प्रेमानंद जी महाराज और जैन आचार्य लोकेश की वृंदावन में भेंट, विश्व शांति पर चर्चा
प्रेमानंद जी महाराज और जैन आचार्य लोकेश की वृंदावन में हुई मुलाकात में विश्व शांति, अहिंसा, शांति शिक्षा और युवा पीढ़ी के आध्यात्मिक विकास पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई।
प्रेमानंद जी महाराज और जैन आचार्य लोकेश की वृंदावन में हुई मुलाकात में विश्व शांति, अहिंसा, शांति शिक्षा और युवा पीढ़ी के आध्यात्मिक विकास पर महत्वपूर्ण चर्चा हुई।
Between good karma, bad karma, right karma, wrong karma, so many new behaviors and old thresholds have entered our lives that even after crossing them, we still fail to understand the happiness and sorrow unfolding in our own existence
भूमिका मानव इतिहास में ईश्वर की अवधारणा हमेशा जिज्ञासा, विश्वास और अनुभव से जुड़ी रही है। कुछ लोग ईश्वर को मंदिरों, मस्जिदों या धार्मिक ग्रंथों में खोजते हैं, जबकि कुछ उसे अपने भीतर अनुभव करने की बात करते हैं। ऐसे में एक स्वाभाविक प्रश्न उठता है— क्या ईश्वर को वास्तव में महसूस किया जा सकता है, या यह केवल विश्वास की बात है? इस प्रश्न का उत्तर तर्क से अधिक अनुभव और चेतना से जुड़ा […]
The evolution of the concept of God is one of the most profound and enduring developments in human history. Across civilizations, cultures, and ages, human beings have tried to understand powers greater than themselves. The concept of God did not appear suddenly. Instead, it developed gradually as people tried to explain nature, suffering, morality, life, death, and the purpose of existence. Understanding the evolution of the concept of God helps us understand humanity itself—its fears, […]
भूमिका धर्म को लेकर समाज में अक्सर दो तरह की धारणाएँ देखने को मिलती हैं। कुछ लोग मानते हैं कि धर्म डर पैदा करता है—ईश्वर का भय, पाप का डर और दंड की आशंका। वहीं दूसरी ओर बहुत से लोगों के लिए धर्म आशा, विश्वास और संबल का स्रोत है। ऐसे में प्रश्न उठता है— क्या धर्म वास्तव में डर सिखाता है या आशा देता है? इस प्रश्न का उत्तर धर्म की सही समझ और […]
भूमिका आज की व्यस्त और प्रतिस्पर्धा से भरी दुनिया में हर व्यक्ति संतुलित जीवन की तलाश में है। काम का दबाव, पारिवारिक ज़िम्मेदारियाँ, सामाजिक अपेक्षाएँ और भविष्य की चिंताएँ—इन सबके बीच मन अक्सर अस्थिर हो जाता है। ऐसे समय में ध्यान को मानसिक संतुलन का एक प्रभावी साधन माना जाता है। लेकिन एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह भी उठता है— क्या बिना ध्यान के भी जीवन संतुलित हो सकता है? इस प्रश्न का उत्तर सीधा “हाँ” […]
Introduction In today’s fast-paced and stress-filled world, meditation has become a popular practice for achieving inner peace, mental clarity, and emotional balance. People from different cultures and backgrounds practice meditation, often without associating it with any particular faith. This raises an important question: Is meditation connected to religion, or is it purely a mental and spiritual exercise? The answer lies in understanding the roots of meditation and its evolution across time. Is Meditation Connected to […]
भूमिका आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में मनुष्य बाहरी सुविधाओं से तो घिरा हुआ है, लेकिन भीतर से वह बेचैन, तनावग्रस्त और अशांत होता जा रहा है। धन, पद और भौतिक सुख होने के बावजूद भी मन को शांति नहीं मिलती। ऐसे समय में एक प्रश्न बार-बार सामने आता है— क्या धर्म मानसिक शांति दे सकता है? और यदि हाँ, तो धर्म और मानसिक शांति का आपस में क्या संबंध है? वास्तव में धर्म केवल […]
धर्म केवल पूजा-पाठ, अनुष्ठान और बाहरी रीति-रिवाजों तक सीमित नहीं है। सच्चा धार्मिक व्यक्ति वह होता है जो अपने व्यवहार, सोच और जीवन मूल्यों में धर्म के मूल सिद्धांतों को अपनाता है। वह केवल शब्दों में नहीं बल्कि क्रियाओं और कर्मों में धर्म का पालन करता है। आज के समय में जहां धर्म का स्वरूप केवल दिखावे या परंपरा तक सीमित समझा जाता है, यह जानना महत्वपूर्ण है कि सच्चा धार्मिक व्यक्ति वास्तव में कैसा […]
Spirituality is the journey of self-realization, inner peace, and connection with the higher truth. It emphasizes humility, selflessness, compassion, and detachment from material desires. Ego, on the other hand, is rooted in pride, selfishness, and attachment to one’s identity, achievements, and possessions. The inherent conflict between ego and spirituality raises an important question: Why do ego and spirituality not go hand in hand? Understanding this relationship is essential for anyone seeking inner growth and meaningful […]
धर्म केवल पूजा-पाठ और अनुष्ठानों का समूह नहीं है। यह इंसान के व्यक्तित्व, व्यवहार और जीवन मूल्यों को आकार देने का एक मार्ग है। विनम्रता, यानी अहंकार और घमंड से मुक्त होना, धर्म की सबसे महत्वपूर्ण शिक्षाओं में शामिल है। सवाल उठता है कि क्या धर्म वास्तव में इंसान को विनम्र बनाता है? इतिहास, धार्मिक ग्रंथ और संतों के जीवन से स्पष्ट होता है कि धर्म का असली उद्देश्य व्यक्ति के अंदर नम्रता, करुणा और […]
सेवा, या सेवा भाव, धर्म और आध्यात्म का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह न केवल दूसरों की मदद करने का कार्य है बल्कि व्यक्ति के आत्मिक और नैतिक विकास का भी साधन है। परंतु बिना किसी अपेक्षा या स्वार्थ के सेवा करना हर व्यक्ति के लिए आसान नहीं होता। आधुनिक जीवन की व्यस्तता, मानसिक तनाव और व्यक्तिगत लालसाएँ अक्सर इस सरल सिद्धांत को जटिल बना देती हैं। आइए समझते हैं कि बिना अपेक्षा सेवा करना […]