परमार्थ निकेतन में विभिन्न धर्मो के धर्मगुरूओं ने संगठित होकर प्रदूषण मुक्त भविष्य के निर्माण पर की चर्चा
- ’जल शक्ति, जन शक्ति बने, जन जागरण, जल जागरण बने’
- देश को महाभारत नहीं महान भारत बनायें – स्वामी चिदानन्द सरस्वती
- जल संरक्षण, मानसून में वर्षा जल का संरक्षण, वृक्षारोपण, धार्मिक स्थानों पर एसटीपी प्लांट, पी लो स्वच्छ जल मशीन जैसे अनेक विषयों पर हुई विशद चर्चा
ऋषिकेश, 11 जुलाई। परमार्थ निकेतन में पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण मुक्त भविष्य के निर्माण हेतु विभिन्न धर्मों के धर्मगुरूओं ने संगठित होकर संयुक्त प्रयास करने की अपील की।

परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, पूर्व जत्थेदार अकाल तख्त साहब सरदार श्री ज्ञानी गुरूबचन सिंह जी, अखिल भारतीय इमाम संगठन के प्रमुख डाॅ उमर अहमद इलियासी जी, मौलाना कोकब मुस्तफा जी एवं अन्य सिख और मुस्लिम धर्मगुरूाओं ने मिलकर परमार्थ निकेतन में जल संरक्षण हेतु विश्व ग्लोब का जलाभिषेक किया तथा सभी ने एक स्वर में जल और पर्यावरण के संरक्षण का संकल्प लिया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि यही संगम है इस देश का जिस तरह से नदियां मिलकर चलती है और महासागर बन जाती है उसी तरह इस देश में भी हम सभी धर्म, जाति-पाति के बन्धनों को तोड़कर, छोटी-छोटी दीवारों को तोड़ते हुये तथा छोटी-बड़ी बातों की दरारों को भरते हुये एक महासंगम बनाकर इस देश को एक महान भारत बनायें।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि भारत के विभिन्न धर्मो के धर्मगुरू एक साथ संगठित होकर जल, जंगल और जमीन को प्रदूषण मुक्त करने के लिये अपना योगदान दे तो विश्व स्तर पर जल और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक विलक्षण क्रान्ति हो सकती है तथा इससे धर्म के नाम पर जो भेद व्याप्त है वह भी समाप्त हो जायेगा जिससे भावी पीढ़ियों को एक सुखद भविष्य प्राप्त हो सकता है।

धर्मगुरूओं से चर्चा के दौरान स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि हमारे देश में मन्दिर, मस्जिद और गुरूद्वारों पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु जाते हैं, वहां पर स्वच्छ जल, स्वच्छ शौचालय और विकेन्द्रित एस टी पी जैसे संयंत्रों को लगाया लाये तो यहां से स्वच्छता का संदेश व्यापक स्तर पर और प्रभावी रूप से जायेंगा। उन्होने कहा कि धार्मिक स्थानों से वृक्षारोपण का प्रभावी संदेश प्रसारित किया जाये, प्रसाद स्वरूप पौधों की भेंट दी जायें तथा वृक्षारोपण को धर्म, आस्था, पर्व और वर्षगांठ से जोड़ दे तो इसके स्थायी और बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे।

धार्मिक स्थानों के आस-पास स्लोगन, प्रेरक चित्रों, शार्ट फिल्मों तथा धर्म गुरूओं के उद्बोधनों के माध्यम से श्रद्धालुओं की सोच और व्यवहार में विलक्षण परिवर्तन किया जा सकता है। स्लोगन के साथ हमें पेड़ों के महत्व यथा पेड़, दूषित हवा को सोखता है, तापमान को कम करते है, हरियाली और पेड़ों के सम्पर्क में आने पर अवसाद और तनाव को कम किया जा सकता है, ऐेसे अनेक उदाहरणों के माध्यम से लोगों की सोच में परिवर्तन किया जा सकता है।
सभी धर्मगुरूओं ने एक साथ बैठकर हाथों में हाथ डालकर परमार्थ निकेतन से अपने अनुयायियों को पर्यावरण एवं जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने का संदेश दिया। साथ ही सभी ने परमार्थ निकेतन आश्रम में पीलो शुद्ध सेवा फाउण्डेशन और ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस, परमार्थ निकेतन के संयुक्त तत्वाधान में ’’पीलो स्वच्छ जल मशीन’’ और एस टी पी प्लांट का अवलोकन किया। स्वामी जी महाराज ने कहा कि अन्य धार्मिक स्थलों पर भी इस तरह की स्वच्छ जल की मशीन और एस टी पी प्लांट लगे। यह एक आश्रम और एक संस्था की नहीं बल्कि पूरे देश की मुहिम बने।
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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