जन्मदिन विशेष: गौसेवा की मिसाल ….प्रेम का सागर विशाल…. देवी चित्रलेखाजी
कहते हैं भारत महान विभूतियों की जन्मदायी रही है. समाज को भक्ति और ज्ञान की राह दिखाने के लिए कोई आलोकिक शक्ति भक्ति पथ पर या समाज सेवी पथ पर अग्रसर होने अवश्य आता है. ऐसी ही एक दिव्य ज्योति है देवी चित्रलेखा जी. जिस उम्र में बच्चे बोलने मात्र के लिए मां-बाप पर निर्भर रहते हैं उतनी कम उम्र में देवी चित्रलेखा जी ने करीब 200 श्रीमद भागवत कथाओं का सफल आयोजन किया है.
देवी चित्रलेखा जी जन्म :-

देवी चित्रलेखा जी का जन्म 19 जनवरी , 1997 में ब्राह्मण परिवार में गौरपार्षद भक्त प्रवर पंडित टीकाराम शर्मा की धर्मपत्नी श्रीमती चमेली देवी शर्मा के पवित्र कोख (गर्भ) से भारत में हरियाणा राज्य के पलवल जिले के अन्तर्गत पावन ग्राम खाम्बी में हुआ. उक्त खाम्बी ग्राम (आदिवृन्दावन) ब्रज चौरासी कोस की परिधि में ही आता है. इस कारण देवी जी को ब्रजभूमि के दिव्य संस्कार स्वतः ही प्राप्त हो गये. जन्म के उपरान्त इस आलौकिक बालिका को देखने हेतु अनेक संत, महात्मा , पंडित दम्पति के घर पधारे और भविष्यवाणी की कि यह अल्प व्यस्क चित्रलेखा जी एक दिन देश-विदेश के बड़े-बड़े विद्वानों को चकित कर देंगी.
देवी चित्रलेखा जी की दीक्षा:-

देवी चित्रलेखा जी को मात्र चार साल की आयु में एक बंगाली संत श्री श्री गिरधारी बाबा महाराज से दीक्षा संस्कार हो गया. इनके परिवार में इनके माता-पिता, दादा-दादी,नाना-नानी पहले से ही भक्त रहे हैं। जब देवी जी 6 वर्ष की थीं तो एक बार अपने माता-पिता के साथ बरसाने में एक संत श्री रमेश बाबा महाराज के प्रवचन सुनने गई थीं. तो उन बाबा महाराज ने देवी को अपने प्रवचनों के बाद देवी जी के हाथ में माईक देकर कुछ बोलने के लिये खड़ा कर दिया कि “चलो चित्रलेखा कुछ सुनाओ तो उन्होंने हाथ में माईक लेकर करीब आधे घण्टे तक प्रवचन बोले. उस समय सभी वहाँ उपस्थित लोग भावविभोर आश्चर्य एवं चकित हो गये. स्वयं श्री श्री रमेश बाबा महाराज ने भी देवी को आशिर्वाद दिया व काफ़ी प्रशंसा की. उसी दिन से सभी को ऐसा लगा कि चित्रलेखा जी भी प्रवचन कर सकती हैं.
उसके बाद उनके गुरुदेव श्री श्री गिरधारी बंगाली बाबा ने प्रथम भागवत सप्ताह विधि-विधान से वृन्दावन के समीप तपोवन में (जहां पर कात्यायनी देवी ने भगवान श्री कृष्ण को पति रुप में प्राप्त करने के लिये 60 हजार वर्ष तपस्या की थी) रख दिया. सभी लोग व इनके माता-पिता घबरा रहे थे कि बाबा आप सात दिन की श्रीमद्भागवत सप्ताह मत रखो. एक-दो दिन का ही प्रवचन रख लिजिये. ये बालिका लगातार सात दिन का भागवत सप्ताह नही कर पायेगी परन्तु उनके गुरुजी नही माने दोनों भुजा उठाकर बोले घबराओं मत मेरा आशिर्वाद है कि ये सात दिन का ही श्रीमद्भागवत सप्ताह करेगी क्योकि श्रीराधारानी ने मुझे सपना दिया है कि यहाँ पुष्प वर्षा होगी। गुरुजी का आशिर्वाद हुआ यमुना नदी के किनारे तपोवन भूमि में श्रीमद्भागवत सप्ताह रख दिया गया. जबकि यहाँ पर आस-पास दो-तीन किलोमीटर तक कोई गांव या घर नही थे सभी सोच रहे थे कि यहाँ घोर जंगल में कथा सुनने कौन आयेगा? परन्तु गुरु जी का आशिर्वाद व देवी चित्रलेखा जी की भक्ति के कारण वहाँ जंगल में 10 हजार से भी अधिक श्रोता कथा श्रवण करने के लिये रोजाना आये और वहाँ सभी साधु-संत भी कथा श्रवण करने पहुँचे. और तो और वहाँ पर देवी जी के हाथ मोर व गाय रोटी दाना खाने व चुगने लगे. पशु-पक्षी भी प्रसन्न हो गये.
देवी चित्रलेखा जी की शिक्षा:-
देवी चित्रलेखा जी के परिवार में कोई भी सदस्य ऐसा नही है जो कि कथा करता हो, प्रवचन करता हो या गाने बजाने वाला हो. जबकि देवी जी प्रवचन करती हैं, हारमोनियम भी बजाती हैं व भजन संकीर्तन भी गाती हैं. 100 से भी ज्यादा रागों पर देवी जी महामंत्र का संकीर्तन करती हैं. इन्हें कहीं से भी कोई शिक्षा नही दी गयी. देवी चित्रलेखा जी श्रीमद्भागवत कथाओं के साथ-साथ साधारण पब्लिक स्कूल में पढाई की. जबकि उनके गुरुदेव श्री गिरधारी बाबा ने तो ये भी कहा है कि देवी जी को पढ़ाने की भी जरुरत नही है. ये तो पूर्व जन्म से ही पढ़ी हुई हैं. फ़िर भी लोकदृष्टि से देवी जी का स्वयं कहना है कि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण भी पढ़ाई करने सांदीपानी आश्रम में गये थे. देवी जी भारत के विभिन्न प्रान्तों में श्रीमद्भागवत का प्रचार कर चुकी हैं. जैसे बिहार, हरियाणा , उत्तर प्रदेश, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, गुजारात, मध्य-प्रदेश, उत्तरांचल, नागालैंड आदि. और अब देवी जी द्वारा भारत के बाहर भी श्रीमद्भागवत का प्रचार एवं हरिनाम संकीर्तन किया जा रहा है. जैसे अमेरिका के विभिन्न राज्यों में – न्यूयार्क, न्यूजर्सी, वाशिंगटन डीसी, मैरीलैंड ,पैंसिलविनिया, टैक्सास, इण्डियाना, फ्लोरिडा, बॉस्टन। देवी चित्रलेखा जी का उद्देश्य है कि भगवान श्री राधा-कृष्ण के नाम का देश में तथा दूसरे देशों में प्रचार हो. गुरु आज्ञा से श्री हरिनाम प्रचार करना इनका मुख्य उद्देश्य है.
देवी चित्रलेखा जी का विवाह :-

23 मई 2017 को गौ सेवा धाम हॉस्पिटल पलवल में देवी चित्रलेखा जी का विवाह संपन्न हुआ. इनका विवाह माधव प्रभुजी से संपन्न हुआ है. माधव जी मूल रूप से बिलासपुर, छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं लेकिन अब परिवार समेत पलवल में रहते हैं.
वर्ल्ड संकीर्तन ट्रस्ट :-

वर्ल्ड संकीर्तन यात्रा ट्रस्ट की स्थापना 10 मार्च 2008 को पूज्य देवी चित्रलेखा जी द्वारा की गई . वर्ल्ड संकीर्तन यात्रा संस्थान का मुख्यालय गांव-खम्बी, तहहादल जिला-पलवल, हरियाणा में है. इसका शाखा कार्यालय “गौ सेवा धाम” एनएच 2 गांव के पास भुलवाना गांव, होडल, पलवल (एचआर) है। वर्तमान में 50 से अधिक कर्मचारी ट्रस्ट के विभिन्न विभाग में काम कर रहे हैं। दुनियाभर में 100 से अधिक सदस्य ट्रस्ट के मिशन का समर्थन करते हैं।
गौ सेवा को समर्पित जीवन :-

एक दिन, देवी चित्रलेखाजी (देवजी) ने सड़क के किनारे एक घायल गाय को देखा और पाया कि उसकी स्थिति बहुत गंभीर है. तत्पश्चात, देवजी ने गाय की सेवा में भाग लिया और अपना प्राथमिक उपचार दिया. देवीजी इस घटना के बारे में बहुत चिंतित थीं और परिणामस्वरूप घायल और बीमार गायों को उचित देखभाल और उपचार प्रदान करने का एक विचार आया और “गऊ सेवा मंदिर अस्पताल” अस्त्तिव मे आया.
www.religionworld.in परिवार यही कामना करता है- चित्रलेखाजी को खुशियाँ मिले अपार….बधाई देता रिलिजन वर्ल्ड परिवार
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