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श्रावण विशेष: शिवजी से जुड़े इन रहस्यों को नहीं जानते होंगे आप

श्रावण विशेष: शिवजी से जुड़े इन रहस्यों को नहीं जानते होंगे आप

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श्रावण विशेष: शिवजी से जुड़े इन रहस्यों को नहीं जानते होंगे आप

श्रावण के इस पावन महीने  में हम आज आपको भगवान शंकर  से जुड़े वो रहस्य  बताएँगे जिनके बारे में शायद आप न जानते हो। आइए जानते हैं भगवान शिव से जुड़े रहस्य-



भगवान भोलेनाथ का विवाह राजा दक्ष की पुत्री सती से हुआ था। परंतु उनके पिता के द्वारा भगवान शिव का अपमान करने पर उन्होंने यज्ञकुंड में अपनी आहुति दे दी थी। उसके बाद उन्होंने पार्वती जी के रुप में राजा हिमालय के यहां जन्म लिया और माता पार्वती के साथ शिव जी का विवाह हुआ। कहा जाता है कि गंगा, काली और उमा भी भगवान शिव की ही पत्नियां थी।

भगवान शिव से विवाह के बाद दोनों की शक्ति से कार्तिकेय का जन्म हुआ था। गणेश जी माता पार्वती के पुत्र थे। वे माता के उबटन से जन्में थे।

भगवान शिव के तेज से जलंधर उत्पत्ति हुई थी। तो वहीं भूमा ने शिव जी के ललाट की पसीने की बूंद से जन्म लिया था। भगवान भोलेनाथ और मोहिनी के संयोग अय्यप्पा का जन्म हुआ था। भगवान भोलेनाथ के दो और पुत्र थे जिनका नाम अंधक और खुजा था। इन दोनों के बारे में कहीं पर ज्यादा उल्लेख नहीं किया गया है।

सप्तऋषियों को शिव का प्रारंभिक शिष्य कहा गया है। इन ऋषियों के द्वारा ही शिव के ज्ञान का प्रचार पूरे पृथ्वी लोक पर हुआ। कहा जाता है सर्वप्रथम शिव जी से ही गुरु और शिष्य के पवित्र रिश्तें की शुरुआत हुई थी। वशिष्ठ और अगस्त्य मुनि का नाम भी शिव के शिष्यों में लिया जाता है। सप्तऋषियों के अलावा गौरशिरस मुनि भी शिव के शिष्य थे।

भगवान शिव ने हर युग में भक्तों के दर्शन दिए हैं। सतयुग में समुद्र मंथन के समय भी शिव थे और उन्होंने समस्त सृष्टी के कल्याण के लिए विषपान किया था। त्रेता युग में भी राम के समय शिव थे। भगवान शिव द्वापर युग में महाभारत काल में भी थे। भविष्य पुराण में कहा गया है कि मरुभूमि पर राजा हर्षवर्धन को भगवान शिव ने दर्शन दिए थे। कलिकाल में विक्रमादित्य के काल में भी शिव के दर्शन होने का जिक्र मिलता है।

भगवान शिव असुर, दानव, राक्षस, गंधर्व, यक्ष, आदिवासी और सभी वनवासियों के आराध्य देव हैं। इसलिए शिव को पशुपति नाथ भी कहा जाता है। चंद्रवंश की शुरुआत भगवान शिव को कारण ही हुई थी तो वहीं सूर्यवंशी, खुद मनु थे। इसलिए चंद्रवंशी, सूर्यवंशी अग्निवंशी और नागवंशी आदि सभी को भी शिव की ही परंपरा का ही माना जाता है।

शैव धर्म शिव से संबंधित भारत के आदिवासियों का धर्म है। सभी दसनामी, शाक्त, सिद्ध, दिगंबर, नाथ, लिंगायत, तमिल शैव, कालमुख शैव, कश्मीरी शैव, वीरशैव, नाग, लकुलीश, पाशुपत, कापालिक, कालदमन और महेश्वर सभी शैव धर्म के ही संप्रदाय हैं इसलिए इन सभी के देवता भगवान शिव हैं।



ऐसा माना जाता है कि भगवान बुद्ध शिव जी ही का अवतार थे। पालि ग्रंथों में 27 बुद्धों का उल्लेख किया गया है। जिसमें बुद्ध के तीन  अतिप्राचीन नाम बताए गए हैं- बुद्ध के तीन नाम तणंकर, शणंकर और मेघंकर भी थे।

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July 9, 2020 3 min read
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