स्वामी विवेकानंद अंधविश्वास के खिलाफ थे, फिर मूर्ति-पूजा को क्यों सही ठहराया?

स्वामी विवेकानंद अंधविश्वास के खिलाफ थे, फिर मूर्ति-पूजा को क्यों सही ठहराया?

स्वामी विवेकानंद अंधविश्वास के खिलाफ थे, फिर मूर्ति-पूजा को क्यों सही ठहराया? स्वामी विवेकानंद का नाम आते ही एक ऐसे व्यक्तित्व की छवि बनती है जो तर्क, विवेक और आध्यात्मिकता को एक साथ जोड़ते थे। वे अंधविश्वास, रूढ़ियों और बिना सोचे-समझे अनुसरण करने वाली आस्था के कट्टर विरोधी थे। लेकिन यही विवेकानंद मूर्ति-पूजा को न केवल स्वीकारते थे, बल्कि उसके आध्यात्मिक महत्व को भी समझाते थे। यह विरोधाभास केवल सतही रूप से दिखाई देता है; […]

 November 28, 2025
आस्था, विश्वास और अन्धविश्वास – डॉ. प्रणव पण्ड्या

आस्था, विश्वास और अन्धविश्वास – डॉ. प्रणव पण्ड्या

आस्था, विश्वास और अन्धविश्वास – डॉ. प्रणव पण्ड्या, आध्यात्मिक प्रमुख, गायत्री परिवार  आज सुबह की स्वर्णिम किरणों ने अपने कोमल स्पर्श के साथ-साथ एक उत्सुकताभरी जिज्ञासा का भी स्पर्श कराया कि आस्था, विश्वास और अंधविश्वास के बीच की बारीक रेखा क्या है? इन्हें कैसे परिभाषित किया जाए? यह स्पर्श, जिसकी अनुभूति हरेक के लिए प्रेरणाप्रद है तथा जिसकी भित्ति-भूमि में समूची भारतीय संस्कृति की भव्य अमारत टीकी हुई है, वास्तव में एक महत्त्वपूर्ण व्यापक समाधान […]

 September 3, 2017