आसाराम पर जोधपुर कोर्ट का फैसला आज…कोर्ट ने दोषी करार दिया

आसाराम बाूप को जोधपुर की कोर्ट ने दोषी करार दिया
जोधपुर, 25 अप्रैल; एससी/एसटी अदालत द्वारा बलात्कार मामले में आसाराम बापू पर बुधवार को फैसला सुनाये जाने से पहले शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और धारा 144 लागू कर दी गई है। राजस्थान उच्च न्यायालय के निर्देशों के मुताबिक निचली अदालत मामले के सिलसिले में जोधपुर सेन्ट्रल जेल परिसर में अपना फैसला सुनाएगी। कानून और व्यवस्था के लिए आसाराम के अनुयायियों को खतरा मानते हुए पुलिस ने निषेधाज्ञा लागू कर दी है।
डीजीआई (जेल) विक्रम सिंह ने बताया कि हमने फैसला सुनाए जाने के दिन के लिए सभी प्रबंध किए हैं। जेल परिसर में अदालत कक्ष में अदालत के कर्मचारियों सहित मजिस्ट्रेट, आसाराम और सह आरोपी, बचाव एवं अभियोजन पक्ष के वकील मौजूद रहेंगे। विशेष अदालत में एससी / एसटी मामलों पर सात अप्रैल को अंतिम दलीलें पूरी हुई थी और अदालत ने फैसला सुनाने के लिए 25 अप्रैल की तारीख निर्धारित की थी।
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर की एक किशोरी लड़की की शिकायत पर आसाराम को गिरफ्तार किया गया था। वह मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में आसाराम के आश्रम में पढ़ाई कर रही थी। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि आसाराम ने जोधपुर के मनाई इलाके में स्थित अपने आश्रम में उसे बुलाया और 15 अगस्त 2013 की रात में उसका यौन शोषण किया। आसाराम को इंदौर में गिरफ्तार किया गया और एक सितंबर 2013 को जोधपुर लाया गया। वह दो सितंबर 2013 से न्यायिक हिरासत में हैं।
डीसीपी (पूर्व) अमन दीप सिंह ने बताया कि हमने 21 अप्रैल से शहर में सीआरपीसी की धारा 144 लगा दी है और यह 30 अप्रैल तक जारी रहेगी। इसके अलावा, हम शहर में आसाराम के आश्रमों पर करीबी नजर रख रहे हैं और सभी होटलों और अतिथिशालाओं के साथ-साथ बसस्टैंड और रेलवे स्टेशनों की जांच कर रहे हैं. सिंह ने बताया कि हम फैसला सुनाए जाने के दिन जेल को सील कर देंगे और किसी को भी जेल परिसर के करीब आने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
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कौन हैं आसाराम बापू ?
आसाराम बापू का संन्यास के पहले का नाम असुमल हरपलानी है और उनका जन्म साल 1941 में पाकिस्तान के सिंध इलाके में हुआ था। विभाजन के बाद सिंधी व्यापारी समुदाय से संबंध रखने वाला उनका परिवार अहमदाबाद आ गए और 20 साल की उम्र में असमुल ने अध्यात्म की राह पकड़ी और लीलाशाह को अपना गुरु माना। बस यहीं से असमुल का नाम आसाराम बापू हो गया। साल 1972 में आसाराम ने अहमदाबाद से लगभग 10 किलोमीटर दूर मुटेरा कस्बे अपना पहला आश्रम शुरू किया.
आसाराम के हैं करोड़ों भक्त
आसाराम के आश्रमों की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक दुनिया भर में उनके करोड़ों अनुयायी हैं। इसके आलावा उनके दुनिया भर में 400 से ज्यादा आश्रम भी हैं। जानकार बताते हैं कि आसाराम ने अपने कार्यक्रमों के दौरान मुफ्त भोजन जैसी सुविधाएं शुरू की थीं जिससे कमज़ोर तबके के लोग बड़ी संख्या में उनके अनुयायी बन गए। इसके अलावा आसाराम के गुजरात और मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में स्थित आश्रम मुफ्त देशी दवाएं भी बांटते हैं जिससे इलाके के लोग बड़ी संख्या में इन आश्रमों में जाने लगे।
ये सब रहे हैं आसाराम के वकील
आसाराम के केस देश के सबसे महंगे वकील लड़ते रहे हैं। इन वकीलों में राम जेठमलानी, राजू रामचंद्रन, सुब्रमण्यम स्वामी, सिद्धार्थ लूथरा, सलमान ख़ुर्शीद, केटीएस तुलसी और यूयू ललित जैसे नाम शामिल हैं। यूयू ललित तो आजकल सुप्रीम कोर्ट में जज हैं। बता दें कि अलग-अलग अदालतों ने आसाराम की ज़मानत की अर्जियां अभी तक 11 बार ख़ारिज की हैं।
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