माना जाता है। इसलिए इन बातों का ध्यान रखें:
- व्रत के संकल्प और अपनी पारिवारिक परंपरा का पालन करें।
- पूजा के दौरान भगवान विष्णु और भगवान शिव का ध्यान करें।
- यदि फलाहार का संकल्प हो, तो सात्विक आहार का सेवन करें।
- क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से बचें।
- पूजा और पारण के लिए स्थानीय पंचांग में दिए गए समय का ध्यान रखें।
निष्कर्ष
यदि एकादशी के पारण वाले दिन सावन सोमवार का व्रत भी पड़ जाए, तो अन्न ग्रहण किए बिना तुलसी दल, गंगाजल, चरणामृत या फलाहार जैसे विकल्प धार्मिक परंपराओं में बताए गए हैं। इसके बाद भक्त सावन सोमवार का व्रत जारी रखते हुए भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक कर सकते हैं।
इस तरह दोनों व्रतों की धार्मिक भावना और संकल्प को बनाए रखा जा सकता है। हालांकि, व्रत और पारण की सही विधि के लिए अपने स्थानीय पंचांग और पारिवारिक परंपरा का पालन करना सबसे उचित है।
नोट: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। किसी विशेष व्रत के लिए स्थानीय पंचांग या अपने आचार्य द्वारा बताए गए नियमों को प्राथमिकता दें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
क्या एकादशी का पारण तुलसी दल से किया जा सकता है?
सावन सोमवार व्रत में एकादशी पारण के लिए क्या खाएं?
क्या एकादशी पारण में अन्न खाना अनिवार्य है?
एकादशी पारण किस तिथि में करना चाहिए?
पारण के बाद सावन सोमवार की पूजा कैसे करें?
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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