जब बात वैलेंटाइन डे की हो तो हमें हिन्दू धर्म ग्रंथों में बताये गए काम और प्रेम के देवता कामदेव को नहीं भूलना चाहिए. जिस तरह पश्चिमी देशों में क्यूपिड और यूनानी देशों में इरोस को प्रेम का प्रतीक माना जाता है, उसी तरह हिन्दू धर्मग्रंथों में कामदेव को प्रेम और आकर्षण का देवता कहा जाता है । इनकी पत्नी का नाम रति है। ये इतने शक्तिशाली हैं कि उनके लिए किसी प्रकार के कवच की कल्पना नहीं की गई है।
पौराणिक काल की कई कहानियों में कामदेव का उल्लेख मिलता है। जितनी भी कहानियों में कामदेव के बारे में जहां कहीं भी उल्लेख हुआ है, उन्हें पढ़कर एक बात जो समझ में आती है वह यह कि कि कामदेव का संबंध प्रेम और कामेच्छा से है। लेकिन असल में कामदेव हैं कौन? क्या वह एक काल्पनिक भाव है जो देव और ऋषियों को सताता रहता था या कि वह भी किसी देवता की तरह एक देवता थे? तो आइये जानते हैं कामदेव के बारे में –
सर्वप्रथम उत्पत्ति
वेदों के अनुसार कामदेव की उत्पत्ति सर्वप्रथम हुई, यह विश्वविजयी भी हैं-
कामो जज्ञे प्रथमो नैनं देवा आपु: पितरो न मत्र्या:।
ततस्त्वमसि ज्यायान् विश्वहा महांस्तस्मैते काम।
अथर्ववेद- 9/2/19
अर्थ- कामदेव सर्वप्रथम उत्पन्न हुआ। जिसे देव, पितर और मनुष्य न पा सके। इसलिए काम सबसे बड़ा विश्वविजयी है।
ऐसा है कामदेव का स्वरूप

कामदेव सौंदर्य की मूर्ति हैं। उनका शरीर सुंदर है, वे गन्ने से बना धनुष धारण करते हैं। पांच पुष्पबाण ही उनके हथियार हैं। भगवान शिव पर भी कामदेव ने पुष्पबाण चलाया था। इन बाणों के नाम हैं- नीलकमल, मल्लिका, आम्रमौर, चम्पक और शिरीष कुसम। ये तोते के रथ पर मकर अर्थात मछली के चिह्न से अंकित लाल ध्वजा लगाकर विचरण करते हैं।
ब्रह्मा के हृदय से जन्म
श्रीमद्भागवत के अनुसार, सृष्टि में कामदेव का जन्म सबसे पहले धर्म की पत्नी श्रद्धा से हुआ था। देवजगत में ये ब्रह्मा के संकल्प पुत्र माने जाते हैं। ऐसा कहते हैं कि ये ब्रह्मा के हृदय से उत्पन्न हुए थे-
हृदि कामो भ्रुव: क्रोधो लोभश्चाधरदच्छदात।
श्रीमद्भागवत-3/12/26
अर्थ- ब्रह्मा के हृदय से काम, भौंहों से क्रोध और नीचे के होंठ से लोभ उत्पन्न हुआ।
ये हैं कामदेव के अन्य नाम
कामदेव के अनेक नाम हैं जैसे- कंदर्प, काम, मदन, प्रद्युम्न, रतिपति, मदन, मन्मथ, मीनकेतन, कमरध्वज, मधुदीप, दर्पका, अनंग
देवताओं के लिए दिया बलिदान

कामदेव का तन जितना सुंदर है, मन भी उतना ही सुंदर है। मन की सुंदरता का प्रमाण है देवताओं के लिए बलिदान। देवताओं पर जब संकट आया तो कामदेव ने अपने आप को दांव पर लगा दिया। पौराणिक कथा के अनुसार, तारकासुर के अत्याचारों से परेशान देवता ब्रह्माजी के पास गए। ब्रह्माजी ने बताया कि महादेव के औरस से कार्तिकेय उत्पन्न होंगे तब वे ही देवसेनापति होकर तारकासुर का वध करेंगे। शिव उस समय समाधि में थे। उनकी समाधि भंग करने की हिम्मत किसी में नहीं थी। देवताओं ने कामदेव से प्रार्थना की। कामदेव तैयार हो गए, देवताओं की मदद के लिए जान की बाजी लगाने से वे पीछे नहीं हटे। कामदेव को पता था कि जो काम वे करने जा रहे हैं उसमें प्राणों का संकट है, लेकिन देवताओं की भलाई के लिए उन्होंने यह कठिन काम किया। शिव की समाधि भंग हुई और उनके तीसरे नेत्र से कामदेव के अंग भस्म हो गए। तभी से कामदेव अनंग नाम से प्रसिद्ध हुए।
विभिन्न धर्मग्रंथों में इसका उल्लेख है-
सौरभ पल्लव मदनु बिलोका। भयउ कोपु कंपेउ त्रैलोका॥
तब सिवं तीसर नयन उघारा। चितवत कामु भयउ जरि छारा॥
श्रीरामचरितमानस 1/87/3
अर्थ- कामदेव द्वारा छोड़े गए पुष्पबाण से समाधि भंग होने के बाद भगवान शिव ने आम के पत्तों में छिपे हुए कामदेव को देखा तो बड़ा क्रोध हुआ, जिससे तीनों लोक कांप उठे। तब शिवजी ने तीसरा नेत्र खोला, उनके देखते ही कामदेव जलकर भस्म हो गए।
यह भी पढ़ें-वैलेंटाइन डे: जानिए लव कम्पेटिबिलिटी राशियों के आधार पर
श्रीकृष्ण के पुत्र के रूप में जन्म
कहते हैं कि कामदेव भगवान विष्णु के अंश से ही उत्पन्न हुए थे। द्वापर काल में कामदेव ने ही भगवान श्रीकृष्ण के यहां रुक्मिणी के पुत्र प्रद्युम्न के रूप में जन्म लिया था।
कामस्तु वासुदेवांशो दग्ध: प्राग् रुद्रमन्युना।
स एव जातो वैदभ्र्यां कृष्णवीर्यसमुद्भव:।
प्रद्युम्र इति विख्यात: सर्वतोनवम: पितु: ॥
श्रीमद्भागवत- 10/55/1-2
अर्थ- कामदेव भगवान वासुदेव के ही अंश हैं। वे ही भगवान श्रीकृष्ण की पत्नी रुक्मणी के गर्भ से उत्पन्न हुए और प्रद्युम्न नाम से प्रसिद्ध हुए। ऐसा भी कहा जाता है कि उनका रूप इतना सुंदर था कि जो स्त्रियां उनकी ओर देखतीं, उनके मन में श्रंगार रस उत्पन्न हो जाता था।
पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण को भी कामदेव ने अपने नियंत्रण में लाने का प्रयास किया था। कामदेव ने भगवान श्रीकृष्ण से यह शर्त लगाई कि वे उन्हें भी स्वर्ग की अप्सराओं से भी सुंदर गोपियों के प्रति आसक्त कर देंगे। श्रीकृष्ण ने कामदेव की सभी शर्त स्वीकार की और गोपियों संग रास भी रचाया लेकिन फिर भी उनके मन के भीतर एक भी क्षण के लिए वासना ने घर नहीं किया।Editorial Review Note
Religion World provides information on all religions and presents it impartially. You can send us information, news, updates, opinions, and suggestions at religionworldin@gmail.com. You can also follow us on X (Twitter), Facebook, and YouTube.