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आचार्य विशुद्धसागर सहित 30 संतों ने किया पिच्छी परिवर्तन, सैकड़ों भक्त हुए शामिल

आचार्य विशुद्धसागर सहित 30 संतों ने किया पिच्छी परिवर्तन, सैकड़ों भक्त हुए शामिल

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आचार्य विशुद्धसागर सहित 30 संतों ने किया पिच्छी परिवर्तन, सैकड़ों भक्त हुए शामिल

आचार्य विशुद्धसागर सहित 30 संतों ने किया पिच्छी परिवर्तन, सैकड़ों भक्त हुए शामिल

इंदौर, 23 अक्टूबर;  जैन धर्म में व्यक्ति की नहीं पद की पूजा होती है. पंथ, ग्रंथ और संत नहीं, सिर्फ दिगंबर मुद्रा देखो और नतमस्तक हो जाओ. दिगंबर मुद्रा से ही दिगंबर धर्म और संस्कृति की पहचान है.
यह बात आचार्य विशुद्ध सागर महाराज ने बास्केटबॉल कॉम्प्लेक्स में रविवार को आयोजित पिच्छिका परिवर्तन समारोह में कही. वे यहां देश के प्रत्येक राज्य से आए श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा- अहिंसा की रक्षा के लिए दिगंबर मुनि, मयूर पिच्छिका स्वीकार करते हैं.

यह भी पढ़ें-जैन दिगंबर मुनि नग्न क्यूँ रहते हैं? Why don’t Digambar monks wear clothes?

क्या होती है पिच्छिका

पिच्छिका धागे, ऊन या वस्त्र से बनी होगी तो उसे धोना पड़ेगा. मयूर पंख धूल, पसीने आदि को स्वीकार नहीं करते हैं. कोमल और हलके होते हैं इसीलिए दिगंबर साधु षटकाय के जीवों की रक्षा के लिए मयूर पिच्छिका धारण करते हैं. जब बिटिया घर से विदा होती है तो उसे भेंट दी जाती है. इस पर उन्होंने कहा- जैन दर्शन में मठ परंपरा नहीं है, इसलिए साधु वर्ष में आठ मास विहार करते हैं और चार मास वर्षा काल में सूक्ष्म जीवों की रक्षार्थ चातुर्मास करते हैं.

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10-10 श्रद्धालुओं के समूह ने भेंट की पिच्छी 

प्रचार प्रमुख संजीव जैन ने बताया इसके पूर्व समारोह में त्याग और संयम की कठिन साधना को अंगीकार कर पिच्छिका देने और लेने वाले बड़ी संख्या में मौजूद थे. ऐसे में 10-10 श्रद्धालुओं के समूह से एक-एक साधु की पिच्छिका आचार्य को भेंट करवाई गई. फिर आचार्य ने अपने हाथों से प्रत्येक साधु को पिच्छी दी. कार्यक्रम के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने आशीर्वाद लिया और एक भजन भी गाया. संचालन अजीत जैन और टीके वैद ने किया. कार्यक्रम में सैकड़ों समाजजन मौजूद थे.
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October 23, 2017 2 min read
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