असम के गुवाहाटी स्थित प्रसिद्ध कामाख्या देवी मंदिर में आयोजित अंबुबाची मेला 2026 का समापन देवी के दर्शन के साथ हुआ। तीन दिनों तक बंद रहने के बाद 26 जून को विशेष वैदिक और तांत्रिक अनुष्ठानों के पश्चात मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलते ही हजारों श्रद्धालुओं ने मां कामाख्या के दर्शन किए और मंदिर प्रशासन द्वारा वितरित किए जाने वाले पवित्र अंगोदक और अंगवस्त्र को प्रसाद स्वरूप प्राप्त किया।
तीन दिनों तक क्यों बंद रहता है कामाख्या मंदिर?
अंबुबाची मेले के दौरान यह मान्यता है कि मां कामाख्या वार्षिक रजस्वला (मासिक धर्म) अवस्था में होती हैं। इसी कारण मंदिर का गर्भगृह तीन दिनों तक पूरी तरह बंद रखा जाता है और नियमित पूजा-अर्चना भी स्थगित रहती है। इस अवधि को देवी के विश्राम और सृजन शक्ति के सम्मान का प्रतीक माना जाता है।
26 जून को दोबारा शुरू हुए दर्शन
तीन दिनों की विशेष साधना और शुद्धिकरण अनुष्ठानों के बाद 26 जून की सुबह नित्य पूजा संपन्न की गई। इसके बाद मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलते ही दर्शन के लिए लंबी कतारें लग गईं और देश-विदेश से आए हजारों भक्तों ने मां कामाख्या का आशीर्वाद प्राप्त किया।
क्या होता है अंगोदक?
अंबुबाची मेले के सबसे पवित्र प्रसादों में अंगोदक का विशेष महत्व है। अंगोदक मंदिर परिसर का पवित्र जल होता है, जिसे देवी की कृपा और आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु इसे अपने घर ले जाकर धार्मिक अनुष्ठानों में उपयोग करते हैं और इसे शुभता तथा सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत मानते हैं।
अंगवस्त्र क्यों है विशेष?
अंगवस्त्र लाल रंग का पवित्र वस्त्र होता है, जिसे देवी कामाख्या की दिव्य शक्ति का प्रतीक माना जाता है। अंबुबाची मेला समाप्त होने के बाद इसे श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। मान्यता है कि इसे घर में रखने से सुख-समृद्धि, रक्षा और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
तांत्रिक साधना का प्रमुख केंद्र
कामाख्या मंदिर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है और तांत्रिक साधना का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। अंबुबाची मेले के दौरान देशभर से साधु-संत, तांत्रिक, अघोरी और श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। मान्यता है कि इस अवधि में देवी शक्ति विशेष रूप से जागृत रहती हैं और साधना का विशेष फल प्राप्त होता है।
लाखों श्रद्धालुओं की उमड़ी आस्था
मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही कामाख्या धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। प्रशासन ने सुरक्षा, चिकित्सा, स्वच्छता और यातायात की व्यापक व्यवस्था की ताकि दर्शन सुचारु रूप से संपन्न हो सकें। हर वर्ष की तरह इस बार भी अंबुबाची मेला देश के सबसे बड़े आध्यात्मिक आयोजनों में शामिल रहा।
निष्कर्ष
अंबुबाची मेला 2026 का समापन मां कामाख्या के दर्शन और पवित्र प्रसाद वितरण के साथ हुआ। तीन दिनों की विशेष परंपराओं के बाद मंदिर के कपाट खुलना भक्तों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। अंगोदक और अंगवस्त्र को देवी की कृपा का प्रतीक मानते हुए श्रद्धालु इन्हें श्रद्धापूर्वक ग्रहण करते हैं। यह पर्व न केवल शक्ति उपासना का महोत्सव है, बल्कि स्त्री शक्ति, सृजन और प्रकृति के सम्मान का भी अद्वितीय प्रतीक माना जाता है।
Editorial Review Note
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