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भारत के 10 प्राचीन मंदिरों के दर्शन करें

भारत के 10 प्राचीन मंदिरों के दर्शन करें

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भारत के 10 प्राचीन मंदिरों के दर्शन करें

भारत के 10 प्राचीन मंदिरों के दर्शन करें

भारत प्राचीन मंदिरों और धार्मिक धरोहरों का देश है, जहाँ हजारों साल पुरानी संस्कृति और स्थापत्य कला का दर्शन होता है। यहाँ 10 प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिरों की जानकारी दी गई है:

1. सोमनाथ मंदिर (गुजरात)

  • स्थापना: माना जाता है कि सोमनाथ मंदिर का निर्माण भगवान चंद्रदेव ने किया था।
  • विशेषता: यह 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। इस मंदिर पर इतिहास में कई बार आक्रमण हुए, लेकिन हर बार इसे पुनर्निर्मित किया गया।
  • स्थापत्य शैली: चोल और नागर शैली में निर्मित।
  • महत्व: पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस मंदिर में भगवान शिव ने स्वयं चंद्रमा को श्राप से मुक्त किया था।

2. केदारनाथ मंदिर (उत्तराखंड)

  • स्थापना: पांडवों द्वारा बनाया गया, और बाद में आदिगुरु शंकराचार्य ने इसका पुनर्निर्माण किया।
  • विशेषता: यह मंदिर हिमालय की ऊंचाई पर स्थित है और 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है।
  • महत्व: यह स्थल महाभारत काल से जुड़ा है और भगवान शिव को समर्पित है।
  • स्थापत्य शैली: पत्थरों से बने इस मंदिर की अद्भुत संरचना इसे अनोखा बनाती है।

3. रामेश्वरम मंदिर (तमिलनाडु)

  • स्थापना: इसे भगवान राम ने सीता माता के साथ मिलकर स्थापित किया था।
  • विशेषता: यह मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहाँ की गलियारों की लंबाई दुनिया में सबसे अधिक है।
  • महत्व: रामायण के अनुसार, यहाँ भगवान राम ने लंका जाने से पहले शिवलिंग की पूजा की थी।
  • स्थापत्य शैली: द्रविड़ शैली में निर्मित।

4. महाबलीपुरम के रथ मंदिर (तमिलनाडु)

  • स्थापना: पल्लव वंश के राजाओं द्वारा 7वीं शताब्दी में निर्मित।
  • विशेषता: पत्थरों को काटकर बनाए गए ये मंदिर ‘रथों’ की आकृति में हैं।
  • महत्व: यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल।
  • स्थापत्य शैली: मोनोलिथिक (एक ही पत्थर से निर्मित)।

5. खजुराहो के मंदिर (मध्य प्रदेश)

  • स्थापना: चंदेल वंश के राजाओं द्वारा 950-1050 ईस्वी में निर्मित।
  • विशेषता: इन मंदिरों की दीवारों पर अंकित कलात्मक मूर्तियाँ और शिल्पकला अद्भुत है।
  • महत्व: यह मंदिर हिंदू और जैन धर्म दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • स्थापत्य शैली: नागर शैली।

6. कोणार्क का सूर्य मंदिर (ओडिशा)

  • स्थापना: 13वीं शताब्दी में गंग वंश के राजा नरसिंहदेव प्रथम द्वारा निर्मित।
  • विशेषता: मंदिर को एक विशाल रथ के आकार में बनाया गया है, जिसमें 12 विशाल पहिए और 7 घोड़े हैं।
  • महत्व: यह सूर्य देव को समर्पित है और यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल है।
  • स्थापत्य शैली: कलिंग शैली।

7. द्वारकाधीश मंदिर (गुजरात)

  • स्थापना: भगवान कृष्ण ने इस मंदिर की स्थापना की थी।
  • विशेषता: यह चार धामों में से एक है।
  • महत्व: द्वारका को भगवान कृष्ण की नगरी माना जाता है।
  • स्थापत्य शैली: चोल शैली।

8. जगन्नाथ मंदिर (पुरी, ओडिशा)

  • स्थापना: 12वीं शताब्दी में गंग वंश के राजा अनंतवर्मन चोडगंग देव ने इसका निर्माण कराया।
  • विशेषता: यह मंदिर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को समर्पित है।
  • महत्व: यह चार धाम यात्रा का एक महत्वपूर्ण स्थल है।
  • स्थापत्य शैली: कलिंग शैली।

9. मदुरै मीनाक्षी मंदिर (तमिलनाडु)

  • स्थापना: पांड्य वंश के राजाओं द्वारा 6वीं शताब्दी में निर्मित।
  • विशेषता: मंदिर की भव्य गोपुरम (मीनारें) और नक्काशी इसे अद्वितीय बनाती है।
  • महत्व: यह मंदिर देवी मीनाक्षी (पार्वती) और भगवान सुंदरेश्वर (शिव) को समर्पित है।
  • स्थापत्य शैली: द्रविड़ शैली।

10. वैष्णो देवी मंदिर (जम्मू-कश्मीर)

  • स्थापना: यह मंदिर प्राचीन काल से देवी शक्ति की उपासना का प्रमुख केंद्र है।
  • विशेषता: यह त्रिकुटा पहाड़ियों पर स्थित है और यहाँ देवी महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली की पूजा होती है।
  • महत्व: इसे शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।
  • स्थापत्य शैली: पहाड़ी स्थापत्य शैली।

ये प्राचीन मंदिर न केवल धार्मिक आस्था के केंद्र हैं, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति, और वास्तुकला की महान धरोहर भी हैं। इन मंदिरों के दर्शन से आध्यात्मिक शांति मिलती है और भारत की ऐतिहासिक विरासत का अनुभव भी होता है।

~ रिलीजन वर्ल्ड ब्यूरो

Editorial Review Note

Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. .

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March 21, 2025 3 min read
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