मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पधारे परमार्थ निकेतन
- माननीय न्यायाधीश रंजन गोगोई जी ने किया स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज का दर्शन और हुई चर्चा
- पराली, प्रदूषण से परिवर्तन की यात्रा, पी लो पानी, हैंडवाशिंग, जियो ट्यूब तकनीक, हरित शवदाह गृह, स्वच्छ, हरित और समृद्ध भारत तथा अन्य पर्यावरण के मुद्दों पर की चर्चा
- मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई जी ने परमार्थ गंगा तट पर किया गंगा पूजन
ऋषिकेश, 4 मार्च। परमार्थ निकेतन में जब अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव चल रहा है, अनेक देशों के योग प्रेमी पधारे है। आज भारत के मुख्य न्यायाधीश माननीय रंजन गोगोई जी ने परमार्थ निकेतन आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज से भेंटवार्ता की।
माननीय रंजन गोगोई जी को परमार्थ में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में सम्पन्न होने वाली विभिन्न गतिविधियों के बारे में स्वामी जी महाराज ने विस्तार से बताया।

उन्होने परमार्थ गंगा तट पर महाशिवरात्रि के पावन पर्व के अवसर पर माँ गंगा का विशेष पूजन किया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने पराली जलाने से बढ़ते वायु प्रदूषण पर चिंता व्यक्त करते हुये पराली सेे ईको फे्रंडली घर बनाने, जियो ट्यूब तकनीक, जल को स्वच्छ और पीने योग्य करने वाली ’’पी लो पानी’’ जल मन्दिर, ’’हैंडवाशिंग स्टेशन’’, हरित शवदाह गृह तथा परमार्थ निकेतन द्वारा संचालित स्वच्छता का संदेश देने वाली अन्य गतिविधियों पर चर्चा की।

स्वामी जी महाराज ने कई न्यायाधीशों से चर्चा करते हुये बताया कि प्रयागराज कुम्भ के दौरान पूरे मेला क्षेत्र में 100 से अधिक ’पी लो पानी’ वाले जल मन्दिर लगाये गये थे इसकी विशेषता है कि इसमें 90 प्रतिशत स्वच्छ जल प्राप्त होता है तथा 10 प्रतिशत जल बाहर निकलता है जिसका उपयोग हैंडवाशिंग के लिये किया जाता है। जिससे कुम्भ मेला कुछ हद तक प्लास्टिक बाॅटल मुक्त मेला साबित हुआ।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि ’’हरियाणा में पराली को जलाने की समस्या विकराल है, उसका समाधान निकालना जरूरी है। पराली से होने वाले प्रदूषण को काफी हद तक कम किया जा सकता है, हम इस ओर कार्य कर रहे है। एग्री बोर्ड के माध्यम से पांच से सात दिनों में एक सुन्दर मकान तैयार किया जा सकता है जो कि वाटरप्रूफ होता है, साथ ही ये बोर्ड लगभग 1100 सेल्सियस तक तापमान सहन कर सकते है, कीड़े और दीमक का खतरा भी नहीं रहता तथा इससे बने घरों का तापमान भी बाहर के मुकाबले कम रहता है। स्वामी जी ने जानकारी दी, पराली से बोर्ड भारत में ही तैयार किये जा रहे है इनसे महज तीन लाख रूपये में 300 वर्गफीट का मकान तैयार किया जा सकता है। पराली का उपयोग कर हम वायु प्रदूषण को कम करने के साथ स्लम एरिया और झुग्गी-झोपड़ी वाले स्थानों पर सुन्दर मकान बना सकते है। जिससे भारत के यशस्वी और ऊर्जावान प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का ’’हर परिवार का अपना घर हो’’ का सपना भी पूरा किया जा सकता है।

माननीय मुख्य न्यायाधीश ने आज की यात्रा को सुखद और शान्तिदायक बताया और कहा कि स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज से हुई चर्चा से प्रदूषित होती नदियों एवं वायु प्रदूषण को कम किया जा सकता है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज और अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव की निदेशक साध्वी भगवती सरस्वती जी के साथ माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री रंजन गोगोई जी ने विश्व स्तर पर स्वच्छ जल की आपूर्ति हेतु वाटर ब्लेसिंग सेरेमनी सम्पन्न की।
Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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