संगम पर संत और बसंत का संगम : परमार्थ निकेतन शिविर में किया गया माँ सरस्वती जी का पूजन, ध्यान और संगम स्नान
- संगम पर संत और बसंत का संगम
- परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, श्री अनुराग शास्त्री जी महाराज के पावन सान्निध्य में भारत
- सहित विश्व के अनेक देशों से आये श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान कर विश्व एक परिवार है का दिया संदेश
- बंसत पंचमी के अवसर पर परमार्थ निकेतन शिविर में किया गया माँ सरस्वती जी का पूजन, ध्यान और संगम स्नान
- बसंत का मर्म समझाते हुये स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि समस्याओं का अब बस अंत ही बसंत है
- स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने गरीबी और गन्दगी पर ध्यान देने का कराया संकल्प
- हनुमान चालीसा के साथ अब सफाई चालीसा भी पढ़ें
- समाज में विद्यमान गंदगी का अंत हो, बस हमारे भीतर की कमियों और कुरीतियों का हो अंत यही तो है बंसत
- ऋषि संस्कृति और कृषि संस्कृति इस देश के लिये वरदान है-स्वामी चिदानन्द सरस्वती
- कृषि संस्कृति ने खेतों को सींचा और ऋषि संस्कृति ने दिलों को सींचा – स्वामी चिदानन्द सरस्वती
प्रयागराज/ऋषिकेश, 10 फरवरी। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, परिवहन मंत्री उत्तरप्रदेश सरकार श्री स्वतंत्र कुमार देव जी, जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी एवं भारत सहित विश्व के अनेक देशों से आये श्रद्धालुओं ने परमार्थ निकेतन शिविर में विद्या की देवी माँ सरस्वती जी का पूजन, ध्यान और वेद मंत्रों का उच्चारण किया।
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स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि संगम पर संत और बसंत का संगम, यह अद्भुत मिलन दे रहा है मिलन की संस्कृति का संदेश। यह मिलन ऊँच-नीच, भेदभाव, जातिवाद, लिंगभेद, आतंकवाद, नक्सलवाद के अंत का दे रहा है संदेश, अपने प्यारे भारत में इनका हो बस अंत यही होगा हमारा सच्चा बसंत। इन सभी का अंत ही सच्चा संगम है, जो इस देश के संगम को बनाये रखेगा। स्वामी जी महाराज ने कहा कि नक्सलवाद और नस्लवाद नहीं बल्कि असलवाद की ओर बढें, आतंकवाद की ओर नहीं बल्कि अध्यात्मवाद की ओर बढें क्योंकि आतंक की दुनिया से मुक्ति अध्यात्म ही दिला सकता है। अध्यात्म ही इस देश के संगम को कायम रख सकता है। अपने-अपने धर्म का पालन करें, अपने-अपने मजहब को मानें लेकिन अध्यात्म की राह पर चलें। अध्यात्म ही तो है सत्य, प्रेम और करूणा का संगम । सभी के दिलों में सत्य, प्रेम और करूणा का संगम ही, सच्चा बंसत है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने गरीबी और गन्दगी पर ध्यान देने का संकल्प कराया। संकल्प कराते हुये कहा कि बंदगी और गंदगी साथ -साथ नहीं जाते; पूजा और प्रदूषण साथ-साथ नहीं जाते, इसलिये आईये संगम पर पूजा कर हम भीतर भी और बाहर भी प्रदूषण मुक्त होने का संकल्प करें। हम बंदगी तो करें परन्तु गंदगी से मुक्त होने का भी संकल्प ले। समाज में आज बहुत तरह की गंदगी विद्यमान है उन सभी का अंत हो, बस, अंत हो, यही तो बंसत है। उन्होने कहा कि आज बंसत पंचमी के दिन स्नान सचमुच अद्भुत है। आज विद्या की देवी, विनम्रता की देवी सरस्वती जी का दिवस है। प्रार्थना करें कि विद्या की देवी, विनम्रता की देवी हम सभी को अज्ञान से मुक्त करे तथा हम सभी में विनम्रता का वास हो। ’’विद्या ददाति विनयम्।’’ ’’विद्या सा विमुक्तये’’।
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उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने विश्व शान्ति और सभी को स्वच्छ जल की आपूर्ति हो इस भाव से विश्व ग्लोब का जलाभिषेक किया। स्वामी जी महाराज ने कहा कि अभी तक हमने शिवाभिषेक किया अब धरती माँ का भी अभिषेक करें; अपनी गलियों का भी अभिषेक करें, मोहल्लों का भी अभिषेक करें। अभी तक हमने भगवान नीलकण्ठ शिव के गले का अभिषेक किया अब गलियों का भी अभिषेक करें। अभी तक हनुमान चालीसा पढ़ी अब सफाई चालीसा भी पढ़ें। उन्होने कहा कि मुझे लगता है कि संगम से इस देश को यह संदेश जाना चाहिये संत मीडिया के माध्यम से और सोशल मीडिया के माध्यम से, तभी हम स्वच्छता के संगम को बचा कर रख सकते हैं तभी हमारा देश स्वच्छ भारत-स्वस्थ भारत और समृ़द्ध भारत की दिशा की ओर बढ़ेगा।
परिवहन मंत्री उत्तरप्रदेश सरकार श्री स्वतंत्र कुमार देव जी ने युवाओं को संदेश दिया कि आप जिस क्षेत्र में कार्य कर रहे है उसमें श्रेष्ठ कार्य करें। कोध्र न करें और अहंकार न पाले, अहंकार आप को खत्म कर देता है। उन्होने कहा कि आप सभी इस देश के बेटे हैं, आप इस देश की विचार धारा को बचाये रखने का कार्य करें। इस देश की विचारधारा आज जिंदा है, तो वह संतों के कारण जिंदा है।
जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि कुम्भ आस्था का पर्व है; भारतीय संस्कृति का पर्व है। संगम में डुबकी लगाकर केवल अपने शरीर को ही गीला न करें बल्कि अपनी आत्मा को भी भीगने दें और इस दिव्य अनुग्रह को अपने साथ लेकर जायें।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि ऋषि संस्कृति और कृषि संस्कृति इस देश के लिये वरदान है इसे साथ लेकर जाये। कृषि संस्कृति ने खेतों को सींचा और ऋषि संस्कृति ने दिलों को सींचा। आज के समाज के कल्चर और एग्रीकल्चर के साथ एक दूसरा कल्चर भी जन्म ले रहा है वह है एंग्रीकल्चर। आज का युवा किस बात के लिये एंग्री है, समाज के लिये या स्वयं के लिये आज उस एंग्री कल्चर को तिंलाजलि दे। उन्होने कहा कि अब हम सभी का एक संकल्प हो राष्ट्र पहले बाकी सब बाद में।
स्वामी जी महाराज ने परिवहन मंत्री श्री स्वत्रंत कुमार देव जी को साधुवाद देते हुये कहा कि कुम्भ मेले में परिवहन की अद्भुत व्यवस्थायें हैं। शाही स्नान के दिनों में प्रयाग राज में लघु विश्व विद्यमान रहता है उसके दौरान भी कर्मठ मुख्यमंत्री उत्तरप्रदेश श्री योगी आदित्यनाथ जी का नेतृत्व और मंत्रीमंडल के अनुपम योगदान से कुम्भ दिव्य, भव्य, व्यवस्थित और सुरक्षित रूप से सम्पन्न हुआ।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, कथाव्यास श्री अनुराग शास्त्री जी महाराज, साध्वी भगवती सरस्वती जी एवं भारत सहित आस्ट्रेलिया, पेरू, कोलम्बिया, अमेरिका, साइबेरिया, कनाडा, मलेशिया, नेपाल, नार्वे, स्पेन, इन्डोनेशिया, तिब्बत, कम्बोडिया, श्रीलंका, थाइलैंड, ब्राजील, जमर्नी, जापान, सिंगापुर, क्रोवाशिया, अर्जेन्टीना, मेक्सिको, हाॅलैैण्ड विश्व के अन्य देशों से आये श्रद्धालुओं ने स्नान किया। स्वामी जी महाराज ने कुम्भ मेला प्रशासन, समस्त पदाधिकारी गण, भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी एवं कर्मठ मुख्यमंत्री उत्तरप्रदेश सरकार श्री योगी आदित्यनाथ जी को तीनों स्नान सफलता और स्वच्छतापूर्ण सम्पन्न होने के उपलक्ष्य में साधुवाद देते हुये सभी की भूरि-भूरि प्रशन्सा की। स्नान के दौरान सभी की सुरक्षा, सुन्दर और स्वर्णीम स्नान के लिये सभी पदाधिकारियों को धन्यवाद दिया।।
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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