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सूर्य कब होता है दक्षिणायन, जानिये इसका धार्मिक महत्त्व

सूर्य कब होता है दक्षिणायन, जानिये इसका धार्मिक महत्त्व

सूर्य कब होता है दक्षिणायन, जानिये इसका धार्मिक महत्त्व
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सूर्य कब होता है दक्षिणायन, जानिये इसका धार्मिक महत्त्व

21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस है और उसी दिन सूर्य ग्रहण भी पड़ रहा है और साथ ही अमावस्या है. 21 जून को ही सूर्य दक्षिणायन होता है.



वैसे तो सूर्य साल में दो बार अपनी  स्थिति बदलता है जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है तो सूर्य की दिशा उत्तरायण हो जाती है। वहीं, 21 जून को सूर्य दक्षिणायन हो जाता है। इस समय सूर्य मिथुन राशि में प्रवेश करता है।

धार्मिक ग्रंथों में सूर्य के उत्तरायण और दक्षिणायन के महत्व को बताया गया है। स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने इसकी महत्ता का उल्लेख भगवत गीता में किया है। आइए, जानते हैं-

भगवान श्रीकृष्ण भागवत गीता में अपने सखा अनुज से कहते हैं- हे अर्जुन! जब सूर्य उत्तरायण हो, दिन का समय हो और पक्ष शुक्ल हो। उस समय अगर कोई व्यक्ति अपने प्राण का त्याग करता है तो वह इस मृत्युभवन पर लौटकर नहीं आता है।

वहीं, जो व्यक्ति निशाकाल में, कृष्ण पक्ष में और सूर्य के दक्षिणायन में अपने प्राग त्यागता है, वह चंद्रलोक को जाता है। जहां से उसे वापस मृत्युलोक में आना पड़ता है।

यह भी पढ़ें-21 जून को कोरोना मुक्ति के लिए मंत्रयोग महाप्रार्थना एवं सर्वार्थ सिद्धि महायज्ञ

इसी कारणवश भीष्म पितामह महाभारत युद्ध के बाद भी मृत्यु शैया पर पड़े रहे और सूर्य के उत्तरायण होने का इंतजार करते रहे। जब सूर्य उत्तरायण हुआ तो उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण कर अंतिम सांस ली।

धार्मिक ग्रंथों में सूर्य के उत्तरायण को शुभ माना गया है। इसे देवताओं का दिन भी कहा जाता है। इस अवधि में धार्मिक कार्यों का निर्वाह किया जाता है।इनमें शादी, विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश आदि शामिल हैं।

जबकि सूर्य के दक्षिणायन होने पर कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता है, क्योंकि इसे नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, इस समय को इच्छा प्राप्ति और भोग-विलास की पूर्ति के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।



इस समय पूजा, जप, तप करने से व्यक्ति को रोग और शोक से मुक्ति मिलती है। इसे देवताओं के लिए रात्रि काल माना जाता है।

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June 20, 2020 2 min read
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