हनुमानगढ़ी अयोध्या नगरी के प्रमुख स्थानों में से एक है. यह मंदिर राजद्वार के सामने ऊंचे टीले पर स्थित है. जहां आज भी छोटी दीपावली के दिन आधी रात को संकटमोचन का जन्म दिवस मनाया जाता है. ऐसी मान्यता है कि पावन नगरी अयोध्या में सरयू नदी में पाप धोने से पहले लोगों को भगवान हनुमान से आज्ञा लेनी होती है.
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब श्री राम अयोध्या नगरी छोड़ परम धाम को जाने लगे, तब उन्होंने अपने परम भक्त हनुमान को अपना राज काज सौंप दिया. तभी से पवन पुत्र हनुमान अयोध्या के राजा कहलाये जाने लगे. इसलिए अयोध्या आकर भगवान राम के दर्शन से पहले भक्त हनुमान जी के दर्शन करते हैं. कहा जाता है हनुमान जी आज भी रामजन्मभूमि और रामकोट की रक्षा करते हैं.
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किसने बनवाई हनुमानगढ़ी

17वीं शताब्दी में हनुमानगढ़ी एक टीला रह गया था। हनुमानजी की छोटी मूर्ति जो आजकल फूलों से ढकी हुई बड़ी मूर्ति के आगे रखी है, एक पेड़ के नीचे पूजी जाती थी. बाबा अभयराम दास जी यहां रहते थे. उन्हीं दिनों नवाब शुजाउद्दौला (1739-1754) का पुत्र बीमार हो गया. हकीम व वैद्य सब हार गये और रोग बढ़ता ही गया. नवाब परेशान हो गये तो हिंदू मंत्रियों ने बाबा अभयराम की महत्ता व उन पर हनुमत कृपा के बारे में बताया. नवाब मान गये.
मंत्रियों ने आकर बाबा से बड़ी अनुनय-विनय की तब उन्होंने फैजाबाद आकर नवाब के बेटे को देखा. अभयराम ने कुछ मंत्र पढ़कर हनुमानजी के चरणामृत का जल छिड़का. जिसके बाद वह उठकर बैठ गया. थोड़े ही दिनों में वह ठीक भी हो गया. नवाब बहुत प्रसन्न हुए, बाबा से बोले- हम आपको कुछ देना चाहते हैं, बाबा बोले- हम साधु हैं हमें कुछ नहीं चाहिए. नवाब बार-बार अनुरोध करने लगे तो बाबा ने कहा कि हनुमान जी की कृपा से यह ठीक हुए हैं, आपकी श्रद्धा है तो हनुमानगढ़ी बनवा दीजिए.
वाजिद अली शाह ने की थी भंडारे की शुरूआत
माह के पहले मंगल को नवाब वाजिद अली शाह ने भंडारे की परंपरा शुरू की थी. जब कुछ कट्टरपंथी मुसलमानों ने बवाल करने का प्रयास किया तो नवाब ने हिंदुओं का साथ दिया और उत्पाती लोगों को सजा दी. घोषणा की गयी थी कि मुसलमान वहां 28 जुलाई 1855 को नमाज पढ़ेंगे. इस घटना से काफी तनाव बढ़ा पर नवाब वाजिद अली शाह ने इससे जुड़े तथ्यों की बाकायदा जांच करायी और पाया गया कि केवल तिल का ताड़ बनाने का प्रयास किया गया.
कैसा है ये मंदिर
76 सीढ़ियों का सफर तय करने पर यहां भक्त पवनपुत्र के सबसे छोटे रूप के दर्शन करते हैं. ये हनुमान टीला है, जो हनुमानगढ़ी के नाम से प्रसिद्ध है. यहां पवनपुत्र हनुमान की 6 इंच की प्रतिमा है, जो हमेशा फूल-मालाओं से सुशोभित रहती है. हनुमान चालीसा की चौपाइयां मंदिर की दीवारों पर सुशोभित हैं.
क्यों खास है ये मंदिर
इस मंदिर में दक्षिण मुखी हनुमान जी हैं. मान्यता है कि यहां दर्शन करने और हनुमान जी को लाल चोला चढ़ाने से ग्रह शांत हो जाते हैं, जीवन में सफलता और समृद्धि मिलती है. यह हनुमान जी का सिद्ध पीठ है.
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Editorial Review Note
Written by Religion World — Bhavya Srivastava is the founder of Religion World and a veteran journalist with over 18 years of experience across broadcast, print, and digital media. A founding member of the International Association of Religion Journalists (IARJ), he has spent much of his career reporting on and producing content about religion, faith, and spirituality. View full profile →.
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