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श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी हिंदी में

श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी हिंदी में

श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी हिंदी में
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श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी हिंदी में

श्री गुरू ग्रंथ साहिब हिंदी में

  • सिखों के ग्यारहवें गुरु ‘श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी’ हैं
  • इस पवित्र ग्रंथ में 12वीं सदी से लेकर 17वीं सदी तक भारत के कोने-कोने में रची गई ईश्वरीय बानी है
  • श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का संपादन सिखों के पांचवें गुरु ‘गुरु अर्जन देव जी’ द्वारा सन् 1604 ईसवी में कराया
  • पहली बार बाबा बुड्ढा जी द्वारा इस महान ग्रंथ के उपदेशों को पढ़ा गया

सिखों के सबसे पवित्र ग्रंथ गुरू ग्रंथ साहिब हिंदी में की महिमा अपार है। इसमें आत्मा, परमात्मा का पूजा ज्ञान और गुरू का प्रकाश भरा हुआ है। इस पवित्र ग्रंथ में ही सिखों की हर समस्या का समाधान मौजूद है, वे जब चाहें अपने प्रश्नों का उत्तर गुरु ग्रंथ साहिब में ढूंढ़ सकते हैं। हमारा ईश्वर आज कहां है, यह कोई नहीं जानता, लेकिन उससे जुड़ने का एक ज़रिया यही धार्मिक ग्रंथ हैं। इसी ईश्वरीय शक्ति के साथ हमारे बीच एक और पवित्र वजूद है सिखों के ग्यारहवें गुरु ‘श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी’ का।

1,430 पन्नों में उल्लेखित रागमयी गुरुबाणी गुरु ग्रंथ साहिब जी की शोभा को बढ़ाती है। इस महान ग्रंथ के संकलन, आलेखन एवं उच्चारण से जुड़ा इतिहास इसके सुनहरे शब्दों की तरह ही सुनहरा है। इस पवित्र ग्रंथ में 12वीं सदी से लेकर 17वीं सदी तक भारत के कोने-कोने में रची गई ईश्वरीय बानी लिखी गई है।

श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का संपादन सिखों के पांचवें गुरु ‘गुरु अर्जन देव जी’ द्वारा सन् 1604 ईसवी में कराया गया था, लेकिन इस महान ग्रंथ के संकलन एवं आलेखन का असली कार्य तो पहले गुरु ‘गुरु नानक देव जी’ द्वारा ही आरंभ कर दिया गया था।

ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार आखिरकार अगस्त 1604 में श्री हरिमंदिर साहिब, अमृतसर में गुरु ग्रंथ साहिब जी का पहला प्रकाश हुआ। संगतों ने कीर्तन दीवान सजाए, बाबा बुड्ढा जी द्वारा महान ग्रंथ के उपदेशों को पढ़ा गया। पहली पातशाही से छठी पातशाही तक अपना जीवन सिख धर्म की सेवा को समर्पित करने वाली बाबा बुड्ढा जी इस महान ग्रंथ के पहले ग्रंथी नियुक्त हुए।

परम ज्योति के रूप में समा जाने से पहले गुरु जी ने संगत से कहा कि ‘हमारे बाद ग्रंथ साहिब ही गुरु है, आज से इन्हें ही गुरु मानिए और इन्हीं के जरिए अपने दुखों का निवारण करें’ – श्री हरिमंदिर साहिब।

“आज्ञा पई अकाल दी, तबे चलायो पंथ, सब सिखन को हुक्म है गुरु मानयो ग्रंथ”… सिख कौम के दसवें नानक गुरू गोबिंद सिंह जी ने यह अनमोल वचन अपने मुख से बोले थे। जिसके अनुसार आज से गुरु ग्रंथ साहिब ही हमारे गुरु हैं और इसके अलावा किसी भी सिख को अन्य मानवीय गुरु के आगे सिर झुकाने की अनुमति नहीं है।

http://3.110.171.229/guru-granth-sahib-ji-prakash-utsav/

गुरू ग्रंथ साहिब हिंदी में  पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएं – https://vedpuran.files.wordpress.com/2013/02/siri-guru-granth-sahib-in-hindi.pdf

Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

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August 31, 2019 3 min read
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