“माँ’’ जीवन का सर्वोत्तम विश्वविद्यालय – स्वामी चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेश, 14 मई; परमार्थ निकेतन में मातृ दिवस के अवसर पर सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री, केंद्रीय परिवहन राज्य मंत्री, रसायन और उर्वरक राज्यमंत्री श्री मनसुख लक्ष्मणभाई मंडविया, श्रीमती गीता बेन एम मंडविया, बच्चे पवन और दीशा, शहरी विकास मंत्री श्री मदन कौशिक जी, नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती शकुन्तला राजपूत पधारे. उन्होने परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज से भेंट कर आशीर्वाद लिया.
केंद्रीय परिवहन मंत्री एवं शहरी विकास मंत्री से चर्चा के दौरान स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने सड़कों के दोनों ओर छायादार एवं फलदार पौधों के रोपण पर जोर देने की बात कही. उन्होने कहा कि पृथ्वी माता की रक्षा हेतु अधिक से अधिक वृक्षारोपण किया जाना चाहिये और जनसमुदाय को भी इस हेतु प्रेरित करना होगा. स्वामी जी महाराज ने मातृ दिवस के अवसर पर जननी और जन्मभूमि को याद कर प्रकृति और पृथ्वी माता को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त करने का संकल्प कराया तथा पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा माननीय मंत्री जी को भेंट किया.
स्वामी जी महाराज से चर्चा के दौरान श्री मनसुख भाई मंडविया जी ने बताया कि वे सपरिवार चारधाम की यात्रा कर माँ गंगा की कृपा से सकुशल लौटे है. मंडविया परिवार पूर्ण रूप भारतीय संस्कृति और संस्कारों से युक्त है, उनके बच्चों ने होटल में आरामदेय रूप से ठहरने के स्थान पर माँ गंगा का तट पर स्थित परमार्थ निकेतन में रूकने का निर्णय लिया. मंत्री जी ने बताया की बच्चों को सादा जीवन उच्च विचार के संस्कारों के साथ पोषित किया जा रहा है. वे अपने स्कूल भी आम नागरिकों के बच्चों की तरह स्कूल बस से जाते है. स्वामी जी ने कहा कि आज भी भारतीय परिवारों में सद्भाव, समरसता और वसुधैव कुटुम्बकम के संस्कार विद्यमान है तथा हर भारतीय को भारतीय संस्कृति और संस्कारों का रोपण बच्चों में करना चाहिये इससे हमारे वैदिक संस्कार वर्तमान पीढ़ी में भी रोपित होंगे.
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने मातृ दिवस पर दिये अपने संदेश में कहा, “ प्रकृति की रक्षा के लिये स्वंय की प्रकृति और प्रवृति को बदले क्योकि प्रकृति में हरियाली रहेगी तभी मानव के जीवन में खुशहाली होगी. उन्होने कहा कि अपने-अपने आराध्य की देव भक्ति करे परन्तु देश भक्ति सर्वोपरि हो.” स्वामी जी महाराज ने मातृ दिवस के शुभअवसर पर सभी माताओं को नमन करते हुये कहा कि पृथ्वी पर जो भी अस्तित्व दिखाई पड़ रहा है उसके पीछे माँ की सृजन शक्ति विद्यमान है. मां जीवन का सर्वोत्तम विश्वविद्यालय है. उन्होने कहा कि बेटियाँ होगी तो माँ होगी और माँ, होगी तभी बेटियाँ भी होगी और भावी पीढ़ियां होगी अतः बेटियों को दुनिया में आने दे और उन्हे सुरक्षित माहौल प्रदान करे.
स्वामी जी ने कहा कि हमारी धरती एक है तो धरती पर रहने वाले सभी धरतीपुत्र है, एक ही परिवार और एक ही कुन्बे के वासी है. इस अवसर पर भारत के यश्स्वी और ऊर्जावान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा बेटियों एवं नारी शक्ति को सबल बनाने के लिये किये जा रहे प्रयासों की सराहना की. स्वामी जी ने कहा कि आज भारत को मोदी जी जैसे व्यक्तित्व की आवश्यकता है.
मातृ दिवस के अवसर पर सभी विशिष्ट अतिथियों ने भारत की सभी माताओं का अभिनन्दन किया तथा बेटियों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करने का संकल्प लिया.
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