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भारत पेट्रोलियम संस्थान के 80 आॅफिसरों ने परमार्थ गंगा आरती में किया सहभाग

भारत पेट्रोलियम संस्थान के 80 आॅफिसरों ने परमार्थ गंगा आरती में किया सहभाग

भारत पेट्रोलियम संस्थान के 80 आॅफिसरों ने परमार्थ गंगा आरती में किया सहभाग
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भारत पेट्रोलियम संस्थान के 80 आॅफिसरों ने परमार्थ गंगा आरती में किया सहभाग

भारत पेट्रोलियम संस्थान के 80 आॅफिसरों ने परमार्थ गंगा आरती में किया सहभाग

  • ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलांयस एवं गंगा एक्शन परिवार, परमार्थ निकेतन द्वारा स्वच्छता के क्षेत्र में संचालित किये जा रहे कार्याे के विषय में जानकारी प्राप्त की 
  • ’’व्यस्त रहे, मस्त रहे और स्वस्थ रहे’’ का दिया संदेश 
  • शेल्फ और सेल्फ का सामंजस्य है जीवन-स्वामी चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेश, 31 जनवरी। परमार्थ निकेतन में भारत पेट्रोलियम संस्थान के 80 आॅफिसर पहुंचे। उन्होंने परमार्थ गंगा तट पर होने वाली दिव्य गंगा आरती में सहभाग किया। भारत पेट्रोलियम संस्थान के अधिकारियों ने ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलांयस एवं गंगा एक्शन परिवार, परमार्थ निकेतन द्वारा स्वच्छता के क्षेत्र में संचालित किये जा रहे कार्याे के विषय में जानकारी प्राप्त की साथ ही उन्होने परमार्थ प्रतिनिधियों के  साथ परमार्थ आश्रम एवं विश्व शौचालय काॅलेज का भ्रमण किया। विश्व शौचालय काॅलेज द्वारा संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमोें का जायजा लेते हुये इसे व्यवहारिक जीवन के लिये महत्वपूर्ण बताया और भारत पेट्रोलियम संस्थान के प्रशिक्षुओं को भी प्रशिक्षित करने हेतु चर्चा की।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज से भारत पेट्रोलियम संस्थान के अधिकारियों ने फोन पर वार्ता की। स्वामी जी ने परमार्थ में सभी का अभिनन्दन किया। वार्ता के दौरान स्वामी जी ने कहा कि ऐसा बताया जा रहा है कि आज सुपरमून का दर्शन है, सच बात तो यह है कि हम लोग आज सुपरमून का दर्शन कर रहे है और हम जीवन में कई बार सुपरमैन भी बन जाते है पर जीवन को सुपर नहीं बना पाते। ’’सुपर’’ का मतलब ऋषियों की भाषा में है ’’मस्त’’। हम जीवन में व्यस्त तो रहते है पर मस्त नहीं रह पाते, अब हमें सीखना होगा व्यस्त रहते हुये हम कैसे स्वस्थ और मस्त रहे। मस्त रहने की कला भी जानना बहुत जरूरी है। स्वामी जी ने ’’व्यस्त रहे, मस्त रहे और स्वस्थ रहे’’ का संदेश दिया। उन्होने कहा कि लोग जीवन भर शेल्फ को तो भरते है लेकिन सेल्फ को भरना भूल जाते है, जीवन शेल्फ और सेल्फ का सामंजस्य है, यह बैलेंस बना रहा तो व्यक्ति बाहर और भीतर सुखी रहेगा; आन्नदित रहेगा और यह बहुत जरूरी भी है यही जीवन का पेट्रोल है। स्वामी जी ने कहा कि भारत पेट्रोलियम संस्थान ने भारत को गौरान्वित किया है, उनके द्वारा बनाया पेट्रोल हमारी गाड़ियों को चलाता है लेकिन अब हमें पेट्रोल के साथ-साथ पानी की अहमियत पर भी ध्यान देना होगा क्योंकि पानी की अहमियत भी कम नहीं है इसके लिये भी अब हमें आगे बढ़कर काम करना होगा। जल है जो कल है, जल है तो जीवन है।
स्वामी जी ने सतत और सुरक्षित विकास पर जोर देते हुये कहा कि अब हमें प्लास्टिक से पेट्रोल बनाने पर जोर देना होगा इससे कचरे का भी समाधान होगा और देश का पैसा भी बचेगा; भूमिगत पेट्रोल की खपत कम होगी; पर्यावरण प्रदूषण में कमी आयेगी और जल का भी संरक्षण होगा। उन्होने कहा हमें  पेट्रोल की तरह पानी को सुरक्षित करना होगा। जिस वेग से जल प्रदूषित हो रहा है और जल का स्तर घटता जा रहा है इससे ऐसा लगता है कि पानी की कीमते पेट्रोल से भी अधिक हो जायेंगी, सम्भावनायें तो यह भी लगायी जा रही है की आने वाले समय में जल संकट इतना बढ़ जायेगा कि तृतीय विश्व युद्ध पेटोªल के लिये नहीं पानी के लिये हो सकता है। अतः जल का संरक्षण जीवन के संरक्षण की तरह होना चाहिये।

स्वामी जी ने भारत पेट्रोलियम संस्थान के अधिकारियों से कहा कि अपने  सीएसआर ( काॅर्पोरेट सामाजिक दायित्व) का उपयोग कचरा संयोजन मशीन (किल वेस्ट) लगाने में करे तो देश में जो डंपिग की समस्या है उसका सरलता से समाधान हो जायेंगा। उन्होने अन्य संस्थानों से भी आहृवान किया कि वे एक बार अपने सीएसआर का प्रयोग देश के विभिन्न क्षेत्रों में कचरा संयोजन मशीन लगाने में करे तो देखते ही देखते कचरे का निपटारा हो जायेगा और वर्ष 2019 में निश्चित रूप से स्वच्छ भारत का परिदृश्य उभर का आयेगा। हमारे स्वच्छता अभियान अब झाडू तक सीमित न रहे बल्कि हमारी सोच में जो कचरा है उसे साफ करने की कोशिश करे क्योंकि स्वच्छ राष्ट्र का निर्माण करना, जल एवं पर्यावरण संरक्षण हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है। स्वामी जी ने कहा कि जितने  पेट्रोलियम संस्थान है उनके तीन संकल्प अवश्य हो ’कचरा कहीं न हो, जल प्रदूषित नहीं हो और वृक्षारोपण हो’। पूज्य स्वामी जी ने सभी को जल संरक्षण एवं संवर्धन के संकल्प हेतु प्रेरित किया।
स्वामी जी ने संत रविदास जयंती पर कहा कि ’जाति-पाति पूछें नहिं कोई, हरि को भजे  सो हरि का होई’ हमारे देश में जो जातियों का ग्रहण लगा है आज चन्द्र ग्रहण के अवसर पर इस ग्रहण से भी हम उपर उठे। जात-पात, भेदभाव, अलगाववाद, नक्सलवाद, आतंकवाद, हिंसावाद के ग्रहण से उपर उठकर अपने राष्ट्र को महान बनाये; समुन्नत करे क्योंकि राष्ट्र है तो हम है; देश है तो हम है।

Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

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February 1, 2018 4 min read
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