श्रावण मास की षष्ठी तिथि है। धर्म शास्त्रों में भगवान शिव के कई मंत्र बताए गए हैं। कहा जाता है कि इन मंत्रों के जाप से सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं। सावन माह में सोमवार के दिन का बहुत अधिक महत्व है। श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर शिवलिंग पर जलाभिषेक करते है।
वहीं सावन माह का पहला सोमवार भी 06 जुलाई को बीत चुका है। शिव भक्त अब सावन के दूसरे सोमवार का इंतजार कर रहे है। सावन माह का दूसरा सोमवार 13 जुलाई को है।
इस बार सावन माह की शुरूआत ही सोमवार के दिन से हुई है। वहीं, सावन माह की समाप्ति भी सोमवार के दिन ही होगी। सावन माह भगवान शिव की उपासना का माह माना जाता है। सावन माह में सोमवार के दिन को शिव भक्त बहुत ही महत्वपूर्ण मानते हैं।
धर्मशास्त्रों में ऐसी मान्यता है कि सावन माह में सोमवार का व्रत रखने से सभी तरह की मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।
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ये हैं शिव के प्रभावशाली मंत्र –
ओम साधो जातये नम:।।
ओम वाम देवाय नम:।।
ओम अघोराय नम:।।
ओम तत्पुरूषाय नम:।।
ओम ईशानाय नम:।।
ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।।
रूद्र गायत्री मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विदमहे, महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्र: प्रचोदयात्।।
महामृत्युंजय गायत्री मंत्र – ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्द्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः ॐ सः जूं हौं ॐ ॥
महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
भगवान शिव का मूल मंत्र
ऊँ नम: शिवाय।।
इस मंत्र का जाप करने से हर प्रकार की समस्या से छुटकारा मिलता है। सोमवार से शुरू और सोमवार को ही समाप्त होगा सावन इस बार वर्ष 2020 में सावन की शुरूआत 06 जुलाई दिन सोमवार को हुई और माह का अंतिम दिन भी सोमवार ही है। इस बार सावन माह में पांच सोमवार पड़ रहे हैं।
ऐसे करें सोमवार को पूजा
इस में सोमवार को ही नहीं वरन प्रतिदिन सुबह जल्दी उठें और स्नान करके साफ कपड़े पहनकर भगवान शिव की पूजा करें। पूजा के स्थान की अच्छी तरह साफ-सफाई करें, और वहां गंगाजल का छिड़काव करें।
आसपास के मंदिर में जाकर शिवलिंग पर जल व दूध का अभिषेक भी करें। इसके बाद भगवान शिव और शिवलिंग को चंदन का तिलक लगाएं।
इसके बाद भगवान शिव को सुपारी, पंच अमृत, नारियल, बेल पत्र, धतूरा, फल, फूल आदि अर्पित करें। और अब दीपक जलाएं और भगवान शिव का ध्यान लगाएं।
इसके बाद शिव कथा व शिव चालीसा का पाठ कर, भगवान शिव की आरती करें।
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