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गुजरात: लॉकडाउन के बीच वेबकास्ट के ज़रिये हुए समागम में चार लाख जैन एकत्रित हुए

गुजरात: लॉकडाउन के बीच वेबकास्ट के ज़रिये हुए समागम में चार लाख जैन एकत्रित हुए

गुजरात: लॉकडाउन के बीच वेबकास्ट के ज़रिये हुए समागम में चार लाख जैन एकत्रित हुए
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गुजरात: लॉकडाउन के बीच वेबकास्ट के ज़रिये हुए समागम में चार लाख जैन एकत्रित हुए

अहमदाबाद; 27 अप्रैल;रविवार को अक्षय तृतीया पर दुनिया भर के 4 लाख से अधिक जैन अनुयायी वेबकास्ट के माध्यम जैन समागम में एकत्रित हुए और सोशल डिस्टेंसिंग बनाते हुए गुरुओं का सानिध्य प्राप्त किया।साइबरस्पेस समागम में सैकड़ों भक्तों ने अपने  400 दिन के उपवास का समापन किया।



कोविड-19 पर अंकुश लगाने के लॉकडाउन का पालन करते हुए सभी जैन अनुयायियों ने टेक्नोलॉजी के माध्यम से समागम में हिस्सा लिया और अपने गुरुओं का स्नेह प्राप्त किया। दुनिया भर के जैनियों को छह श्रद्धेय धार्मिक नेताओं के प्रवचनों को देखने का सौभाग्य मिला।

अहमदाबाद स्थित ढोलकिया स्टूडियो ने गुरुद्वारे को देश के विभिन्न शहरों से ऑनलाइन लाइव किया। कार्यक्रम का आयोजन एक जैन संगठन, गुरुप्रेम मिशन द्वारा किया गया था।

यह भी पढ़ें-एक दिया संतों के नाम : परमार्थ निकेतन की पालघर संतों को श्रद्धांजलि

भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों के जैन अनुयायियों ने ऑनलाइन कार्यक्रम में भाग लिया, जो लाइव वेबकास्ट पर था। जैन धर्म के चार प्रमुख संप्रदायों- डेरवसी, चरणकवासी, दिगंबर, और तेरापंथी– के धार्मिक गुरुओं ने प्रवचनों में भाग लिया और आशीर्वाद दिया।

ढोलकिया स्टूडियो के प्रोपराइटर अल्पेश ढोलकिया ने कहा कि तकनीक की वजह से दुनिया भर के जैन अनुयायी अपने धार्मिक गुरु की मौजूदगी में उपवास खत्म कर सकते हैं।

अहमदाबाद में रहने वाले 50 वर्षीय सौरिन शाह ने कहा “इस कार्यक्रम में भाग लेना एक अविश्वसनीय अनुभव था।लॉकडाउन हमारे लिए आशीर्वाद के स्वरुप था । अक्षय तृतीया जैन धर्म में विशेष महत्व रखती है और इसलिए यह अवसर हमारे लिए अविस्मरणीय था।”

दिल्ली के 32 वर्षीय अमित जैन और उनके परिवार को  वेबकास्ट दिलचस्प लगा। उन्होंने कहा, “लॉकडाउन के बीच, वेबकास्ट के ज़रिये हमें उद्धार करने वाले कार्यक्रम में भाग लेने का मौका मिला।



मुंबई की 50 वर्षीय पूजा शाह अपने परिवार के साथ वेबकास्ट में शामिल हुईं।उन्होंने कहा, “बहुत कम ही कम कार्यक्रम ऐसे होते हैं  जिनमे इतने सारे धार्मिक गुरुओं के प्रवचन सुनने को मिलते हैं।”

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April 27, 2020 2 min read
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