पितृपक्ष विशेष: श्राद्ध में ब्राह्मण भोज के ज़रूरी नियम
जैसा कि हम सब जानते हैं कि पितृ पक्ष या श्राद्ध आने पर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और तृप्ति के लिए लोग श्राद्ध करते हैं। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्राद्ध आने पर ब्राह्मण के मुख द्वारा ही देवता और पितर भोजन ग्रहण करते हैं।
लेकिन यहाँ एक बात जाननी आवश्यक है, वो यह कि श्राद्ध पक्ष में ब्राह्मण को भोजन करवाने के भी कई विशेष नियम होते हैं। श्राद्ध का भोजन ग्रहण करने से पहले हर ब्राह्मण को इन नियमों का पालन जरूर करना चाहिए। आइए जानते हैं आखिर क्या हैं ये नियम।
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ब्राह्मण भोज के लिए नियम

- श्राद्ध पर भोजन ग्रहण करने वाले ब्राह्मण को हमेशा मौन रहकर भोजन करना चाहिए। जरुरत पड़ने पर सिर्फ हाथों से संकेत देने चाहिए।
- श्राद्ध भोज करते समय किसी भी ब्राह्मण को वहां परोसे गए भोजन की निंदा या प्रशंसा नहीं करनी चाहिए।
- श्राद्ध में भोजन ग्रहण करने के लिए बुलाए गए ब्राह्मण को सिर्फ चांदी, कांसे या पलाश के पत्तों पर ही खाना परोसना चाहिए।
- ध्यान रखें कभी भी श्राद्ध में किसी ब्राह्मण को लोहे या मिट्टी के बर्तनों में खाना नहीं परोसना चाहिए। हिंदू धर्म में ऐसा करना निषेध बताया गया है।
- श्राद्ध का भोजन ग्रहण करने आए ब्राह्मण से कभी भी भोजन कैसा बना है, यह सवाल नहीं पूछना चाहिए।
- श्राद्ध का भोजन ग्रहण करने के लिए बुलाए गए ब्राह्मण को कभी भी श्राद्ध के दिन दान नहीं देना चाहिए।
- इसके अलावा ब्राह्मण को भी ध्यान रखना चाहिए कि वो एक ही दिन में दो से तीन जगह श्राद्ध भोज ग्रहण करने न जाए।
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