साधु ही डेरा बनाएगा, तो मुक्ति कौन दिलाएगा…
साधु और डेरा (यह दुनिया रैन बसेरा, यहाँ नहीं किसी का डेरा) ‘साधु और डेरा’ आज कल हमारे देश में इस विषय पर खूब चर्चा चल रही है। वैसे इन दोनों शब्दों के भावार्थ का दूर-दूर तक संबंध नहीं बनता है; दोनों शब्द एक दूसरे के विरोधी हैं। “यह संसार नित्य परिवर्तन शील एवं चलायमान है”- ग्यानी ऋषियों के द्वारा ‘द्वैतवाद’ के सिद्धांत में भी प्रकृति को नित्य परिवर्तनशील ही परिभाषित किया गया है। ‘त्रैतवाद’ […]