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छत्तीसगढ़ में राजिम कुंभ का आगाज : नदी संरक्षण और स्वच्छता की मिसाल होगी पेश

छत्तीसगढ़ में राजिम कुंभ का आगाज : नदी संरक्षण और स्वच्छता की मिसाल होगी पेश

छत्तीसगढ़ में राजिम कुंभ का आगाज : नदी संरक्षण और स्वच्छता की मिसाल होगी पेश
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छत्तीसगढ़ में राजिम कुंभ का आगाज : नदी संरक्षण और स्वच्छता की मिसाल होगी पेश

छत्तीसगढ़ में राजिम कुंभ का आगाज : नदी संरक्षण और स्वच्छता की मिसाल होगी पेश 

भारत की धार्मिक संस्कृति होगी साकार छत्तीसगढ़ के राजिम में माघ पूर्णिमा पर पुण्य स्नान के साथ राजिम मेले की भव्य शुरुआत हो गई है। राजिम कुंभ कल्प मेले के उद्घाटन के दौरान अग्नि पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर ब्रह्मऋषि रामकृष्णानंद महाराज, महामंडलेश्वर प्रेमानंद और आचार्य महंत जालेश्वर महाराज समेत कई प्रमुख साधु-संत मौजूद रहे। पैरी, सोंढुर और महानदी के संगम स्थल राजिम को त्रिवेणी संगम भी कहा जाता है जहां पिछले कई सालों से इस कुंभ का आयोजन हो रहा है।

ऐतिहासिक होगा राजिम कुंभ

13 फरवरी महाशिवरात्रि तक चलने वाला राजिम कुंभ इस बार ऐतिहासिक होगा। मेले में इस बार कई खास पहल की जा रही हैं। 03 फरवरी को नदी मैराथन- राजिम कुंभ में इस बार नदी संरक्षण और स्वच्छता की मिसाल पेश की जाएगी। इसके तहत 3 फरवरी को नदी मैराथन का आयोजन किया जाएगा। मैराथन में स्थानीय लोगों के साथ ही आस-पास के ग्रामीण और युवा भी शामिल होंगे और नदियों के संरक्षण और स्वच्छता का संकल्प लेंगे।

07 फरवरी को संत समागम

राजिम कुंभ में 7 फरवरी को होने वाले संत समागम में शंकराचार्य स्वरूपानंद जी महाराज समेत देशभर के कई प्रमुख साधु-संत, महंत और पीठाधीश्वर शामिल होंगे। विशाल संत सम्मेलन के दौरान ढाई लाख दिए प्रज्जवलित किए जाएंगे।

सामूहिक शंखनाद कार्यक्रम

राजिम कुंभ में इस बार सामूहिक शंखनाद कार्यक्रम भी रखा गया है जिसमें एक साथ 1500 शंखों के साथ ध्वनि नाद किया जाएगा। राजिम कुंभ में भारत की धार्मिक, आध्यात्मिक मान्यताओं के साथ ही योग, तप, आराधना और शक्ति का मूर्त अहसास देखने को मिल रहा है। त्रिवेणी संगम के तटों पर रेत में साधुओं को धूनि रमाकर तपस्या करते बेहद खास अनुभूति है।

राजिम कुंभ के इस 13वें आयोजन में बनारस और हरिद्वार की गंगा आरती जैसा भव्य नजारा भी देखने को मिलेगा वहीं धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों की झलकियां भी रोमांचित करेंगी। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्थित राजिम भगवान राजीव लोचन जी के मंदिर के लिए भी जाना जाता है। यहां कुलेश्वर महादेव मंदिर भी विशेष आस्था का केंद्र है।

राजिम कुंभ में हर साल लाखों श्रद्धालु और साधु-संत त्रिवेणी में डुबकी लगाते हैं। भारतीय आस्था, श्रद्धा और संस्कृति का यह भव्य समागम धार्मिक पर्यटन का भी बड़ा अवसर होता है। राजिम कुंभ महान साधु-संतों का आशीर्वाद, धार्मिक-आध्यात्मिक ज्ञान और मार्गदर्शन हासिल करने का बेहद खास मौका होता है।

RW

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By Religion World February 1, 2018 2 min read
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