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हस्तरेखा विज्ञान – रेखाओं और पर्वतों से बनने वाले खास योग

हस्तरेखा विज्ञान – रेखाओं और पर्वतों से बनने वाले खास योग

हस्तरेखा विज्ञान – रेखाओं और पर्वतों से बनने वाले खास योग
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हस्तरेखा विज्ञान – रेखाओं और पर्वतों से बनने वाले खास योग

हस्तरेखा विज्ञान – रेखाओं और पर्वतों से बनने वाले खास योग

जीवन रेखा – Life Line
हृदय रेखा – Heart Line
मस्तिष्क रेखा – Head Line
सूर्य रेखा – Sun Line or Fame Line
भाग्य रेखा – Fate Line
शुक्र पर्वत – Venus Mount
चंद्र पर्वत – Moon Mount
गुरु पर्वत – Jupiter Mount
मंगल पर्वत – Mars Mount
शनि पर्वत – Saturn Mount
सूर्य पर्वत – Sun Mount
बुध पर्वत – Mercury Mount

हस्तरेखा विज्ञान - रेखाओं और पर्वतों से बनने वाले खास योग

भाग्य योग

हस्तरेखा सिद्धांत के अनुसार जो रेखा मणिबंध से निकलकर शनि पर्वत तक जाती है वही भाग्य रेखा कहलाती है, लेकिन भाग्य योग का निर्माण तब होता है जब कोई पुष्ट, पतली और लालिमा लिए हुए भाग्य रेखा शनि पर्वत से चलकर गुरु पर्वत के नीचे समाप्त होती है और जहां रेखा समाप्त होती है वहां एक सफेद बिंदु हो तो भाग्य योग का निर्माण होता है। प्रसिद्ध हस्तरेखा कीरो ने भाग्य योग की कुछ अन्य स्थितियां भी बताई हैं। जिनके अनुसार पुष्ट भाग्य रेखा सूर्य पर्वत पर पहुंचती हो। भाग्य रेखा गुरु पर्वत से प्रारंभ होती हो। दोनों हाथों में स्पष्ट और लंबी भाग्य रेखाएं हों। भाग्य रेखा चंद्र पर्वत से प्रारंभ होती हो तो भाग्य योग बनता है। जिनके हाथ में यह योग होता है वह व्यक्ति अपार धन अर्जित करता है। उसकी ख्याति चारों ओर फैलती है, अनेक भवन और वाहन का स्वामी होता है। पत्नी के सहयोग से जीवन में शिखर पर पहुंचता है।

हंस योग

यदि तर्जनी अंगुली अनामिका से लंबी हो, गुरु पर्वत पूर्ण विकसित तथा लालिमा लिए हुए हो, उस पर क्रॉस के चिन्ह के अलावा और अन्य कोई चिन्ह न हो तो उसके जीवन में हंस योग का निर्माण होता है। जिसके हाथ में ऐसा संयोग देखा जाता है वह व्यक्ति लंबे डीलडौल वाला आकर्षक, सुंदर शरीर का मालिक होता है। ऐस योग वाली स्त्रियों के आकर्षण प्रभाव से प्रत्येक व्यक्ति मोहित रहता है। अभिनेता-अभिनेत्री, चित्रकार, लेखक, मॉडल आदि के हाथों में इसी तरह का योग देखा गया है। इस योग वाला व्यक्ति मधुरभाषी और सभी के साथ श्रेष्ठ व्यवहार करने वाला होता है। यह योग गुरु के प्रभाव से बनता है और यह पंचमहापुरुष योग में से एक होता है इसलिए ऐसा व्यक्ति सफल न्यायाधीश भी होता है।

राजनेता योग

यदि मध्यमा अंगुली का अग्र भाग नुकीला हो तथा सूर्य रेखा विकसित और लंबी हो। उस पर कोई नक्षत्र, क्रॉस या तिल का निशान न हो। गुरु और शनि पर्वत भी पुष्ट और लाल हों तो व्यक्ति के हाथ में राजनेता योग बनता है। जिनके हाथ में ऐसा योग बनता है वे एक सफल राजनेता बनते हैं। उनका राजनीतिक करियर तेजी से उंचाइयां छूता है और मंत्री, प्रधानमंत्री पद तक पहुंचते हैं। ऐसे लोगों की लोकप्रियता का दायरा आयु बढ़ने के साथ-साथ बढ़ता जाता है। ऐसे लोग सदाचारी, सत्यभाषी और ईमानदार होते हैं।

बुधादित्य योग

जिस तरह जन्म कुंडली में सूर्य और बुध मिलकर बुधादित्य योग बनाते हैं उसी तरह हस्तरेखा में भी सूर्य और बुध की शुभ युति से बुधादित्य योग का निर्माण होता है। हथेली में बुध और सूर्य पर्वत पास-पास होते हैं। यदि ये दोनों पर्वत एक-दूसरे से जुड़ जाएं, इनके बीच में कोई गैप न रहे और देखने में एक ही प्रतीत हों। साथ ही बुध और सूर्य रेखाओं कोई रेखा न काटती हो तो बुधादित्य योग बनता है। जिन लोगों के हाथ में ऐसा देखा जाता है वे कुशल वक्ता, चतुर, बुद्धिमान और परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालने वाले होते हैं। अपने तर्कों से बड़े-बड़ों को परास्त कर देते हैं। एक तरह से बिना हथियार के ये समस्त युद्धों में विजयी होते हैं। आर्थिक तरक्की के सारे मार्ग इनके लिए सदा खुले रहते हैं।

तडि़त योग

यदि चंद्र पर्वत से कोई पतली रेखा गुरु पर्वत की ओर जाती हो तथा कनिष्ठिका अंगुली अनामिका के लगभग बराबर हो तो तडि़त योग बनता है। इस योग वाले व्यक्ति राजा के समान जीवनयापन करते हैं। परिवार और समाज में इन्हें पूरा यश-सम्मान मिलता है। समाज के प्रतिष्ठित व्यक्ति होते हैं। जिन लोगों के हाथों में तडि़त योग होता है वे प्रायः अपनी मेहनत से आगे बढ़ने वाले होते हैं। किसी बिजनेसमैन के हाथ में यह योग हो तो वह दुनिया का सबसे अमीर व्यक्ति भी बन सकता है।

हस्तरेखा के विद्वानों ने तडि़त योग की कुछ अन्य स्थितियां भी बताई हैं जैसे:–

1. हाथ की समस्त अंगुलियां पतली और लंबी हों तथा नुकीली हों और तर्जनी अंगुली के तीसरे पर्व तिल हो।
2. कनिष्ठिका अंगुली का झुकाव अनामिका की ओर हो तथा सभी पर्वत पूर्ण मजबूत हों।
3. चंद्र पर्वत से कोई रेखा निकलकर सूर्य पर्वत तक पहुंचे और वह रेखा सीढ़ीदार हो।

शुभकर्तरी योग

यदि हथेली के बीच का हिस्सा दबा हुआ गहरा हो। सूर्य और गुरु पर्वत पुष्ट, मजबूत और उभरे हुए हों। भाग्य रेखा शनि पर्वत के मूल को छूती हो तो हाथ में शुभकर्तरी योग बनता है। जिस व्यक्ति के हाथ में यह योग होता है वह तेजस्वी और चुंबकीय व्यक्तित्व का धनी होता है। उसके आसपास ऐश्वर्य और भौतिक सुध-सुविधाएं स्वयं चले आते हैं। एक से अधिक साधनों से आय प्राप्त करता है तथा अपने पूर्वजों से मिली संपत्ति में वृद्धि करने वाला होता है। शारीरिक दृष्टि से ऐसा व्यक्ति आकर्षक होता है। विपरीत लिंगी व्यक्तियों की इनके जीवन में भरमार होती है। कहीं-कहीं ऐसा व्यक्ति घमंडी भी देखा गया है।

गजलक्ष्मी योग

यदि दोनों हाथों में भाग्य रेखा मणिबंध से प्रारंभ होकर सीधी शनि पर्वत पर जाती हो तथा सूर्य पर्वत पूर्ण विकसित, लालिमा लिए हुए हो और उस पर सूर्य रेखा भी बिना कटी-फटी, पतली और स्पष्ट हो। इनके साथ मस्तिष्क रेखा, हृदय रेखा तथा आयु रेखा स्पष्ट हो तो इसे गजलक्ष्मी योग कहा जाता है। जिस व्यक्ति के हाथ में यह योग होता है वह साधारण परिवार में जन्म लेकर भी अपने शुभ कर्मों से उच्च स्तरीय जीवनयापन करता है। उसके जीवन में मान-सम्मान की कोई कमी नहीं होती और वह समस्त ऐश्यर्व, सुख भोगता है। ऐसे व्यक्ति समुद्र पार व्यापार करते हैं और यदि नौकरीपेशा है तो उच्च पदों पर आसानी से पहुंच जाते हैं। जीवन में कोई अभाव नहीं रहता और सुंदर जीवनसाथी का साथ मिलता है।

समझें हस्तरेखा में शुभ संकेत

यदि किसी व्यक्ति की हथेली में सूर्य रेखा से निकलकर कोई शाखा गुरु पर्वत की ओर जाती है तो व्यक्ति शासकीय अधिकारी बनता है।

यदि हथेली में शुक्र पर्वत शुभ हो, विस्तृत हो और इस पर कोई अशुभ लक्षण ना हो तो व्यक्ति का स्वास्थ्य अच्छा रहता है। शुक्र पर्वत अंगू‌‌ठे नीचे वाले भाग को कहते हैं, इस पर्वत को जीवन रेखा घेरे हुए दिखाई देती है।

बुध पर्वत पर एक छोटा सा त्रिभुज हो तो व्यक्ति प्रशासनिक विभाग में उच्च पद प्राप्त कर सकता है।

स्वास्थ्य रेखा की लंबाई मस्तिष्क रेखा और भाग्य रेखा तक ही सीमित हो तो यह शुभ संकेत है। ऐसी स्वास्थ्य रेखा वाले व्यक्ति का स्वास्थ्य उत्तम रहता है। शुक्र पर्वत, जीवन रेखा के आसपास से प्रारंभ होकर बुध पर्वत की ओर जाने वाली रेखा को स्वास्थ्य रेखा कहते हैं। बुध पर्वत सबसे छोटी उंगली के नीचे होता है।

यदि नाखून एकदम साफ और स्वच्छ दिखाई देते हैं तो यह शुभ लक्षण है। नाखूनों पर कोई दाग-धब्बा, कालापन न हो तो शुभ रहता है। शुभ नाखून अच्छे स्वास्थ्य की ओर इशारा करते हैं।

अंगूठा मजबूत, लंबा, सुंदर हो तथा मस्तिष्क रेखा भी शुभ हो तो व्यक्ति नौकरी से लाभ प्राप्त करता है। शुभ मस्तिष्क रेखा यानी ये रेखा कटी हुई या टूटी हुई न हो, अन्य रेखाएं इसे काटती न हो, लंबी और सुंदर दिखाई देती हो।

हस्तरेखा के अशुभ संकेत को समझें 

यदि दोनों हथेलियों में हृदय रेखा कमजोर और अस्पष्ट दिखाई देती है तो व्यक्ति आलसी और कामचोर हो सकता है।

यदि मणिबंध पर एक ही रेखा हो और वह भी अधूरी हो तो व्यक्ति का जीवन निरस होता है और इनके जीवन कोई उत्साह नहीं होता है।

हथेली के दोनों मंगल पर्वत दबे हुए दिखाई दे रहे हों तो व्यक्ति कोई उपलब्धि हासिल नहीं कर पाता है। ये लोग किसी भी काम में उत्सुकता नहीं दिखाते हैं।

यदि किसी व्यक्ति की हथेली में भाग्य रेखा के पास धन यानी जोड़ (+) का निशान हो तो जीवन में कष्ट प्राप्त होते हैं।

यदि मस्तिष्क रेखा बहुत ही छोटी है तो व्यक्ति मृत्यु समान कष्ट पाता है।

हस्तरेखा से जुड़ी कुछ रोचक जानकारी

यदि किसी व्यक्ति की हथेली में चक्र जैसा कोई निशान बना हुआ है तो वह काफी महत्वपूर्ण है। हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार हथेली में चक्र का निशान अंगूठे पर हो तो व्यक्ति बहुत भाग्यशाली माना जाता है। इस प्रकार के निशान वाले व्यक्ति धनवान होते हैं। अंगूठे पर चक्र का निशान होने पर व्यक्ति ऐश्वर्यवान, प्रभावशाली, दिमाग से संबंधित कार्य में योग्य होता है। ऐसे लोग बुद्धि का प्रयोग करते हुए काफी धन लाभ प्राप्त करते हैं। ये लोग पिता के सहयोगी होते हैं। घर-परिवार एवं समाज में इन्हें पूर्ण मान-सम्मान प्राप्त होता है।

यदि किसी व्यक्ति के दोनों हाथों में भाग्य रेखा मणिबंध से शुरू होकर सीधी शनि पर्वत तक जा रही हो, साथ में सूर्य रेखा भी पतली लम्बी, शुभ हो और मस्तिष्क रेखा, आयु रेखा भी अच्छी है तो उस हाथ में गजलक्ष्मी योग बनता हैं। ये योग अचानक धन लाभ दे सकता है।

यदि शनि पर्वत यानी रिंग फिंगर के नीचे वाला क्षेत्र और शुक्र पर्वत अधिक भरा हुआ हो, सुंदर हो और भाग्य रेखा शुक्र पर्वत यानी अंगूठे के पास वाले क्षेत्र से आरंभ होकर शनि क्षेत्र के मध्य तक पहुंचती है तो ऐसे लोगों के जीवन में कभी भी धन संबंधी कमी नहीं होती है। ये लोग काफी पैसा कमाते हैं।

यदि किसी व्यक्ति की हथेली में भाग्य रेखा व चन्द्र रेखा मिलकर एक साथ शनि पर्वत पर पहुंचे तो ऐसे लोग भी धनवान रहते हैं। हथेली में अंगूठे के ठीक नीचे शुक्र पर्वत होता है और शुक्र पर्वत की दूसरी ओर हथेली के अंतिम भाग पर चंद्र पर्वत होता है। इस चंद्र पर्वत से कोई रेखा निकलती है तो उसे चंद्र रेखा कहा जाता है।

यदि भाग्य रेखा लिटिल फिंगर के नीचे के क्षेत्र से प्रारंभ होकर किसी भी रेखा से कटे बिना शनि पर्वत तक पहुंचती हो तो यह रेखा भी शुभ होती है। इसके प्रभाव से व्यक्ति धन संबंधी कार्यों में विशेष लाभ प्राप्त करता है।

लेख – पं. दयानंद शास्त्री, उज्जैन 

संपर्क – +91 90393 90067

Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

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April 7, 2019 9 min read
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