क्यूँ लगाती हैं छठ की व्रती महिलाएं लंबा सिंदूर ?
छठ पूजा में सुहाग की रक्षा के लिए स्त्रियां बड़ी निष्ठा और तपस्या से व्रत रखती हैं. सिंदूर और सुहाग का रिश्ते के बारे में हम सभी को पता है. फेरों के समय वधू की मांग में सिंदूर भरने का प्रावधान है. विवाह के पश्चात ही सौभाग्य सूचक के रूप में मांग में सिंदूर भरा जाता है. छठ पूजा में भी महिलाओं को माथे से लेकर मांग तक लंबा सिंदूर लगाए हुए देखा जाता है. इसके पीछे एक खास वजह है.
एक मान्यता के अनुसार, जो स्त्री अपने मांग के सिंदूर को बालों में छिपा लेती है, उसका पति समाज में भी छिप जाता है. उसके पति को सम्मान दरकिनार कर देता है. इसलिए यह कहा जाता है कि सिंदूर लंबा और ऐसे लगाएं कि सभी को दिखे कि यह सिंदूर माथे से लगाना आरंभ करके और जितनी लंबी मांग हो उतना भरा जाना चाहिए. यदि स्त्री के बीच मांग में सिन्दूर भरा है और सिंदूर भी काफी लंबा लगाती है, तो उसके पति की आयु लंबी होती है.
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इस वजह से सुग्रीव ने बालि से काफी मार खाई और किसी तरह अपनी जान बचाते हुए वह श्रीराम के पास पहुंचा और यह सवाल किया कि उन्होंने बालि को क्यों नहीं मारा.जिस पर श्रीराम ने कहा कि तुम्हारी और बालि की शक्ल एक सी है, इसलिए मैं भ्रमित हो गया और वार ना कर सका. किंतु यह पूरी सच्चाई नहीं है.क्योंकि भगवान श्रीराम किसी को पहचान ना सकें, ऐसा नहीं हो सकता. उनकी दृष्टि से कोई नहीं बच सकता.असली बात तो यह थी कि जब श्रीराम बालि को मारने ही वाले थे तो उनकी नजर अचानक बालि की पत्नी तारा की मांग पर पड़ी, जो कि सिंदूर से भरी हुई थी. इसलिए उन्होंने सिंदूर का सम्मान करते हुए बालि को तब नहीं मारा.किंतु अगली बार जब उन्होंने यह पाया कि बालि की पत्नी स्नान कर रही है, तो मौका पाते ही उन्होंने बालि को मार गिराया. इसी कहानी के आधार पर यह मान्यता बनी हुई है कि जो पत्नी अपनी मांग में सिंदूर भरती है, उसके पति की आयु लंबी होती है.
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छठ का व्रत पति की लंबी आयु की कामना से रखा जाता है इसलिए सुहाग के प्रतीक सिंदूर को खास जगह मिलती है।
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