शरीर के अंगदान के पुण्य कर्म से शरीर अमर करें – सद्गुरू ब्रह्मेशानंदजी
शरीर से आत्मा सर्व श्रेष्ठ हैं। इसलिए जीवन के अंतिम क्षण में शरीर के अंगों का दान करें। शरीर के अवयवों का दान करने का पुण्य कर्म हर एक मनुष्य करें। आत्मा अमर रहती हैं वैसे ही शरीर भी अमर करें ऐसा आवाहन सद्गुरु ब्रह्मेशानंदजी ने किया।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन तथा गोवा श्रमिक पत्रकार संघटना द्वारा आयोजित अध्यात्म तथा अवयव दान इस विषय के परिसंवाद में सद्गुरुजी ने हिस्सा लिया। दान करनेवाला सर्वश्रेष्ठ होता हैं। अवयव दान जैसा सर्वश्रेष्ठ दान करने का अवसर हर एक मनुष्य को प्राप्त हैं। ऐसे पुण्यकर्म का लाभ अवश्य लें। पत्रकार तथा वैद्यकीय संघटनाओ ने इस विषय की परीपूर्ण जानकारी जनता के सामने प्रस्तुत करने का उपक्रम गोवा में शुरू करना चाहिए ऐसा प्रतिपादन सद्गुरुजी ने किया। कार्यक्रम में सभी धर्मों के प्रतिनिधियनों ने हिस्सा लिया।


अवयव दान से नवजीवन दान – डॉ. ॲना फ्रान्सा
पोर्तुगाल के अवयव प्रत्यारोपण विभाग प्रमुख डॉ. ॲना फ्रान्सा ने पूरे विश्वभर में चलने वाले अवयव दान के बारे में जानकारी दी। एक व्यक्ति अपने अवयव दान से आठ लोगोंको जीवनदान देके म्रुत्यू पश्चात भी अवयव रूप से जिंदा रह सकती हैं ऐसा उन्होंने कहा।

कुरान के अनुसार जीवनदान सर्वश्रेष्ठ – मौलाना मोहम्मद अली
अवयव की खरीदारी पर बंदी होनी चाहिए। अवयव प्रत्यारोपण से किसीं व्यक्ती की जान बच जाती हैं तो अवश्य अवयव दान करना चाहीये ।

अवयव दान पवित्र कार्य हैं – फादर डोनाटो राॅड्रीग्स
प्रत्येक व्यक्ति में ईश्वर का अंश है, ऐसा बाईबल कहता है, इसलिए दुसरे को जीवनदान दें ऐसी सीख चर्च देती हैं जीजस ने प्रेम का संदेश दिया यह संदेश आगे ले जाने के लिए प्रेम से अवयव दान करने की तैयारी रखें।

Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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