रायसेन, 26 अप्रैल; रमजान के पवित्र महीने में तोप की आवाज से रायसेन जिले में लोग रोजा खोलते थे। लॉकडाउन की वजह से इस बार 200 साल पुरानी परंपरा टूट गई है। इस बार यह तोप मौन रहेगी।
सुबह और शाम जब इलाके में तोप की आवाज गूंजती थी तो लोगों को सहरी और इफ्तार की जानकारी मिलती थी। कोरोना की वजह से इस बार प्रशासन ने तोप चलाने की अनुमति नहीं दी है।
करीब 200 साल पहले रमजान में रायसेन सहित आसपास के 20 गांव के रोजेदारों को समय की सूचना देने के लिए ये परंपरा शुरू हुई थी। तोप के साथ-साथ सहरी की तैयारी करने के लिए नगाड़े बजाने का क्रम भी उसी दौर में शुरू हुआ था।
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ऐसे चलती है यह तोप
तोप में गोले की जगह रस्सी बम का प्रयोग किया जाता है। इसे बारूद से तैयार किया जाता है। इस तोप को चलाने के लिए जिम्मेदार लोग सुबह तीन बजे पहाड़ी पर ऊपर जाते हैं, फिर सेहरी की जानकारी देकर नीचे आ जाते हैं, उसके बाद शाम को इफ्तार की जानकारी देने जाते हैं।
संक्रमण के कारण तोप चलाने के लिए अस्थाई लाइसेंस का आवेदन मुस्लिम त्यौहार कमेटी ने किया था, लेकिन पुलिस और प्रशासन ने इस बार अनुमति नहीं दी।
दरअसल, रायसेन में कोरोना पॉजिटिव की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में आंकड़ा 26 तक पहुंच गया है। शहर रेड जोन में है और टोटल लॉकडाउन है। ऐसे में प्रशासन कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है।
रायसेन मुस्लिम कमिटी के अध्यक्ष मोहम्मद अमीन ने कहा कि तोप के लिए जिला प्रशासन से अनुमति मांगी गई थी कि किले की प्राचीर से तोप चलाने की अनुमति दें, लेकिन कोरोना की वजह से इसे खारिज कर दी गई। सभी लोग अपने घरों पर ही रहें और लॉकडाउन का पालन करें।You can send your stories/happenings here: info@religionworld.in
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