योग, ज्ञान और ध्यान के लिये विश्व के लोगों को आकर्षित कर रहा है ऋषिकेश का परमार्थ निकेतन


- विश्व के अनेक देशों से आये 107 साधकों ने परमार्थ निकेतन में रहकर योग, ध्यान, संगीत, मंत्र, सत्संग और गंगा आरती को एक सप्ताह तक किया आत्मसात
- स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने ’’जल संरक्षण’’ का कराया संकल्प
- योग, ध्यान और ज्ञान का जीवन में होना निंतात आवश्यक-स्वामी चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेश, 17 फरवरी। योग, ज्ञान और ध्यान के क्षेत्र में दुनिया केे अनेक देशों की नजर परमार्थ निकेतन की ओर है। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज के मार्गदर्शन में योग, अध्यात्म के साथ पर्यावरण के क्षेत्र में किये जा रहे उत्कृष्ट कार्यो के लिये परमार्थ निकेतन पूरी दुनिया के साधकों के लिये आकर्षण का केन्द्र बन चुका है। इसी परिपेक्ष में दुनिया के 10 देशों कनाडा, सिंगापुर, आयरलैड, इटली, स्पेन, स्वीडन और अन्य देशों से 107 साधकों का दल कनाडा निवासी जाॅन के मार्गदर्शन में योग एवं अध्यात्म को आत्मसात करने परमार्थ निकेतन आये हुये थे। इस दल ने एक सप्ताह तक परमार्थ निकेतन में रहकर योग, ध्यान, संगीत, मंत्र, सत्संग और गंगा आरती का लाभ लिया। जाॅन और उनकी धर्मपत्नी लियम के मार्गदर्शन में दल के सदस्य परमार्थ निकेतन में रहकर भारतीय जीवन शैली एवं भारतीय दर्शन से रूबरू हुये।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि ’’मनुष्य की ऊर्जा का केन्द्र उसके विचारों में सन्निहित है और श्रेष्ठ विचारों को बनाये रखने के लिये योग, ध्यान और ज्ञान का जीवन में होना निंतात आवश्यक है। श्रेष्ठ साहित्य से सकारात्मक चिंतन और श्रेष्ठ कर्म से सकारात्मक परिवर्तन होता है। उन्होने कहा कि आज प्रदूषण रूपी वैश्विक समस्या के समाधान के लिये मिलकर पर्यावरण एवं जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने की जरूरत है।
जाॅन ने कहा कि ’’भारतीय जीवन पद्धति सात्विक जीवन पद्धति है और भारतीय दर्शन में जीवन का सार सामहित है इसे भारत, आकर ही आत्मसात किया जा सकता है। उन्होने कहा कि परमार्थ गंगा तट वास्तव में ऊर्जा का केन्द्र है यहां आकर व्यक्ति चार्ज हो जाता है; ऊर्जावान हो जाता है। मैने अनुभव किया कि आरती और संकीर्तन के उस 1 घण्टे में आपके जीवन की सारी नकारात्मकताओं को समाप्त करने की शक्ति है।’’

जाॅन, लियम, मारिया, मनोसा, लीना, स्टीव, रीटा, नादिरा, मारिया, साध्वी आभा सरस्वती जी ने स्वामी जी महाराज के साथ विश्व के सभी लोगों को स्वच्छ जल की आपूर्ति हो इस भावना से वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी सम्पन्न की। दल के सदस्यों ने कहा कि यहां आकर हमें अपार शान्ति का अनुभव हुआ अब हम ऐसा प्लान कर रहे है कि पुनः जल्दी ही परमार्थ निकेतन और अधिक समय के लिये आयेंगे।
स्वामी जी ने दल के सभी सदस्यों का ध्यान जल एक वैश्विक समस्या है इस ओर आकर्षित कराते हुये जल संरक्षण का संकल्प कराया।
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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