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गणेश चतुर्थी विशेष : जानिए कैसे मूषकराज बने गणेश जी की सवारी

गणेश चतुर्थी विशेष : जानिए कैसे मूषकराज बने गणेश जी की सवारी

गणेश चतुर्थी विशेष : जानिए कैसे मूषकराज बने गणेश जी की सवारी
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गणेश चतुर्थी विशेष : जानिए कैसे मूषकराज बने गणेश जी की सवारी

हिन्दू धर्म के अनुसार हम देवी देवताओं के साथ उनके वहां की भी पूजा करते हैं । उदाहरण के लिए शिवजी के वाहन नंदी हर शिव मंदिर में पूजनीय हैं, आदि शक्ति के साथ उनकी सवारी शेर को भी पूजा जाता है। विष्णु जी के शेषनाग को भी पूजनीय माना गया है और भगवान गणेश का वाहन  मूषकराज  है। गणेश जी की हर तस्वीर या मूर्ति में हम एक मूषकराज  को भी उनके साथ पाते हैं। कभी गणेश जी मूषक पर सवार हैं तो कभी मूषक उनके पास सेवा भाव में खड़ा है। लेकिन आखिर यह मूषकराज  कब और कैसे गणेश जी की सवारी बना, जानिए एक दिलचस्प पौराणिक कथा।



आज हम आपको एक रोचक कथा से परिचित कराने जा रहे हैं जो बताती है कि कैसे एक मूषक (विशाल चूहा), श्रीगणेश की सवारी बना।

महर्षि पराशर के आश्रम में घुसा मूषकराज

यह द्वापर युग की बात है जब एक दिन अचानक एक बहुत ही बलवान मूषक महर्षि पराशर के आश्रम में आ घुसा। यहां आकर वह महर्षि और उनके आश्रम में मौजूद लोगों को परेशान करने लगा। कभी वह महर्षि के आश्रम के मिट्टी के बर्तन तोड़ देता तो कभी अनाज को नष्ट कर देता।
धीरे-धीरे करके उसने सम्पूर्ण आश्रम की दशा ही बदल डाली। उसके खुराफात की सीमा तो तब टूट गई जब उसने ऋषियों के वस्त्र और ग्रंथों तक को कुतर डाला।

गणेश जी ने की महर्षि की मदद

इस बिगड़ैल मूषक की इस करतूत से दुःखी होकर महर्षि गणेश जी की शरण में गए। गणेश जी महर्षि की भक्ति से प्रसन्न हुए और उत्पाती मूषक को पकड़ने के लिए अपना पाश फेंका। पाश मूषक का पीछा करता हुआ पाताल लोक पहुंच गया और उसे बांधकर गणेश जी के सामने ले आया।

गणेश जी की शरण में गया मूषकराज

गणेश जी को सामने देखकर मूषक उनकी स्तुति करने लगा। गणेश जी ने कहा तुमने महर्षि पराशर को बहुत परेशान किया है लेकिन अब तुम मेरी शरण में हो इसलिए जो चाहो वरदान मांग लो।

यह भी पढ़ें-विघ्नहर्ता गणेश जी के इन 32 रूपों में छिपा है प्रथम पूज्य होने का कारण

मूषकराज  ऐसे बना भगवान गणेश की सवारी

गणेश जी के ऐसे वचन सुनते ही मूषक का अभिमान जाग उठा। उसने कहा कि मुझे आपसे कुछ नहीं चाहिए, अगर आपको मुझसे कुछ चाहिए तो मांग लीजिए। गणेश जी मुस्कुराए और मूषक से कहा कि तुम मेरे वाहन बन जाओ।

मूषक गणेश जी का वाहन बन गया

अपने अभिमान के कारण मूषक गणेश जी का वाहन बन गया। लेकिन यह कार्य कितना कठिन होगा, इस बात से अनजान था वह मूषक। क्योंकि जैसे ही गणेश जी मूषक पर चढ़े गणेश जी के भार से वह दबने लगा।
मूषक ने गणेश जी से कहा कि प्रभु मैं आपके वजन से दबा जा रहा हूं। कृपया कुछ ऐसा कीजिए कि मैं आपका भार संभाल सकूं।

गणेश जी ने दिखाया चमत्कार

मूषक के कर्तव्य भाव को देखते हुए गणेश जी ने अपना भार कम कर लिया। इसके बाद से मूषक गणेश जी का वाहन बनकर उनकी सेवा में लगा हुआ है।



गणेश पुराण में यह भी वर्णन किया गया है कि हर युग में गणेश जी का वाहन बदलता रहता है। सतयुग में गणेश जी का वाहन सिंह है। त्रेता युग में गणेश जी का वाहन मयूर है और वर्तमान युग यानी कलियुग में उनका वाहन घोड़ा है।

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August 27, 2020 3 min read
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