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चिश्ती फाउंडेशन अजमेर शरीफ और वर्ल्ड उर्दू असोसिएशन के दो दिवसीय सेमिनार का शानदार आगाज़ 

चिश्ती फाउंडेशन अजमेर शरीफ और वर्ल्ड उर्दू असोसिएशन के दो दिवसीय सेमिनार का शानदार आगाज़ 

चिश्ती फाउंडेशन अजमेर शरीफ और वर्ल्ड उर्दू असोसिएशन के दो दिवसीय सेमिनार का शानदार आगाज़ 
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चिश्ती फाउंडेशन अजमेर शरीफ और वर्ल्ड उर्दू असोसिएशन के दो दिवसीय सेमिनार का शानदार आगाज़ 

चिश्ती फाउंडेशन अजमेर शरीफ और वर्ल्ड उर्दू असोसिएशन के दो दिवसीय सेमिनार का शानदार आगाज़ 

“उर्दू,फारसी और अरबी में तसव्वुफ़ की रिवायत” पर जे.एन.यू में सेमिनार आयोजित 7 अक्टूबर, जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में उर्दू ,फारसी अरबी में तसव्वुफ़ की रिवायत विषय पर सेमीनार का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन को वर्ल्ड उर्दू एसोसिएशन, चिश्ती फाउंडेशन अजमेर शरीफ एवं फखरुद्दीन अली अहमद मेमोरियल कमेटी लखनऊ, इंस्टिट्यूट ऑफ इंडो पर्शियन स्टडीज़ सहभागिता से कर रहा है। 

आज इसका पहला दिन था और 7 अक्टूबर को इसका समापन होगा। इसमें देश एवं विदेश के विद्वान अपने शोध पत्र पढेंगे .यह जानकारी सय्यद सलमान चिश्ती चेयरमैन चिश्ती फाउंडेशन अजमेर शरीफ ने दी। वर्ल्ड उर्दू एसोसिएशन के निदेशक प्रोफ़ेसर ख्वाजा मोहम्मद इकरामुद्दीन ने बताया कि इस आयोजन से संसार को एक नयी दिशा में सोचने का मौका मिलेगा और सूफी विचारों का प्रभाव किस प्रकार रहा है इसका ज्ञान होगा। 

सूफिज्म / तसवूफ सेमीनार में विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के अनुसंधान विद्वान(रिसर्च स्कॉलर) और प्रशिद्ध बुद्धिजीवियों ने ”उर्दू और अरबी साहित्य में तसौउफ़ की परंपरा” पर अपनी अपनी बात रखीं। 

सेमिनार की अध्यक्षता हाजी सय्यद सलमान चिश्ती – गद्दी नशीन दरगाह अजमेर शरीफ और चेयरमैन चिश्ती फाउंडेशन ने की । 

सेमिनार के पहले दिन तीन सेशन में कार्यक्रम हुआ ,पहले भाग में अतिथि विशेष के रूप में उपस्थित हुए ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती, उर्दू,अरबी फ़ारसी यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रोफेसर खान मसूद ने कहा की सूफियाना विचार को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। इस बेचैन दुनिया को तसौउफ़ का जाम पिलाना ज़रूरी है। 

फखरुद्दीन अली अहमद मेमोरियल कमिटी के चेयरमैन प्रोफेसर आरिफ अइय्यूबी ने कहा की तसौउफ़ की परंपरा बहुत ही पुरानी है। उन्होंने कहा की सूफियाना इस्तेलाहों के विषय पर साहित्य में बहुत कुछ लिखा गया। मगर अब तसौउफ़ को समाज से क़रीब करने की अत्यन्तं आवश्यकता है। अंजुमन ए तरक़्क़ी उर्दू,हिंद के जनरल सेक्रेटरी डॉक्टर अतहर फ़ारूक़ी ने अपने संबोधन में कहा की तसौउफ़ को बहुत ही सुलझे हुए अंदाज़ में पेश नहीं किया गया है। अगर हम तसौउफ़ के सिद्धांतों पर चलने लगें तो विश्व में और खास तौर से अपने देश में एक दूसरे के साथ अच्छे संबंध बन सकते हैं। 

इंग्लिश एंड फॉरेन लैंग्वेजेज हैदराबाद से आए प्रोफेसर मुज़फ्फर आलम ने कहा की तसौउफ़ का उर्दू ,फ़ारसी और अरबी साहित्य से गहरा संबंध है। क्योंकि तसौउफ़ की परंपरा को समझने के लिए इन तीनों भाषा पर विचार विमर्श करना जरुरी है। उन्होंने तसौउफ़ के एतिहासिक पहलु पर बहुत ही अच्छे अंदाज़ में विवरण पेश किया। इस अवसर पर प्रोफेसर सैयद अख्तर हुसैन (अध्यक्ष ,इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडो पर्शियन स्टडीज )ने कहा की निष्पक्षता और स्वार्थ के इस समय में तसौउफ़ के बिना समाज में शांति और सुरक्षा का वातावरण पैदा करना बहुत ही कठिन है। लेकिन अगर हम तसौउफ़ की मदद लेंगे तो यह काम बहुत आसान हो सकता है। 

वहीं भारत की तरफ से उर्दू साहित्य की दुनिया भर में प्रतिनिधित्व करने वाले प्रोफेसर ख्वाजा मोहम्मद इकरामुद्दीन ने वर्ल्ड उर्दू असोसिएशन के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा की साहित्य और संस्कृति को बढ़ावा देने और विदेशी साहित्य से लाभ उठाने के लिए ज़रूरी है की हम विश्व स्तर पर काम करें। एकजुट हो कर साहित्य को बढ़ावा दें। क्योंकि वैश्वीकरण के इस दौर में साहित्य को समझना ज़रूरी है। उन्होंने कहा की अगले कुछ महीनों में वर्ल्ड उर्दू असोसिएशन के बैनर से देश ,विदेश में सेमिनार का आयोजन किया जाएगा। साहित्य में रूचि रखने वाले लोग कुछ शर्तों के साथ इनमे शामिल हो सकते हैं। 

बता दें की पहले दिन के पहले कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर एस खान ने किया। जबकि सेमिनार के दूसरे भाग का संचालन महविश नूर ने की। इस सेशन में तीन मकाले पेश किये गए। प्रोग्राम की अध्य्क्षता प्रोफेसर अख्तर हुसैन (अध्यक्ष ,इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडो पर्शियन स्टडीज) ने की। पहले दिन के तीसरे सेशन में पांच रिसर्च स्कॉलर ने अपना अपना मकाला पेश किया। जिसमे डॉक्टर मुश्ताक़ अंजुम (अरबी विभाग ,डिग्री कॉलेज बारहमुला ,कश्मीर) के मकाले की खूब प्रशंसा हुई।प्रोफेसर अलीम अशरफ, प्रोफेसर आरिफ अइय्यूबी और डॉक्टर सामीउर्रहमान ने इस प्रोग्राम में शिरकत की। 

इम्तियाज़ रूमी ने इस प्रोग्राम का संचालन किया। 

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Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

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October 7, 2018 4 min read
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