लुधियाना, 29 जून : जैन धर्म के 24वें तीर्थकर भगवान श्री महावीर स्वामी के 73वें पट्टधर न्यायाम्भोनिधि, जंगमयुग प्रधान, जैन धर्म को विश्व के कोने-कोने तक पहुंचाने वाले, पंजाब देशोद्धारक, साहित्यकार, जैनाचार्य श्रीमद् विजयानंद सूरीश्वर महाराज (श्री आत्माराम जी महाराज) का देवलोकगमन आज से 125 वर्ष पूर्व गुजरांवाला शहर में हुआ था।
जैन धर्म के अनुयायियों का यह महान तीर्थ स्थान रहा है। उनके पट्टधर आचार्य श्री विजय वल्लभ सूरी महाराज ने सबसे पहले श्री आत्मानंद जैन गुरुकुल की स्थापना भी गुजरांवाला में ही की थी, लेकिन देश विभाजन के बाद गुजरांवाला जैन तीर्थ स्थल पाकिस्तान में रह गया। जैनाचार्य श्री विजयानंद सूरीश्वर महाराज की अमर समाधि आज भी वहां मौजूद है।
जैन भक्तों ने गुजरांवाला तीर्थ की पवित्र माटी भारत में लाकर अपनी श्रद्धा को संजोये रखने में सफलता अर्जित की। इस गुजरांवाला तीर्थ की पावन मिट्टी से भरे रजकलश की दर्शन यात्रा गत वर्ष पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र प्रांतों के अनेक नगरों में आयोजित की गई थी।
तपागच्छाधिपति आचार्य श्री मनोहर कीर्ति सागर सूरी जी महाराज, सिद्धांत दिवाकर गच्छाधिपति आ. श्री जयघोष सूरि म. आदि जैन शासन के शीर्ष अनेक पूज्य ने इस पवित्र माटी के दर्शन करके वासक्षेप भी किया। ऐसे गुजरांवाला तीर्थ की परम पवित्र माटी का अयोध्या में निर्माणाधीन भगवान श्री राम के जन्म स्थल मंदिर के शिलान्यास प्रसंग पर भिजवाया गया।
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