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साधना से नीति, नियति व निमित्त में सुधार संभव: डॉ.पण्ड्या

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साधना से नीति, नियति व निमित्त में सुधार संभव: डॉ.पण्ड्या

साधना से नीति, नियति व निमित्त में सुधार संभव: डॉ.पण्ड्या

हरिद्वार, 21 मार्च; देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के मृत्युंजय सभागार में युवाओं को संबोधित करते हुए कुलाधिपति डॉ.प्रणव पण्ड्या ने कहा कि साधना संकट से बचने की शक्ति देती है. ऐसी साधना जो सबल गुरु के मार्गदर्शन में अपने.इष्ट दैवी शक्ति की हो. इससे कई प्रकार की कष्ट.कठिनाइयों से लड़ने की आंतरिक शक्ति का विकास होता है.

डॉ.पण्ड्या नवरात्र साधना में जुटे देसंविवि के सैकड़ों युवाओंए शांतिकुंजए ब्रह्मवर्चस शोध संस्थान एवं देश.विदेश से आये सैकड़ों साधकों का मार्गदर्शन कर रहे थे. रामचरित मानस का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि साधना से आत्मनियंत्रणए बुराइयों का दमन व क्रोध से विजय प्राप्त करने की शक्ति का जागरण होता है. आत्मनियंत्रण वाला मनुष्य सबसे साहसी होता है और सफलता की सीढ़ी चढ़ता है. रामचरितमानस के अयोध्या कांड का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्य का दुर्भाग्य उसके दुर्बलताओं के कारण आता हैए जबकि साधना उसका सौभाग्य का द्वार खोलता है. उन्होंने गीताए रामायण से लेकर आधुनिक काल के विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से साधना के फल व क्रोध से होने वाले नुकसानों की विस्तृत जानकारी दी.

कुलाधिपति डॉ.पण्ड्या ने नीतिए नियति व निमित्त पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य जो भी कार्य जीवन भर करता हैए वह उसकी नीति होती है. नियति वह शक्ति हैए जिससे सारा संसार और सारा प्राकृतिक जीवन सुचारू रूप से चलता है. नियति ही मनुष्य के कर्मों का लेखा जोखा रखती है. निमित्त वह शक्ति है जो मनुष्य को उसके कर्मों के हिसाब से फल प्रदान करती है. अपने कई दशकों का अनुभव बाँटते हुए कुलाधिपति ने कहा कि साधना से व्यक्ति नीति को समय से बदल सकता है तथा उसको सुधारकर उसे उत्तम बना सकता हैए अपनी नियति और निमित्त को भी बदल सकता है. इस अवसर पर देसंविविए शांतिकुंज व ब्रह्मवर्चस शोध परिवार के अलावा देश.विदेश से आये सैकड़ों साधक उपस्थित रहे.

RW

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March 22, 2018 2 min read
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