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अब भारत की देसी गाय भी देंगी एक दिन में 80 लीटर दूध : IFFCO KISAN

अब भारत की देसी गाय भी देंगी एक दिन में 80 लीटर दूध : IFFCO KISAN

अब भारत की देसी गाय भी देंगी एक दिन में 80 लीटर दूध : IFFCO KISAN
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अब भारत की देसी गाय भी देंगी एक दिन में 80 लीटर दूध : IFFCO KISAN

अब भारत की देसी गाय भी देंगी एक दिन में 80 लीटर दूध

पशुपालन के क्षेत्र में सरकार को एक बड़ी कामयाबी मिली है। अब तक भारतीय पशुपालक कादेसी नस्ल की गायों की ओर रूझान इसलिए कम था कि उनकी दूध उत्पादन क्षमता कम थी।

सरकार ने पशुपालकों की समस्या को समझा और भारतीय नस्ल की उत्पादन क्षमता को बढ़ाने के लिए अनेक कदम उठाएं हैं। इसी के अंतर्गत, देसी गायों की नस्ल सुधार के लिए अब सॉटेंड सेक्सड सीमन तकनीक का उपयोग मध्यप्रदेश में किया जाएगा।

इससे जहां दुधारू गाय की नस्ल में सुधार होगा तो वहीं उसका दूध उत्पादन भी बढ़ेगा।जिस से आप की देसी गाय भी 80 लीटर तक दूध दे सकेगी । देसी नस्ल की गायों में इस तकनीक के प्रयोग से केंद्र सरकार मादा अथवा नर बछड़े पैदा करने को लेकर अनुसंधान (रिसर्च) करवा रही है।

इसी क्रम में, मध्यप्रदेश में ज्यादा दूध देने वाली गायों की संख्या बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम ने ब्राजील से गिर और जर्सी नस्ल के सांडों के आठ हजार सीमन डोज मंगवाए हैं।

पशुपालन विभाग की माने तो ब्राजील में गिर और जर्सी नस्ल की गाय 35-40 लीटर दूध एक समय में देती है। जबकि भारत में इन नस्लों की गायों से एक समय में अधिकतम पांच लीटर दूध ही मिलता है। राज्यों की गायों में दुग्ध उत्पादन की क्षमता बढ़ाने के लिए गिर और जर्सी नस्ल कीसांड के आठ हजार सीमन डोज ब्राजील से मंगवाए हैं।

सरकार द्वारा ब्राजील नस्ल के सांड का सीमन सैंपल लेकर उसे देसी गाय में प्रत्यारोपित कराया गया है, जिसके बहुत अच्छे परिणाम आ रहे हैं। अब यह गाय प्रतिदिन एक समय में अधिकतम 40 लीटर दूध देगी। इस कार्यक्रम का लक्ष्य 2022 तक किसान की आमदनी को दुगुना करना है।

पशुपालन विभाग के डॉक्टरों की माने तो सीमन से अधिक पशुओं का गर्भाधान कराया जा सकता है। इसकी लागत भी अधिक नहीं आती है। यही कारण है कि सरकार ने सीमन लाने का फैसला किया है।

इस सीमन का उपयोग पशु चिकित्सालयों और कृत्रिम गर्भाधान क्लीनिकों द्वारा अधिक दूध देने वाली अच्छी गायों के गर्भाशय में स्थापित कर भ्रूण तैयार किए जाएंगे ताकि गायों में नस्ल सुधार किया जा सके। इसके बाद इन भ्रूणों को सामान्य गाय के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाएंगा। इससे गाय में नस्ल सुधार के साथ-साथ दूध उत्पादन भी बढ़ेगा।

खेती से संबंधित अधिक जानकारी के लिए आप यहाँ क्लिक करें: www.iffcokisan.com एवं www.iffcolive.com

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साभार – http://www.iffcokisan.com/

Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

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November 3, 2017 3 min read
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