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Justice & Equality पर विभिन्न धर्मों के धर्मगुरूओं के विचार

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Justice & Equality पर विभिन्न धर्मों के धर्मगुरूओं के विचार

जस्टिस, इक्वालिटी और डिग्निटी का सन्देश देते हैं हिन्दू धर्म ग्रंथ – स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश, 23 दिसम्बर। परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के दिव्य उपस्थिति एवं मार्गदर्शन में आज यूएनएफपीए के साथ साझेदारी में ग्लोबल इंटरफेथ वॉश एलायंस (जीवा) द्वारा आयोजित दो दिवसीय वेबनाॅर के दूसरे  दिन विभिन्न धर्माें (हिन्दू धर्म, सिख धर्म, कैथोलिक धर्म, बहाई धर्म, मुस्लीम धर्म) के धर्मगुरूओं और प्रख्यात नारी शक्तियों ने सहभाग कर अपने-अपने धर्म में जस्टिस और इक्वालिटी, लैंगिक समानता, घरेलू हिंसा और हिंसा के अन्य प्रकार, प्रजनन स्वास्थ्य, लिंग आधारित हिंसा, युवाओं को उनकी क्षमताओं के आधार पर योग्यताओं को साबित करने के अवसर प्राप्त हो, इन विषयों पर विचार मंथन कर समाधान प्रस्तुत किया।

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यूएनएफपीए और ग्लोबल इंटरफेथ वॉश एलायंस (जीवा) के इस मंच पर प्रख्यात इंटरफेथ लीडर्स ने एक साथ आकर जस्टिस, इक्वालिटी, डिग्निटी से युक्त शांतिपूर्ण दुनिया के निर्माण हेतु अध्यात्मिक और धार्मिक पृष्ठभूमि के आधार पर शास्त्रों और पवित्र ग्रंथों में उल्लेखित शिक्षाओं के माध्यम से महत्वपूर्ण वक्तव्य प्रस्तुत किये।

दो दिवसीय इस आनॅलाइन प्लेटफार्म पर उपस्थित सभी प्रख्यात पैनेलिस्ट हिन्दू धर्म से परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, ऑल इंडिया इमाम आर्गेनाईजेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय इमाम उमर अहमद इलियासी जी, सिख धर्म से बंगला साहिब गुरूद्वारा के मुख्य ग्रंथी आदरणीय सिंह साहिब ज्ञानी रंजीत सिंह जी, अजमेर शरीफ दरगाह से आदरणीय हाजी सैयद सलमान चिश्ती जी, माहेर आश्रम पुणे महाराष्ट्र से आदरणीय सिस्टर लुसी जी, बहाई धर्म से सिस्टर कारमल त्रिपाठी जी ने अपने महत्वपूर्ण संदेश दिये।

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स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि इस सम्मानित मंच के माध्यम से आज हम जस्टिस और इक्वालिटी पर चर्चा कर रहें हैं, मैं कहना चाहूँगा कि हिन्दू धर्म में इस बात पर बहुत ज़ोर दिया गया है। जहाँ वेदों में; उपनिषदों में, पुराणों में, भगवत गीता, रामायण, महाभारत आदि सभी धार्मिक ग्रंथों में एक नहीं बल्कि अनेक मंत्र,  श्लोक और कथाओं  का उल्लेख हैं, जो भी करो, जो भी सोचो वह एक के लिये, अनेक के लिये, सबके लिये सोचो। वह भी बिना किसी लिंग भेद के, जातिभेद, छोटे-बड़े के भेद, ऊँच-नीच के भेद से उपर उठकर सोचने के सन्देश  दिये गये है।

चुंकि ‘मानव-मानव एक समान, सबके भीतर है भगवान’, गीता जी में कहा है। परमार्थ निकेतन  का मोटो, मूल मंत्र ही है ‘सर्वभूत हिते रताः’। अर्थात फाॅर द वैलफेयर ऑफ आल, केवल मनुष्यों ही नहीं सभी प्राणियों के लिये सोचें और समर्पित रहें। केवल ह्यूमन बीइंग के लिये नहीं बल्कि लिविंग बीइंग के लिये सोचे। उस में फिर सबका समावेश हो जाता हैं। इतना बड़ा जस्टिस और इक्वालिटी (समानता) का सन्देश देते है हमारे हिन्दू धर्म के शास्त्र और ग्रंथ।

आदरणीय इमाम उमर अहमद इलियासी जी, ने कहा कि हम जब भी दूसरों से मिलते है, अभिवादन करते है तो कहते है कि ‘अस्सलामु अलैकुम’ जिसका मतलब है कि ईश्वर आपको सलामत रखे।

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कोविड-19 के कारण हमने जिनको खोया, जो इससे प्रभावित होकर सदा के लिये हमें छोड़कर खुदा के पास चले गये हैं उनकी आत्मा को शान्ति मिले यही प्रार्थना ही तो मानवता का संदेश देती है।

उन्होंने कहा कि हम सभी अपनी जिम्मेदारी को लेकर चले तो समाज में जस्टिस और इक्वालिटी के साथ अमन भी स्थापित होगा। कुरान की पूरी संकल्पना ही जस्टिस और इक्वालिटी आधारित है। दुनिया में अमन और शान्ति की स्थापना तभी हो सकती जब हथियार और बम  बनना बंद हो जाये। ‘‘कलम  बनें हथियार  नहीं’’।

आदरणीय सिंह साहिब ज्ञानी रंजीत सिंह जी, ने कहा कि धर्म का काम है समस्याओं का निवारण करना, लोगों की आवाज़ बनना है। हमारी भारतीय संस्कृति में, प्राचीन संस्कृति में धर्मगुरूओं का बड़ा उच्च स्थान रहा है।

गुरूनानक देव जी ने उपदेश दिया है कि परमात्मा एक है। पूरे कायनात में कोई है तो वह है परमात्मा। एक ओंकार! ‘एक पिता एकस के हम वारिक’ इस शिक्षा को अपनायें तो सारी समस्याओं का समाधान स्वतः ही हो जायेगा। ’अव्वल अल्लाह नूर उपाया, कुदरत के सब बंदे एक नूर ते सब जग उपज्या, कौन भले को मंदे।’ सिख धर्म एकता, समानता और भाईचारे की बात कहता है। आदरणीय हाजी सैयद सलमान चिश्ती जी, ने कहा कि  हज़रत ख़्वाजा मोईनुद्दीन  चिश्ती साहब जी ने ‘अनकंडीशनल लव’ का संदेश दिया है। कुरान शरीफ में तो कई बार जस्टिस और इक्वालिटी का जिक्र किया गया है।

उन्होंने कहा कि हमें अपने युवाओं को रचनात्मक आध्यात्मिकता (क्रिएटिव स्पिरिचुअलिटी) से जोड़ना होगा। सिस्टर लुसी, ने कहा कि बाइबिल में कहा है कि हमें भयमुक्त समाज का निर्माण करना है। अगर हमारे अन्दर प्रेम हो तो हम सभी के साथ प्रेम से रह सकते है। इसके लिये ध्यान और प्रार्थना सबसे बेेहतर उपाय हैं इससे हमारे बच्चे फिज़िकली, मेंटली, इमोशनली स्ट्रांग रहेंगे।

सिस्टर कारमल त्रिपाठी जी ने कहा कि जैसा हमारा शरीर विभिन्न सेल्स और उत्तकों से बना है और पूरे बाॅडी के सेल्स मिलकर शरीर को स्वस्थ रखते है उसी प्रकार हमारा समाज भी है। हम सभी चाहे जिस भी धर्म को मानने वाले हों सभी मिलकर हमारे समाज को स्वस्थ और समृद्ध रखने का संदेश बहाई धर्म देता है।

जस्टिस, इक्वालिटी के साथ अन्य सामाजिक मुद्दों पर आधारित इस दो दिवसीय ऑनलाइन वेबनाॅर का कुशल संचालन सुश्री गंगा नन्दिनी जी ने किया। इस अवसर पर यूएनएफपीए के डिप्टी प्रतिनिधि श्री राम हरिदास जी, नलिनी जी, जया जी, दिप्ती प्रिया मेहरोत्रा जी, जीवा से आर्या दुर्गा जी, सुखनूर कौर जी, सत्यवीर, हिमांशु ने उत्कृष्ट सहयोग प्रदान किया।

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Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

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December 23, 2020 5 min read
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