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इस्लामिक बैंकिंग, जहां बिना ब्याज मिलता है पैसा

इस्लामिक बैंकिंग, जहां बिना ब्याज मिलता है पैसा

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इस्लामिक बैंकिंग, जहां बिना ब्याज मिलता है पैसा

इस्लामिक बैंकिंग, जहां बिना ब्याज मिलता है पैसा

भारतीय रिजर्व बैंक ने देश में इस्लामिक बैंक खोलने की इजाजत देने से इनकार कर दिया है. आरबीआई के अनुसार सभी नागरिकों को वित्तीय और बैंकिंग सेवाओं के समान अवसर की सुलभता को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है. आइए जानते हैं क्या है इस्लामिक बैंक और यह किस तरह काम करता है…

क्या है इस्लामिक बैंक
यह बैंक इस्लामिक यानि शरिया के सिद्धांतों पर काम करता है और इस बैंकिंग को इस्लामिक बैंकिंग कहते हैं. मलेशिया से शुरू हुई इस बैंकिंग की खास बात ये है कि इनमें ग्राहकों से किसी तरह का ब्याज नहीं लिया जाता है और ना ही ब्याज दिया जाता है.अगर किसी सामान पर इस्लामी बैंक से फाइनैंस कराया जाता है तो बैंक इस पर ब्याज नहीं लेता है. वहीं एक लाख रुपये की चीज को वो एक लाख बीस हजार में देंगे और इस बढ़ी हुई कीमत को वो अपना मुनाफा मानते हैं. इसके लिए बैंक पहले सामान खरीद लेता है और फिर बैंक के ग्राहक को सामान बेच देता है.

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क्यों नहीं लिया जाता ब्याज
इस बैंक की ओर से ब्याज ना लेने की वजह ये है कि इस्लाम में ब्याज लेना हराम माना जाता है. इस्लामिक बैंकिंग का कॉन्सेप्ट इस्लाम के बुनियादी उसूल इंसाफ और सामाजिक न्याय पर आधारित है.बता दें कि दुनिया में ऐसे बैंक करीब 50 देश हैं और यहां लगभग 300 से अधिक संस्थाएं ऐसी बैंकिग का काम करती है. इस्लामिक बैंक के कर्ज की खास बात यह है कि यदि आप समय से अपनी पूरी ईएमआई का भुगतान कर देतें हैं तो बैंक आपको अपने मुनाफे से कुछ राशि निकालकर बतौर इनाम दे देगा.

एक ट्रस्ट की तरह है इस्लामिक बैंक
इस्लामिक बैंकिंग में बैंक एक ट्रस्ट का काम करता है. इसमें सेविंग्स बैंक अकाउंट पर ब्याज नहीं दिया जाता लेकिन जब आपके अकाउंट में पड़े पैसे के इस्तेमाल से फायदा होता है तो आपको उपहारों के रूप में बैंक कुछ ना कुछ देता है.वहीं अगर कोई कर्ज लेता है तो उसे सिर्फ मूल रकम ही जमा करनी होती है और बैंक कोई ब्याज नहीं वसूलता है. जबकि साधारण बैंकों में मोटा ब्याज लिया जाता है और किश्त ना देने पर ब्याज बढ़ा भी दिया जाता है.फिक्स्ड इनकम और ब्याज देने वाली सिक्यॉरिटीज, मसलन बॉन्ड्स, डिबेंचर्स आदि की इस्लाम में अनुमति नहीं है. इस्लामिक बैंकिंग का मूल मकसद शरिया के सिद्धातों के मुताबिक ज्यादा से ज्यादा लाभ कमाना है.

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बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अप्रैल में यूएई दौरे के दौरान भारत के एक्सिम बैंक ने आईडीबी के साथ एमओयू साइन किया था. जिसके बाद से कहा जा रहा था कि जेद्दा (सऊदी अरब) का इस्लामिक डिवेलपमेंट बैंक (आईडीबी) भारत में गुजरात में अपनी पहली भारतीय ब्रांच खोलेगा. हालांकि अब आरबीआई ने ऐसा करने से मना कर दिया है. खबरें आई थी कि इसके लिए 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर का करार हुआ है.

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November 13, 2017 3 min read
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