“केरल के शंकराचार्य” का निधन
7 सितंबर 2020 को 79 साल के एक संत का केरल में निधन हो गया। उन्हें केरल का शंकराचार्य कहा जाता था। वे धर्म के संसार में बहुत लोकप्रिय थे, पर भारत का इतिहास उन्हें एक बहुत बड़ी जीत की वजह से याद रखते आ रहा था।
केरल में कासरगोड़ जिला में एक शैव मठ है। सदियों पुराना एक शैव मठ, जो एडनीर नामक जगह पर स्थित है। इसी शैव मठ के मठाधीश थे केशवानंद भारती स्वामी।

एडनीर मठ की पंरपरा
आदि शंकराचार्य की परंपरा से जुड़ा है एडनीर का ये प्राचीन मठ। आदि शंकराचार्य के चार पहले शिष्यों में से एक तोतकाचार्य थे, जिनकी परंपरा में यह एडनीर मठ स्थापित हुआ था। इस मठ का इतिहास करीब 1200 वर्ष पुराना है। केरल के अलावा कर्नाटक में भी इस मठ का काफी सम्मान है। सामाजिक कार्यों और विद्यालयों के संचालन के कारण लोग इससे भक्ति और सेवा भाव से जुड़ रहे है। एडनीर मठ कासरगोड़ शहर दस किलोमीटर दूरी पर बसा है। इसके पास ही मधुवाणी नदी बहती है। मठ में दो प्रमुख देवताओं की आराधना होती है, दक्षिणामूर्ति और गोपालकृष्ण देव।

एडनीर मठ की सामाजिक-धार्मिक भूमिका
आदि शंकराचार्य की स्थानीय पीठ का दर्जा प्राप्त होने के चलते एडनीर मठ के प्रमुख को ‘केरल का शंकराचार्य’ भी कहा जाता है। मठ के प्रमुख स्वामी गुरू का निधन होने के बाद केशवानंद भारती को महज 19 वर्ष में मठ के संचालन का महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल गई। 57 सालों से वह इस पद पर बने हुए थे। केशवानंद को श्रीमत् जगदगुरु श्रीश्री शंकराचार्य तोतकाचार्य श्री केशवानंद भारती श्रीपदगवरु के संबोधन से बुलाया जाता था। तोतकाचार्य ने एक शिवाली ब्राह्मण तुलु नम्बी को संन्यास दिया था, जिसने जो तुलुनाड से केरल आए और शिवली ब्राह्मणों की देखरेख और संवर्धन की जिम्मेदारी निभाने लगे। बाद में मठ के प्रमुख सच्चिदानंद भारती हुए जिनके समय में मठ का प्रचार-प्रसार काफी हुआ। बालाकृष्ण भारती के मठ के प्रमुख होने पर मठ में निर्माण का काफी कार्य हुआ।
श्रीमधिश्वरानंद भारती जी के समय में मठ ने शिक्षा, कला और संस्कृति के प्रसार के लिए कई केन्द्र खोले। इसके बाद से मठ शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय हुआ।
एडनीर मठ का न केवल धर्म के क्षेत्र में बल्कि नृत्य, कला, संगीत और समाज सेवा में भी बढ़-चढ़ कर योगदान देने का इतिहास है। भारत की नाट्य और नृत्य परंपरा को बढ़ावा देने के लिए एडनीर मठ के कई स्कूल और कॉलेज चल रहे हैं। इसके अलावा यह मठ सालों से कई तरह के व्यवसायों को भी संचालित करता है।

भूमि सुधार अधिनियम और केशवानंद भारती
1970 के दशक के आसपास केरल के कासरगोड़ में इस एडनीर मठ के पास हजारों एकड़ जमीन थी। सन् 1972 में केरल भूमि सुधार अधिनियम आया। समाज से आर्थिक और सामाजिक विषमताओं को कम करने के मकसद से लाए गए इस भूमि अधिनियम कानून के तहत जमींदारों और मंदिर-मठों के पास मौजूद हजारों एकड़ की जमीन अधिगृहीत कर ली गई। एडनीर मठ की भी संपत्तियां इसमें सरकार ने हथिया ली थी। इसके बाद एडनीर मठ प्रमुख स्वामी केशवानंद भारती ने सरकार के इस फैसले को पहले केरल की अदालत में चुनौती दी।

संविधान संशोधन और केशवानंद भारती की याचिका
केरल हाईकोर्ट में दायर याचिका में स्वामी केशवानंद भारती ने आर्टिकल 26 का हवाला देते हुए इस बात मांग की थी कि उन्हें धार्मिक संपदा का प्रबंधन करने का मूल अधिकार दिया जाए। केशवानंद भारती ने संविधान संशोधन के जरिए आर्टिकल-31 में दिए गए संपत्ति के मूल अधिकार पर पाबंदी लगाने वाले भारत सरकार के 24वें, 25वें और 29वें संविधान संशोधनों को चुनौती दी थी। केरल और केंद्र सरकार के भूमि सुधार कानूनों को भी उन्होंने चुनौती दी थी। केरल हाईकोर्ट में केशवानंद को हार का सामना करना पड़ा। जिसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। जहां से जीत कर केशवानंद भारती जी ने एक इतिहास में दर्ज होने वाली निर्णय के लिए अपील करने वाले वादी के तौर पर पहचान स्थापित की।
[video_ads]
[video_ads2]
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
Religion World provides information on all religions and presents it impartially. You can send us information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com. You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.
