कुम्भ 2019: समाचार बुलेटिन 28 जनवरी
प्रयागराज, 28 जनवरी; दुनियाभर के लोग कुम्भ मेले में आ रहे हैं. साधना, आराधना और पुण्य की चाह में रोजाना लाखो लोग संगम में डुबकी लगा रहे हैं. 2 शाही स्नान हो चुके हैं ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि डेढ़ करोड़ श्रद्धालु मौनी आमावस्या पर स्नान करने आएंगे. कुंभ क्षेत्र में प्रवेश करते ही तीर्थयात्रियों को अबकी भूलभुलैया से होकर गुजरना पड़ेगा. बिना इसे पार किए संगम पर पहुंचना मुश्किल होगा. भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने इसे बनवाया है. लगभग 70 हजार बल्लियों की मदद से बनवाए गए इस मकड़जाल में 200 मीटर की दूरी को पूरा करने में श्रद्धालुओं को 4 किलोमीटर चलना पड़ेगा.
ऐसा ही एक भूलभुलैया अक्षयवट में प्रवेश करने के लिए बनाया गया है. वहां भी जाने वाले लोग कई बार इतना घुमाव देखकर अन्दर जाने की इच्छा त्याग देते हैं. बाहर से ही अक्षयवट को नमन करके आगे बढ़ जाते हैं.
क्या है इस निर्माण के पीछे का कारण
इस चक्रव्यूह का निर्माण हर बार मेले में किया जाता है. आला अफसरो के अनुसार, भीड़ को नियंत्रित करने में ये अभी तक सबसे कारगर साबित हुआ है. बीच की लाइनों में पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया जाएगा. ताकि किसी तरह की परेशानी होने पर उससे निपटा जा सके.
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कुम्भ समरसता और एकता का प्रतीक: राम माधव
प्रयागराज, 28 जनवरी; भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं राज्य सभा सदस्य राम माधव रविवार को कुंभ नगरी पहुंचे. यहां उन्होंने सेक्टर छह स्थित भाजपा के शिविर में पार्टी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं से मुलाकात की. उन्होंने सरकार द्वारा की गई व्यवस्था की भी तारीफ की. साथ ही कुंभ को समरसता एवं एकता का प्रतीक बताया. राष्ट्रीय महासचिव ने कुंभ की दिव्यता और भव्यता पर भी चर्चा की. कहा कि आस्था के इस कुंभ में देश विदेश के लोग आ रहे हैं. अयोध्या में राममंदिर निर्माण को लेकर उन्होंने कहा कि वहां इसका निर्माण जल्द शुरू हो यही सभी की इच्छा है.
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संगम भूमि दान और त्याग की भूमि: अखिलेश यादव
प्रयागराज, 28 जनवरी; अखाड़ा परिषद के आमंत्रण पर रविवार समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव कुम्भ पहुंचे. अखिलेश यादव ने संगम में डुबकी लगाई. पवित्र त्रिवेणी की पूजा के बाद उन्होंने बड़े हनुमान के दर्शन किए. इससे पूर्व उन्होंने निरंजनी अखाड़े के शिविर में उन्होंने अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि महाराज से मुलाकात की. सपा अध्यक्ष ने कहा कि संगम की भूमि दान और त्याग की भूमि है. केंद्र की नरेंद्र मोदी और प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को उन्होंने सलाह दी कि वह इस कुंभ में अकबर के किले को आम जनता के लिए दान कर दें. इसके साथ ही गंगा, यमुना, अदृश्य सरस्वती की धारा में अहंकार का त्याग करने की सलाह भी दी. सपाध्यक्ष ने पत्रकारों से कहा कि कुंभ में देश-दुनिया से लोग व्यवस्था देखने के लिए नहीं, बल्कि आस्था लेकर आते हैं. वह यहां स्नान-दान की परंपरा को निभाते हैं. कुंभ का अनुभव लेकर लोग जाते हैं. उन्होंने कहा कि कभी सम्राट हर्षवर्धन ने यहां दान की परंपरा की शुरुआत की थी.
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कुंभ में राम मंदिर के लिए मौनी बाबा की अनूठी साधना
प्रयागराज, 28 जनवरी; अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए लम्बे समय से धार्मिक अनुष्ठान कर रहे परमहंस आश्रम के महंत शिवयोगी मौनी महाराज ने प्रयागराज के कुंभ मेले में अनूठी साधना की है. मौनी बाबा ने कुंभ मेले में लगे अपने कैम्प से संगम तक का तकरीबन पांच किलोमीटर तक का लम्बा सफर ज़मीन पर लोटते हुए तय किया. बाबा की यह अनूठी साधना अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर के निर्माण के रास्ते में आने वाली रुकावटें दूर होने की कामना के लिए थी.ज़मीन पर लोटते हुए बाबा के पीछे उनके सैकड़ों भक्त ढोल-नगाड़ों की थाप पर भक्ति भाव में मगन होकर झूमते-नाचते हुए चल रहे थे. राम मंदिर निर्माण के लिए मौनी बाबा की इस अनूठी साधना को देखने के लिए मेले में सैकड़ों की भीड़ उमड़ी. इस दौरान श्रद्धालुओं ने बाबा के नाम के जयकारे लगाए और मंदिर निर्माण के उनके संकल्प के पूरा होने की कामना की. प्रयागराज में लगे आस्था के सबसे बड़े मेले कुंभ में बाबा शिव योगी उर्फ़ मौनी महाराज भी कैंप लगाकर कल्पवास कर रहे हैं. अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण की कामना के लिए बाबा अपने कैंप में रोज़ाना तैंतीस हजार दीपक जलाते हैं. मंदिर के लिए ही उन्होंने अपने शरीर पर ग्यारह हजार से ज़्यादा रुद्राक्ष पहन रखा है. मंदिर निर्माण के संकल्प की खातिर ही मौनी बाबा ने पिछले करीब उन्नीस सालों से अन्न भी त्याग कर रखा है. मौनी बाबा ने रविवार को कुंभ मेले में सेक्टर चौदह में लगे अपने शिविर से संगम तक का तकरीबन पांच किलोमीटर लम्बा सफर लेटकर तय किया. इतनी दूरी तय करने में मौनी बाबा को तकरीबन साढ़े पांच घंटे का वक्त लग गया. बाबा पूरे वक्त ज़मीन पर लोटते हुए संगम घाट तक पहुंचे.
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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