गणेश चतुर्थी का अवसर है ऐसे भगवान श्री गणेश की स्थापना देश के कई घरों में होगी। लोग स्थापना के लिए सुन्दर प्रतिमा का चयन करते हैं। लाखों लोग इस सवाल में उलझे रहते हैं कि श्रीगणेश प्रतिमा में सूंड दाईं और बाईं क्यों होती है। इनमें से कौन सी शुभ होती है और कौन सी अशुभ। यह सवाल भी कभी शायद आपके मन में आया होगा कि सीधी सूंड वाले गणेश भगवान की प्रतिमा क्यों नहीं दिखती है। वह इतनी दुर्लभ क्यों होती हैं। अगर आपके मन में भी यही सवाल हैं, तो आज आपको इनके जवाब मिल जाएंगे।
क्यों कहलाते हैं गणेश जी वक्रतुंड
गणेश जी को इनकी एकतरफ मुड़ी हुई सूंड के कारण ही वक्रतुण्ड कहा जाता है। मान्यता है कि गणेश जी की दक्षिणावर्ती मूर्ति यानी जिसमें सूंड दाईं और मुड़ी हो, उसकी विधिवत उपासना करने से अभीष्ट फल मिलते हैं। गणपति जी की बाईं सूंड में चंद्रमा का और दाईं में सूर्य का प्रभाव माना गया है।
गणेशजी की दाईं सूंड का संकेत
प्राय: गणेश जी की सीधी सूंड तीन दिशाओं से दिखती है। जब सूंड दाईं ओर घूमी होती है, तो इसे पिंगला स्वर और सूर्य से प्रभावित माना गया है। ऐसी प्रतिमा का पूजन विघ्न-विनाश, शत्रु पराजय, विजय प्राप्ति, उग्र तथा शक्ति प्रदर्शन जैसे कार्यों के लिए फलदायी माना जाता है।
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गणेशजी की बाईं सूंड का संकेत
बाईं ओर मुड़ी सूंड वाली मूर्ति को इड़ा नाड़ी और चंद्रमा से प्रभावित माना गया है। ऐसी मूर्ति की पूजा स्थायी कार्यों के लिए की जाती है। जैसे शिक्षा, धन प्राप्ति, व्यवसाय, उन्नति, संतान सुख, विवाह, सृजन कार्य और पारिवारिक खुशहाली आदि के लिए।
सीधी सूंड वाले गणेश जी क्या फल देते हैं
सीधी सूंड वाली मूर्ति का सुषुम्रा स्वर माना जाता है और इनकी आराधना रिद्धि-सिद्धि, कुंडलिनी जागरण, मोक्ष, समाधि आदि के लिए सर्वोत्तम मानी गई है। संत समाज ऐसी ही मूर्ति की ही आराधना करता है। सिद्धि विनायक मंदिर में दाईं ओर सूंड वाली मूर्त है, इसीलिए इस मंदिर की आस्था और आय शिखर पर है।
घरों में गणेश प्रतिमा की स्थापना
कुछ विद्वानों का मानना है कि दाई ओर घुमी सूंड के गणेशजी शुभ होते हैं, तो कुछ का मानना है कि बाई ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेशजी शुभ फल प्रदान करते हैं। हालांकि, कुछ विद्वान दोनों ही प्रकार की सूंड वाले गणेशजी का अलग-अलग महत्व बताते हैं। यदि गणेशजी की स्थापना घर में करनी हो तो दाई ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेशजी शुभ होते हैं। दाई ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेशजी सिद्धिविनायक कहलाते हैं।
गणेश प्रतिमा से वास्तु दोषों का नाश
कहा जाता है कि इनके दर्शन से हर कार्य सिद्ध हो जाता है। किसी भी विशेष कार्य के लिए कहीं जाते समय यदि इनके दर्शन करें, तो वह कार्य सफल होता है और शुभ फल प्रदान करता है। इस तरह की मूर्ति की अपासना से घर में सकारात्मक ऊर्जा रहती है और वास्तु दोषों का नाश होता है।
मुख्य द्वार पर कैसी हो गणेश प्रतिमा
घर के मुख्य द्वार पर भी गणेशजी की मूर्ति या तस्वीर लगाना शुभ होता है। यहां बाई ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेशजी की स्थापना करना चाहिए, क्योंकि वह विघ्नविनाशक कहलाते हैं। इन्हें घर में मुख्य द्वार पर लगाने के पीछे तर्क है कि जब हम कहीं बाहर जाते हैं तो कई प्रकार की बलाएं, विपदाएं या नेगेटिव एनर्जी हमारे साथ आ जाती है। घर में प्रवेश करने से पहले जब हम विघ्वविनाशक गणेशजी के दर्शन करते हैं तो इसके प्रभाव से यह सभी नकारात्मक ऊर्जा वहीं रुक जाती है व हमारे साथ घर में प्रवेश नहीं कर पाती।
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Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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